उत्तराखंड सरकार ने वरिष्ठ IFS अधिकारियों के दायित्वों में किया महत्वपूर्ण फेरबदल, सूची जारी
देहरादून उत्तराखंड शासन के वन अनुभाग-1 ने भारतीय वन सेवा (IFS) के शीर्ष स्तर के अधिकारियों के दायित्वों में बड़ा फेरबदल किया है। शासन के सचिव सी. रविशंकर द्वारा जारी…
उत्तराखंड सरकार का IFS अधिकारियों में बड़ा फेरबदल
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने भारतीय वन सेवा के शीर्ष स्तर के अधिकारियों के दायित्वों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। यह सचिव सी. रविशंकर की ओर से जारी आदेश के तहत किया गया है।
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देहरादून: उत्तराखंड शासन ने वन अनुभाग-1 द्वारा भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारियों के दायित्वों में एक महत्वपूर्ण फेरबदल किया है। इस फेरबदल के तहत प्रमुख वन संरक्षक (PCCF), अपर प्रमुख वन संरक्षक (APCCF), मुख्य वन संरक्षक (CCF), और वन संरक्षक (CF) स्तर के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह निर्णय राज्य की वन नीतियों और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे कार्यकुशलता और प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि की जा सकेगी।
फेरबदल की विस्तृत जानकारी
शासन के सचिव, सी. रविशंकर द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि सभी अधिकारियों को अपने नवीन पदों का कार्यभार शीघ्रता से ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें अनुपालन रिपोर्ट भी शासन को भेजनी होगी। यह आदेश अधिकारियों के कार्यसम्पादन और जिम्मेदारियों का पुनर्निर्धारण करने के उद्देश्य से दिया गया है, ताकि वन संरक्षण एवं विकास को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
स्थानान्तरण और नई तैनातियों की सूची
प्रमुख वन संरक्षक (PCCF) स्तर:
- कपिल लाल (IFS 1993): PCCF (HoFF) उत्तराखंड के पद पर बने रहेंगे लेकिन उन्हें ‘कैम्पा’ के CEO और नियोजन एवं वित्तीय प्रबंधन के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है।
- नीना ग्रेवाल (IFS 1993): प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखंड की नई जिम्मेदारी संभालेंगी। साथ ही, वह प्रबंध निदेशक (उत्तराखंड वन विकास निगम) का अतिरिक्त प्रभार भी लेंगी।
अपर प्रमुख वन संरक्षक (APCCF) स्तर:
- बी. के. गांगटे (IFS 1998): प्रतीक्षारत श्रेणी से हटाकर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (कैम्पा) का दायित्व दिया गया है, इसके साथ ही उन्हें वन अनुसंधान, प्रबंधन एवं प्रशिक्षण का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
- सुरेंद्र मेहरा (IFS 1999): APCCF नियोजन एवं वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह सतर्कता एवं विधि प्रकोष्ठ का अतिरिक्त प्रभार भी देखेंगे।
मुख्य वन संरक्षक (CCF) स्तर:
- डॉ. पराग मधुकर धकाते (IFS 2002): CCF वन पंचायत, सामुदायिक वानिकी और मुख्यालय प्रभार से अवमुक्त हुए हैं। वह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और मुख्यमंत्री के विशेष सचिव का भी अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे।
- सुशांत कुमार पटनायक (IFS 2002): CCF वन संरक्षण, वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन तथा पर्यावरण का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे।
वन संरक्षक (CF) स्तर:
- चंद्र शेखर सनवाल (IFS 2010): प्रतीक्षारत श्रेणी से हटाकर वन संरक्षण, नोडल कार्यालय (देहरादून) में तैनात किए गए हैं।
- नीतू लक्ष्मी एम. (IFS 2010): यमुना वृत्त के प्रभार से अवमुक्त होकर अपर सचिव, वन विभाग (उत्तराखंड शासन) बनी हैं।
- कल्याणी (IFS 2012): शासन में अपर सचिव के पद से स्थानांतरित कर वन संरक्षक, यमुना वृत्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड शासन द्वारा किए गए इस फेरबदल से न केवल वरिष्ठ अधिकारियों की नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं, बल्कि यह वन विभाग की कार्यक्षमता और जिम्मेदारी को भी बढ़ाएगा। इस निर्णय का प्रदेश की पर्यावरण नीतियों और विकास योजनाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
इस तरह के कार्यकारी फेरबदल में प्रशासन की बेहतर कार्यविधि और नवीनता को सुनिश्चित किया जा सकता है। प्रशासनिक बदलावों का उद्देश्य केवल पदों का परिवर्तन नहीं है, बल्कि जिम्मेदारियों की पुनर्रचना भी है, जिससे कार्य का स्वरूप और भी प्रभावी बने।
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सादर,
टीम नेटा नगरी
(नीरजा वर्मा)
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