दौलत राम ट्रस्ट से जुड़े 700 बीघा भूमि घोटाले की सीबीआई जांच की दिशा में नया मोड़

Amit Bhatt, Dehradun: देहरादून के बहुचर्चित दौलत राम ट्रस्ट की माजरा स्थित करीब 700 बीघा भूमि से जुड़े मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नया घटनाक्रम सामने आया है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह … The post सीबीआई जांच की तरफ बढ़ रहा दौलतराम ट्रस्ट से जुड़ा 700 बीघा का भूमि घोटाला appeared first on Round The Watch.

Aug 7, 2026 - 18:37
 146  2.4k
दौलत राम ट्रस्ट से जुड़े 700 बीघा भूमि घोटाले की सीबीआई जांच की दिशा में नया मोड़
दौलत राम ट्रस्ट से जुड़े 700 बीघा भूमि घोटाले की सीबीआई जांच की दिशा में नया मोड़

दौलत राम ट्रस्ट से जुड़े 700 बीघा भूमि घोटाले की सीबीआई जांच की दिशा में नया मोड़

Amit Bhatt, Dehradun: देहरादून के बहुचर्चित दौलत राम ट्रस्ट द्वारा माजरा में स्थित लगभग 700 बीघा भूमि से जुड़े एक गंभीर मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में हाल ही में सुनवाई हुई, जिसमें महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया, जिसे न्यायालय ने स्वीकृत कर लिया। इस मामले की अगली सुनवाई अब 20 अगस्त 2026 के लिए तय की गई है, حيث सभी की नजरें इस सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

वर्षों पुराना भूमि विवाद फिर सुर्खियों में
इस मामले के व्याख्यान में याचिकाकर्ता रीता सूरी और अन्य के प्रतिनिधित्व में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग किया गया। राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता अक्षय लटवाल और सीबीआई द्वारा अधिवक्ता सौरव अधिकारी ने अपने-अपने पक्ष रखे। सीबीआई के अधिवक्ता ने प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे न्यायालय ने स्वीकार किया।

यह मामला याचिका WPCRL/957/2025 और अन्य संबद्ध मामलों WPMS/2086/2012 तथा WPCRL/937/2013 के साथ जुड़ा हुआ है। रीता सूरी ने अपनी याचिका में कहा कि माजरा स्थित दौलत राम ट्रस्ट की 700 बीघा भूमि से जुड़े सवाल वर्षों से विभिन्न न्यायिक मंचों पर उठाए जाते रहे हैं।

रिश्तेदारी और कानूनी लड़ाई
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि वादिनी रीता सूरी के भाई, अधिवक्ता राजेश सूरी, ने भूमि विवाद को पहले उजागर किया था। उनके अनुसार, सरकारी एवं गैर-सरकारी संपत्तियों से जुड़े घोटालों की शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे न्यायालय में याचिकाएँ दायर करने की आवश्यकता महसूस हुई।

30 नवंबर 2014 को राजेश सूरी की हत्या उस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। रीता सूरी ने अपने भाई की मौत के बाद कानूनी कार्रवाई को लेकर स्वयं पैरवी करने की अनुमति मांगी और इसे स्वीकृति भी मिली। इसके बाद से उन्होंने विभिन्न न्यायालयों में मामले की पैरवी की और आरोप लगाया कि उन्हें लगातार दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

2007 में एफआईआर और आगे की कार्रवाई
रीता सूरी के अनुसार, राजेश सूरी ने नगर निगम के अधिवक्ता रहते हुए माजरा भूमि के मामले को उठाया था। 29 दिसंबर 2007 को क्लेमेंटटाउन थाने में इस मामले में संबंधित आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद, मामला हाईकोर्ट में गया, जहां राज्य सरकार को इसकी विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए।

स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
रीता सूरी ने उच्च न्यायालय में स्वतंत्र एजेंसी की जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि ट्रस्ट की भूमि समय-समय पर विभिन्न व्यक्तियों को हस्तांतरित की गई, और इसे लेकर स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है। उनके अनुसार, वर्ष 2008 की जांच आख्या में भी स्वतंत्र जांच की आवश्यकता का उल्लेख किया गया था।

2020 में बनी थी एसआईटी
साल 2020 में उत्तराखंड शासन ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था, जो तीन महीने में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाली थी। वादिनी के अनुसार, SIT ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी, लेकिन उस पर अंतिम निर्णय अब तक लंबित है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगने पर यह बताया गया कि रिपोर्ट शासन की विचाराधीन है।

निष्कर्ष और आगे का रास्ता
अब वादिनी ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि चूंकि यह मामला कई राज्यों से जुड़ा है और इसकी प्रकृति गंभीर है, इसलिए इसकी जांच CBI को सौंपी जाए। उनका कहना है कि राज्य स्तर पर जांच के तहत मामले की फाइलें वर्षों तक संग्रहीत रहीं, जिससे निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पैदा हो गई।

इस बहुचर्चित भूमि विवाद प्रकरण में सभी की निगाहें 20 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर केंद्रित हैं, जहां सीबीआई के द्वारा उत्तर दिया जाएगा और आगे की न्यायिक दिशा तय की जाएगी।

नोट: इस समाचार में वादिनी द्वारा प्रस्तुत आरोपों को आरोप के रूप में प्रस्तुत किया गया है। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएँ न्यायालयी कार्यवाही में प्रदर्शित नहीं की गई हैं।

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari

कम शब्दों में कहें तो, यह मामला सीबीआई जांच की ओर बढ़ रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया विजिट करें: Netaa Nagari.

Team Netaa Nagari, सुनीता शर्मा

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow