पौड़ी की युवा महिला का यूट्यूब चैनल डिलीट: हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की
Amit Bhatt, Dehradun: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बिना नोटिस यूट्यूब चैनल हटाए जाने के खिलाफ दायर रिट याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यूट्यूब एक निजी डिजिटल मंच है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए उसके खिलाफ … The post पौड़ी की युवती का यूट्यूब चैनल कर दिया डिलीट, हाई कोर्ट ने भी कर दी याचिका खारिज appeared first on Round The Watch.
पौड़ी की युवा महिला का यूट्यूब चैनल डिलीट: हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की
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कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने यूट्यूब चैनल के डिलीट होने के विरोध में दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह साफ किया कि यूट्यूब एक निजी प्लेटफ़ॉर्म है और इसके खिलाफ संविधान के तहत रिट याचिका नहीं दायर की जा सकती।
उत्तराखंड के पौड़ी क्षेत्र की निवासी स्वाति उर्फ स्मृति नेगी ने यूट्यूब चैनल के डिलीट होने के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि यूट्यूब ने बिना नोटिस के चैनल को हटा दिया, जिसमें उनकी बनाई गई सामग्री भी थी। कोर्ट ने इस याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया।
वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने केस की सुनवाई करते हुए कहा कि यूट्यूब और उसके उपयोगकर्ता के बीच संबंध सेवा की शर्तों पर आधारित होता है। यदि इस अनुबंध के तहत कोई विवाद उत्पन्न होता है तो इसे सार्वजनिक कानून के तहत नहीं लाया जा सकता।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय में कहा कि यूट्यूब ने तीन कॉपीराइट स्ट्राइक्स का हवाला देते हुए चैनल डिलीट किया। उनका कहना था कि बिना किसी नोटिस के कार्रवाई की गई तथा अपनी बात कहने का अवसर भी नहीं दिया गया।
हालांकि, हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने बताया कि यह मामला पूरी तरह अनुबंध संबंधी है और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका नहीं दायर की जा सकती।
याचिका खारिज करते हुए अदालत ने स्वाति को सलाह दी कि यदि वे चाहें, तो वे इस विवाद के समाधान के लिए अन्य कानूनी उपायों का सहारा ले सकती हैं।
क्या हैं दूसरे कानूनी विकल्प?
यदि कोई याचिकाकर्ता यूट्यूब की सेवा की शर्तों या अनुबंध के उल्लंघन का दावा करता है तो उसे संबंधित सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करने का अधिकार है।
- अनुबंध के अनुसार विवाद निपटान: यूट्यूब की सेवा शर्तों में यदि मध्यस्थता (Arbitration) का प्रावधान है, तो वही प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
- यूट्यूब की अपील प्रक्रिया: कॉपीराइट स्ट्राइक या चैनल डिलीट किए जाने की स्थिति में यूट्यूब के आंतरिक अपील तंत्र का उपयोग किया जा सकता है।
- उपयुक्त सक्षम न्यायालय: अनुबंध उल्लंघन, हर्जाना या प्रायोज्य अधिकारों के प्रश्न पर सक्षम सिविल न्यायालय का सहारा लिया जा सकता है।
सीखने योग्य पाठ: हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह एक अनुबंध संबंधी विवाद है और इसके निपटारे के लिए कानूनी अन्य उपायों का उपयोग किया जा सकता है। कोर्ट ने किसी विशेष मंच का निर्देश नहीं दिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला पूरी तरह व्यक्तिगत है।
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द्वारा, सपना रानी
टिम नेटaa नागरी
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