इस शक्तिपीठ में मूर्ति नहीं श्रीयंत्र की होती है पूजा, चमत्कारिक मंदिर में आज भी रात को अप्सराएं करती हैं नृत्य
उत्तराखंड में स्थित माता के कई शक्तिपीठों में से एक है चंद्रकूट पर्वत पर स्थित चंद्रबदनी शक्ति पीठ। माना जाता है कि इस मंदिर में माता का धड़ गिरा था। इस मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के बारे में आज हम आपको अपने इस लेख में जानकारी देंगे।

इस शक्तिपीठ में मूर्ति नहीं श्रीयंत्र की होती है पूजा, चमत्कारिक मंदिर में आज भी रात को अप्सराएं करती हैं नृत्य
Netaa Nagari , लेखिका: प्रियंका शर्मा, अपनी टीम netaanagari
परिचय
भारत देश में शक्तिपीठों का विशेष स्थान है। यहां की मान्यता और चमत्कारिक घटनाएं भक्ति और श्रद्धा का एक अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करती हैं। एक अनोखे शक्तिपीठ की बात करते हैं, जहां मूर्तियों की पूजा नहीं होती, बल्कि पूजा का आधार होता है श्रीयंत्र। इसके पीछे की कथा और अप्सराओं के रात के नृत्य की अवधारणा इसे और भी दिलचस्प बनाती है।
शक्तिपीठ का विशेष महत्व
यह शक्तिपीठ विशेष रूप से अपने अनोखे पूजा पद्धति के लिए प्रसिद्ध है। श्रीयंत्र को देवी का प्रतीक माना जाता है, जो शक्ति का स्रोत होता है। श्रद्धालु यहां आकर श्रीयंत्र की पूजा करते हैं, जबकि अन्य शक्तिपीठों में देवी-देवताओं की मूर्तियों की पूजा सामान्य है। इससे जुड़े आस-पास के क्षेत्र में विशेष अलौकिकता बसी हुई है।
अप्सराओं का चमत्कार
इस शक्तिपीठ की एक खासियत यह भी है कि रात के समय यहां अप्सराएं नृत्य करती हैं। श्रद्धालु कहते हैं कि जब भी चंद्रमा की पूर्णिमा होती है, तो अयोध्या की अप्सराएं श्रीयंत्र के चारों ओर नृत्य करती हैं। यह नृत्य दर्शकों को रोमांचित कर देता है और इसे असाधारण माना जाता है।
धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि जो भी भक्त यहां आकर श्रीयंत्र की पूजा करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। शक्तिपीठ में विशेष पूजा के दौरान भक्तों की संख्या में अचानक वृद्धि हो जाती है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह जगह केवल भक्ति के लिए नहीं, बल्कि चमत्कारों के लिए भी जानी जाती है।
सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव
यह शक्तिपीठ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह आसपास के गांवों और शहरों की सांस्कृतिक पहचान भी बन गई है। यहां के त्योहार और मेले दूर-दूर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। शक्ति की अनुभूति के साथ-साथ यह स्थान सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देता है।
निष्कर्ष
इस शक्तिपीठ की भक्ति केवल मूर्तियों में नहीं, बल्कि श्रीयंत्र में निहित है। अप्सराओं का रात का नृत्य और यहां की अनोखी पूजा पद्धति इसे एक विशेष धार्मिक स्थल बनाती है। यह स्थान भक्ति और चमत्कार का अद्भुत मेल है। आने वाले भक्तों को निश्चित रूप से एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करने के लिए तैयार है।
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