खेत बचाओ अभियान को जनांदोलन में बदलने की पहल, किसानों ने लिया मिट्टी और कृषि संरक्षण का संकल्प

  अल्मोड़ा, 6 जून 2026 *किसानों के हित में हो रहा कार्य, बढ़ रही है आय: मुख्यमंत्री* *अल्मोड़ा के हवालबाग

Jun 7, 2026 - 00:37
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खेत बचाओ अभियान को जनांदोलन में बदलने की पहल, किसानों ने लिया मिट्टी और कृषि संरक्षण का संकल्प
खेत बचाओ अभियान को जनांदोलन में बदलने की पहल, किसानों ने लिया मिट्टी और कृषि संरक्षण का संकल्प

खेत बचाओ अभियान को जनांदोलन में बदलने की पहल, किसानों ने लिया मिट्टी और कृषि संरक्षण का संकल्प

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कम शब्दों में कहें तो अल्मोड़ा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने किसानों को अपने संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, कृषि क्षेत्र की आय बढ़ाने के लिए नई योजनाओं का भी ऐलान किया गया।

अल्मोड़ा, 6 जून 2026: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के हवालबाग में आयोजित "खेत बचाओ अभियान" कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य कृषि के विकास एवं संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय में इजाफा करना था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में इसे जनांदोलन की संज्ञा दी और किसानों से मिट्टी एवं कृषि संसाधनों के संरक्षण का संकल्प दिलवाया।

खेत बचाओ अभियान

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कृषि क्षेत्र तथा किसानों के भविष्य को सुरक्षित बनाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अल्मोड़ा में 6 करोड़ रुपये की लागत से तारबाड़ लगाए जाने की योजना बनाई है, जिससे खेती को संरक्षित किया जा सकेगा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि "खेत बचाओ अभियान" केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह जनभागीदारी से बना एक आन्दोलन है। उन्होंने कहा, "कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी है।" सीएम ने यह भी बताया कि मिट्टी का संरक्षण हमारे लिए आवश्यक है, क्योंकि मिट्टी हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जिसे हमें मां के समान पूजनीय मानना चाहिए।

मुख्यमंत्री का संबोधन

मुख्यमंत्री ने किसानों को सलाह दी कि वे समय-समय पर मिट्टी का परीक्षण कराकर सही फसलों का चयन करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाते हुए उत्पादन बढ़ाना चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलायी जा रही हैं, जैसे कि पॉलीहाउस, फलोत्पादन एवं कोल्ड स्टोरेज के लिए विशेष प्रावधान।

उन्होंने कहा कि "हमें अपने कृषि क्षेत्र के आर्थिक समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।" जल, जंगल, जमीन और प्रकृति के संरक्षण के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के "मन की बात" कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

किसानों की बिरुदावलि

इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि किसानों को जैविक खेती को अपनाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है।

इस कार्यक्रम में जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने भी अपनी बात रखी और कहा कि जिला प्रशासन सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन में सहयोग दे रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी शामिल हुए और कृषि संरक्षण, मिट्टी संवर्धन और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में विधायक, प्रमुख जनप्रतिनिधियों और अन्य अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किसानों के हित में यह प्रयास जारी रहेगा। सभी ने मिलकर खेतों को बचाने और कृषि संसाधनों के संरक्षण के संदर्भ में अपनी प्रतिबद्धता जतायी।

आगे चलकर, किसान अपने अधिकारों और संसाधनों के प्रति सजग रहेंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध कृषि व्यवस्था का निर्माण कर सकें।

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सादर,
टीम नेटा नगरी - सुमन शर्मा

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