कांग्रेस और इंडी गठबंधन का विरोध : मुख्यमंत्री धामी ने बताया राजनीतिक हताशा का संकेत

  *कांग्रेस अपने शासनकाल का इतिहास देखे, तब भी होती थी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया :

Oct 10, 2026 - 18:37
 158  2k
कांग्रेस और इंडी गठबंधन का विरोध : मुख्यमंत्री धामी ने बताया राजनीतिक हताशा का संकेत
कांग्रेस और इंडी गठबंधन का विरोध : मुख्यमंत्री धामी ने बताया राजनीतिक हताशा का संकेत

कांग्रेस और इंडी गठबंधन का विरोध : मुख्यमंत्री धामी ने बताया राजनीतिक हताशा का संकेत

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन के विरोध को राजनीतिक हताशा का परिचायक बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने शासनकाल के दौरान मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का इतिहास याद करना चाहिए।

देहरादून में संवाददाताओं से बात करते हुए, मुख्यमंत्री धामी ने इस विरोध पर परेर्याप्त रुख अपनाया और कांग्रेस के दोहरे मापदंड की आलोचना की। उन्हें कहना था कि पहले जब इसी तरह की प्रक्रियाएँ लागू होती थीं, तब कांग्रेस ने कभी कोई आपत्ति नहीं जताई।

मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है ताकि हर योग्य नागरिक का नाम उसमें सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना उसकी मुख्य जिम्मेदारी है।

कांग्रेस की राजनीति और हताशा

सीएम धामी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की रणनीति को राजनीतिक हताशा का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जनता का विश्वास खो दिया है और अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं में विवाद पैदा कर रही है।

''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास, सुशासन और राष्ट्रहित के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है,'' उन्होंने कहा। ''कांग्रेस अब विकास की इस यात्रा में अपनी घटती प्रासंगिकता से असहज है और इसी कारण वह जनहित और पारदर्शिता से जुड़ी विषयों पर भ्रम पैदा कर रही है।''

लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का महत्व

मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध का महत्व स्वीकार किया लेकिन चेतावनी दी कि संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर अनावश्यक अविश्वास फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह अपने विचार तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करें और भ्रम फैलाने से बचें।

इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि राजनीतिक पार्टियां कभी-कभी अपने स्वार्थ के लिए संवैधानिक व्यवस्थाओं का सम्मान नहीं करती हैं। उनके बयान से यह भी संकेत मिलता है कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच का तनाव एक बार फिर उजागर हुआ है, जिसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है।

हाल ही में इस विषय पर और जानकारी के लिए, कृपया परिसर द्वारका पर जाएं।

ध्यान दें, कई राजनीतिक विश्लेषक यह मानते हैं कि इस तरह के बयानों से एक नये विमर्श की आवश्यकता है, जहां राजनीतिक दलों को अधिक जिम्मेदारी से व्यवहार करना होगा। इसके पीछे की कुंठाएं और रणनीतियां महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

कार्यक्रम का अंत करते हुए, हम यही कहेंगे कि राजनीतिक अहंकार से दूर रहकर ही विकास और जनहित की दिशा में बढ़ा जा सकता है।

- Team Netaa Nagari, सुमिता शर्मा

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow