पौड़ी में कृषि भूमि विवाद: प्रशासन ने शुरू की जांच, क्या बिल्डर का मकसद है अपार्टमेंट्स?

Rajkumar Dhiman, Dehradun: पौड़ी के कोट विकासखंड की सितोनस्यूं पट्टी के ऐराड़ी गांव में 112 नाली (करीब 5.5 एकड़) भूमि खरीद के विवाद ने अब प्रशासनिक जांच का रूप ले लिया है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एडीएम पौड़ी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है। … The post पौड़ी में कृषि उपयोग या बिल्डर के अपार्टमेंट होंगे खड़े, डीएम स्वाति ने बैठाई जांच appeared first on Round The Watch.

Aug 5, 2026 - 18:37
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पौड़ी में कृषि भूमि विवाद: प्रशासन ने शुरू की जांच, क्या बिल्डर का मकसद है अपार्टमेंट्स?
पौड़ी में कृषि भूमि विवाद: प्रशासन ने शुरू की जांच, क्या बिल्डर का मकसद है अपार्टमेंट्स?

पौड़ी में कृषि भूमि विवाद: प्रशासन ने शुरू की जांच, क्या बिल्डर का मकसद है अपार्टमेंट्स?

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कम शब्दों में कहें तो, पौड़ी जिले में एक बड़े भूमि खरीद विवाद ने प्रशासन को सक्रिय कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने विवाद की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है।

जागरण का मामला: ऐराड़ी गांव की भूमि पर विवाद
पौड़ी के कोट विकासखंड के सितोनस्यूं पट्टी के ऐराड़ी गांव में 112 नाली (लगभग 5.5 एकड़) कृषि भूमि की खरीद अब एक गंभीर विवाद में बदल गई है। प्रशासनिक जांच का संचालन करने के लिए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने एडीएम पौड़ी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति भूमि खरीद के उद्देश्य, विभागों से प्राप्त अनुमतियों और सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे हाउसिंग प्रोजेक्ट की दावों की गहराई से जांच करेगी। संबंधित भूमि पर सभी प्रकार के निर्माण पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

भूमि खरीद के पीछे की कहानी
प्रशासन के अनुसार, नई दिल्ली स्थित दून हैचरीज लिमिटेड ने ऐराड़ी गांव में 112 नाली कृषि भूमि खरीदी है। हालांकि, भूमि खरीद के दस्तावेजों में इसका उद्देश्य कृषि उपयोग घोषित किया गया था जबकि सोशल मीडिया पर इसे 'व्हिस्परिंग पाइन' नामक हाउसिंग सोसायटी के विकास के लिए प्रचारित किया जा रहा है। इस विरोधाभास के कारण ग्रामीणों ने आपत्ति जताई और प्रशासन की ओर से जांच शुरू की गई।

भूमि खरीद का समय और ग्रामीणों की चिंताएं
इस वर्ष जुलाई में, गांव के 12 ग्रामीणों ने अपनी भूमि बेचने की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें से 112 नाली भूमि का पंजीकरण पूरा हो चुका है। ग्रामीणों के अनुसार, कुल 144 नाली भूमि बेचने की योजना है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी ने यमकेश्वर ब्लॉक के कोठार दिउली निवासी एक व्यक्ति के माध्यम से भूमि खरीदी, जिससे नए भू-कानून के पालन में बाधा आई है।

भू-माफिया का आरोप और डेमोग्राफी पर प्रभाव
सामाजिक कार्यकर्ता रोहित भट्ट ने चेतावनी दी है कि पहाड़ में कृषि भूमि खरीदकर हाउसिंग सोसायटी विकसित करने का प्रयास भू-माफियाओं के नए तरीकों को दर्शाता है। उनका कहना है कि सरकार की नीति बाहरी व्यक्तियों को 250 वर्गमीटर से अधिक भूमि खरीदने से रोकती है, लेकिन स्थानीय व्यक्तियों का सहारा लेकर इसे दरकिनार किया जा रहा है। यदि ऐसा हुआ, तो क्षेत्र में बाहरी आव्रजन बढ़ने से स्थानीय डेमोग्राफी प्रभावित होगी।

कंपनी की सफाई: सेब का बगीचा और होम-स्टे का दावा
दून हैचरीज लिमिटेड के निदेशक नरेंद्र सिंह ने सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कंपनी किसी भी प्रकार की हाउसिंग समुच्चय का निर्माण नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि भूमि पर सेब का बगीचा तैयार किया जाएगा और भविष्य में होम-स्टे स्थापित करने की योजना है। उनका दावा है कि यह भूमि पूरी तरह से कृषि उद्देश्यों के लिए खरीदी गई है।

रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी की जांच
अधिकारी इस बात की भी जांच करेंगे कि क्या भूमि पर हाउसिंग सोसायटी के विकास के लिए आवश्यक अनुमति रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) से प्राप्त की गई थी। यदि इंटरनेट मीडिया पर किए गए प्रचार और वास्तविक परियोजना के बीच कोई अंतर पाया जाता है, तो उसे जांच में शामिल किया जाएगा।

पहुंच मार्ग और खनन की जांच
जांच प्रक्रिया केवल भूमि खरीद तक सीमित नहीं होगी। ऐराड़ी गांव में संबंधित भूमि के लिए 163 मीटर लंबे और 20 फीट चौड़े पहुंच मार्ग की स्वीकृति भी प्राविधान की गई थी। खनन विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि वहां की कटाई और निर्माण अनुमति के अनुरूप हो। यदि कोई अवैध क्रियाकलाप पाया जाता है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।

वन विभाग की भी भूमिका
डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव ने भी स्थल का निरीक्षण किया और सूचित किया कि वहां किसी भी पेड़ का अवैध पातन नहीं मिला। यदि भविष्य में वन अधिनियम का उल्लंघन होता है, तो विभाग नियमों के अनुसार कार्रवाई करेगा।

जिलाधिकारी की टिप्पणियाँ
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि गठित समिति मामले की निष्पक्ष जांच करेगी। जांच पूरी होने तक सभी प्रकार के निर्माण पर प्रतिबंध रहेगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे प्रकरण ने पौड़ी जिला में कृषि भूमि उपयोग और हाउसिंग परियोजनाओं के बीच की जटिलताओं को उजागर किया है। यह मामला प्रशासन की भूमिका, भूमि सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को जांचने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।

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संकेत दिया टीम नेटा नगरी से, प्रियंका शर्मा

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