जम्मू का कोऑपरेटिव मेडिकल स्टोर बंद होगा? जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
Jammu Kashmir News: जम्मू का कोऑपरेटिव मेडिकल स्टोर बंद होगा. जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट (High Court of Jammu and Kashmir and Ladakh) ने निर्देश जारी किया है. कोऑपरेटिव मेडिकल स्टोर बिश्नाह इलाके के अस्पताल में चल रहा है. याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बंद करने का फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि नियमों को तक पर रख कर चलाई जा रही दवा दुकानों को खाली कर देना चाहिए. सुरेंद्र शर्मा की ओर से दायर याचिका पर अदालत सुनवाई कर रही थी. याचिकाकर्ता की दलील थी कि बिश्नाह इलाके के उप जिला अस्पताल में संचालित कोऑपरेटिव मेडिकल स्टोर बिना नीलामी आवंटित किया गया है. याचिका में जम्मू के अस्पतालों की और भी दवा दुकान बिना नीलामी संचालित होने की बात कही गई थी. 17 जून 2008 को अदालत ने बिना आवंटन के चल रही सभी दवा दुकानों की नए सिरे से नीलामी का निर्देश जारी किया था. जम्मू के कोऑपरेटिव मेडिकल स्टोर को बंद करने का जारी हुआ आदेश अदालत के आदेश से कठुआ अस्पताल परिसर में चल रही दवा दुकान बंद हो गई. लेकिन बिश्नाह उप जिला अस्पताल की दवा दुकान पर ताला नहीं लगा. सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि बिना नीलामी के चल रही दवा दुकानों को खाली करवा कर नए सिरे से आवंटित किया जाए. याचिकाकर्ता ने नियमों को तक पर रख कर चलाई जा रही दवा दुकानों का मुद्दा उठाया था. याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि ऐसी दवा दुकानों को खाली करा देना चाहिए. सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग को अदालत ने आदेश दिया. अदालत ने नीलामी के बाद दवा दुकानों को आवंटित करने का फरमान सुनाया. ये भी पढ़ें- Jammu: 'नफरत की राजनीति करने वालों से दूर रहता हूं', सेमिनार में बोले फारूक अब्दुल्ला

जम्मू का कोऑपरेटिव मेडिकल स्टोर बंद होगा? जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
Netaa Nagari
लेखिका: प्रिया शर्मा, टीम नेतानागरी
परिचय
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण मामला सुनाया है, जिसमें जम्मू क्षेत्र का प्रसिद्ध कोऑपरेटिव मेडिकल स्टोर बंद करने का आदेश दिया गया है। यह निर्णय स्थानीय समुदाय पर गंभीर असर डाल सकता है, क्योंकि यह स्टोर वर्षों से स्वास्थ्य सेवा की सुविधा प्रदान कर रहा है।
जारी कानूनी लड़ाई
इस मामले की कानूनी लड़ाई काफी लंबे समय से चल रही थी। स्थानीय नागरिकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें आवेदन किया गया था कि यह कोऑपरेटिव मेडिकल स्टोर स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी जरूरतों को पूरा कर रहा है और इसे बंद करने से स्वास्थ्य सेवा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। न्यायालय ने इस मामले पर ध्यान दिया और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
जजमेंट का मुख्य बिंदु
उच्च न्यायालय ने कहा कि इस स्टोर के बंद होने से कई लोगों को ज़रूरतमंद दवाइयों तक पहुंचने में समस्या होगी। हालांकि, साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा है कि स्टोर का संचालन नियमों और कानूनों के अनुरूप होना चाहिए। न्यायालय के इस आदेश ने स्थानीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में एक नई बहस को जन्म दिया है। क्या यह सही है कि एक आवश्यक सेवा को बंद किया जाए? इस सवाल का जवाब कई लोगों के मन में उठ रहा है।
स्थानीय व्यवसायों पर असर
कोऑपरेटिव मेडिकल स्टोर का बंद होना न केवल ग्राहकों के लिए समस्या है, बल्कि यह स्थानीय व्यवसायों पर भी व्यापक असर डाल सकता है। कई छोटे व्यवसाय इस स्टोर से सीधे जुड़े हुए हैं और इसके बंद होने से उनकी आय में गिरावट आने की संभावना है। स्थानीय व्यापारियों ने इस फैसले का विरोध किया है और उच्च न्यायालय से पुनर्विचार की मांग की है।
समुदाय की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कोऑपरेटिव मेडिकल स्टोर बंद किए जाने से उनकी स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित होंगी। उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ आंदोलन करने का निर्णय लिया है। स्थानीय नेताओं ने भी इस मामले में अपनी आवाज उठाई है और जनहित में इस फैसले को पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।
निष्कर्ष
जम्मू के कोऑपरेटिव मेडिकल स्टोर का संभावित बंद होना न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवा ढांचे के लिए एक गंभीर मुद्दा है। न्यायालय का फैसला इस सवाल को उठाता है कि क्या स्वास्थ्य सेवाओं को एक व्यवसाय की तरह संचालन करना उचित है या नहीं। इस स्थिति पर निगरानी जारी रहेगी, और देखना है कि क्या उच्च न्यायालय इस निर्णय पर पुनर्विचार करेगा।
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