श्रीलंका बना बारूदी सुरंगों का अड्डा, 2028 तक मुक्ति दिलाने का अमेरिकी संकल्प भी संकट में
श्रीलंका में जब संघर्ष से विस्थापित हुए हज़ारों नागरिक फिर से बसने के लिए वापस आए, तब भी बारुदी सुरंगों ने कहर ढाया। इन्हें हटाना शुरू किया गया और बारूदी सुरंगों के बारे में जागरूकता अभियान भी चलाए गए। लेकिन फिर भी दुर्घटनाएँ होती रहीं।

श्रीलंका बना बारूदी सुरंगों का अड्डा, 2028 तक मुक्ति दिलाने का अमेरिकी संकल्प भी संकट में
Netaa Nagari
लेखक: प्रिया शर्मा, टीम नेटानगरी
परिचय
श्रीलंका में बारूदी सुरंगों की समस्या लगातार विकट होती जा रही है। इस द्वीप देश में फैली हुई बारूदी सुरंगों की संख्या ने आमजन की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। अमेरिका द्वारा 2028 तक श्रीलंका को इस समस्यों से मुक्त करने का संकल्प भी अब संकट में है। इस लेख में, हम श्रीलंका की स्थिति, बारूदी सुरंगों के प्रभाव और अमेरिका के वादों पर चर्चा करेंगे।
श्रीलंका की बारूदी सुरंग प्रतिबंधित क्षेत्र
श्रीलंका में किए गए संघर्षों के बाद, लाखों बारूदी सुरंगें जमीन में दबी रह गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अभी भी हजारों किलोमीटर भूमि ऐसी है जहाँ बारूदी सुरंगों का खतरा है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि स्थानीय निवासियों का जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
अमेरिका का समर्थन और संकल्प
अमेरिका ने 2028 तक श्रीलंका को बारूदी सुरंगों से मुक्त करने का वादा किया था। यह संकल्प एक बड़े कार्यक्रम का हिस्सा था जिसमें तकनीकी सहायता और वित्तीय सहायता शामिल थी। हालांकि, इस संकल्प की दिशा में प्रगति धीमी रही है, जिसके कारण स्थानीय समुदायों में चिंता बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों की आवाज
श्रीलंका के नागरिकों का कहना है कि बारूदी सुरंगों का खतरा उनके रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित कर रहा है। बच्चों के खेलने की जगह अब खतरनाक मानी जाती है। दैनिक कामकाज के लिए भी लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। ऐसे में समझौते और योजनाएँ कितनी प्रासंगिक हैं, यह एक बड़ा प्रश्न बन गया है।
समाज में जागरूकता और पहल
स्थानीय एनजीओ और सामाजिक संगठनों ने बारूदी सुरंगों को लेकर जागरूकता फैलाने का काम शुरू किया है। उन्होंने स्थानीय लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ, बारूदी सुरंगों के खतरों से अवगत कराया है। हालांकि, यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस समस्या का समाधान करे।
निष्कर्ष
श्रीलंका में बारूदी सुरंगों की समस्या एक गंभीर चुनौती है। अमेरिका का 2028 तक मुक्ति दिलाने का संकल्प, यदि अधूरा रहा, तो यह स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़े खतरे का सबब बनेगा। हमें इस दिशा में और प्रयास करने की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित और विकसीत श्रीलंका में रह सकें।
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