उत्तराखंड में ‘नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम से झलकी जागरूकता की नई किरण
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने नशे के दुष्प्रभावों और रोकथाम के उपायों पर किया मंथन नशा मुक्त उत्तराखण्ड हेतु देहरादून
उत्तराखंड में ‘नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम से झलकी जागरूकता की नई किरण
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के देहरादून में ‘एक प्रयास, नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें विशेषज्ञों ने नशे के दुष्प्रभावों और रोकथाम के उपायों पर चर्चा की।
लोक भवन, देहरादून में 9 सितंबर 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य में नशामुक्ति के प्रयासों को गति देना और युवाओं को जागरूक करना था। कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। राज्यपाल ने कार्यक्रम की महत्ता और समाज में नशा मुक्त वातावरण की आवश्यकता के बारे में अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का उद्देश्य और विशेषताएँ
कार्यक्रम का उद्देश्य नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना और सरकारी प्रयासों के साथ समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था। इसमें 'नशा मुक्त उत्तराखंड हेतु देहरादून घोषणा-पत्र' भी जारी किया गया।
यह घोषणा-पत्र नशे से पीड़ित लोगों के उपचार, परिवार की भूमिका और सामाजिक भागीदारी पर जोर देता है। इस घोषणा पत्र में कुल मिलाकर 10 प्रमुख संकल्प शामिल किए गए हैं, जो समाज के सभी वर्गों को नशा मुक्त बनाने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की दिशा में प्रोत्साहित करते हैं।
विशेषज्ञों की चर्चा और सुझाव
कार्यक्रम में 'व्यसन मुक्त, सशक्त शैक्षणिक संस्थानों का निर्माण' विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारियों ने भाग लिया। इस चर्चा में विशेषज्ञों ने शैक्षणिक संस्थानों में नशा विरोधी वातावरण बनाने के सुझाव दिए और विद्यार्थियों को काउंसलिंग की प्रक्रिया को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समुदाय की भूमिका पर जोर
इसके बाद 'नशा मुक्त समाज-समुदाय आधारित' विषय पर एक विशेष परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें स्वास्थ्य विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए। उन्होंने नशे की रोकथाम में परिवार, समुदाय और प्रशासन की संयुक्त भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
राज्यपाल ने कहा कि नशे की समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने इस अभियान को जन आंदोलन का रूप देने का सुझाव दिया, ताकि इसे सफल बनाने में युवाओं, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
कार्यक्रम का समापन और संदेश
कार्यक्रम के अंत में, दून विश्वविद्यालय के छात्रों ने एक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाना था। इस नाटक के माध्यम से युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।
राज्यपाल ने इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्रों को 'नशा मुक्ति संकल्प' दिलाया और यह सुनिश्चित किया कि वे अपने आसपास के लोगों को भी नशे की समस्या के प्रति जागरूक करें।
इस प्रकार, यह कार्यक्रम न केवल नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण मंच रहा, बल्कि इसे सफल बनाने के लिए समाज की भागीदारी की आवश्यकता को भी स्पष्ट किया गया।
कार्यक्रम में अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद थे, जिनमें उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष, विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि और छात्र-छात्राएँ शामिल थे।
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