देहरादून: अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का फायर सेफ्टी ऑडिट, सीएम धामी का निर्देश

मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर में अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के दिए निर्देश मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर के सभी अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, बड़े मॉल, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों का […] Source

Jun 23, 2026 - 18:37
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देहरादून: अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का फायर सेफ्टी ऑडिट, सीएम धामी का निर्देश
देहरादून: अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का फायर सेफ्टी ऑडिट, सीएम धामी का निर्देश

देहरादून में फायर सेफ्टी ऑडिट का ऐलान

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के सभी अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। इस कदम का उद्देश्य सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना और आग से संबंधित घटनाओं को रोकना है।

मुख्यमंत्री का आधिकारिक निर्देश

सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेशभर के सभी प्रमुख अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, और बड़े मॉल, होटल की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। उन्होंने यह भी تاکید किया कि सभी सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों की फायर सेफ्टी ऑडिट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जाए।

फायर सेफ्टी ऑडिट का महत्व

फायर सेफ्टी ऑडिट न केवल आग से होने वाले हादसों को टालने में मदद करेगा, बल्कि यह सभी नागरिकों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगा। पिछले कुछ समय में, कई राज्यों में आग लगने की घटनाएँ हुई हैं, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान हुआ है। इसलिए, इस कदम को अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।

सीएम के कार्यालय से मिली जानकारी

सीएम धामी ने इस विषय पर जोर देते हुए कहा कि सुरक्षा उपायों को अपनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। अधिकारियों को फायर सेफ्टी ऑडिट के लिए सभी जरूरी साधन और उपकरण मुहैया करने के समझौते पर भी विचार करना चाहिए।

समुदाय का समर्थन

स्थानीय नागरिकों एवं आग्रही संस्थाओं का भी इस कदम के लिए समर्थन प्राप्त हो रहा है। उनके अनुसार, यह पहल सुरक्षा को बढ़ाने में मददगार होगी। इसके अतिरिक्त, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में छात्रों और रोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी के लिए एक बड़ा लाभ साबित होगा।

भविष्य की योजना

आग प्रबंधन का यह दृष्टिकोण केवल प्राथमिकता नहीं, बल्कि सरकारी संस्थाओं, कानूनी एजेंसियों और नागरिकों के बीच एक सहयोग और संवाद का आधार भी बनेगा। इस प्रक्रिया के तहत मौजूदा सुरक्षा प्रोटोकॉल की सच्चाई और प्रभावशीलता का आकलन किया जाएगा, जिससे भविष्य में और अधिक सकारात्मक कदम उठाए जा सकें।

इस पहल के बाद, मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि हर जिले में एक विशेष सेल बनाई जाएगी, जो इन ऑडिटों को सुनिश्चित करेगी और सिस्टम को नियमित रूप से अपडेट रखेगी। यह सभी सम्बंधित संस्थानों और व्यक्तियों के लिए एक नया आशा का संकेत है।

फायर सेफ्टी ऑडिट का यह कदम सभी स्वास्थ्य सेवाओं तथा व्यावसायिक संस्थाओं को उत्तरदायी बनाएगा। इसके साथ-साथ, यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में कभी भी ऐसी घटनाएँ न हों, जो मानव जीवन और संपत्ति को खतरे में डाल सकें।

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह निर्णय निश्चित रूप से प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सभी संबंधित विभागों को चाहिए कि वे इस दिशा में तत्परता से कार्य करें और सुनिश्चित करें कि सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए।

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सुरक्षित रहें और सुरक्षित रखें।

सादर,
टीम नेटा नगरी - साक्षी मिश्रा

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