हरिद्वार में हुई जीएसटी चोरी की कार्रवाई: 14 करोड़ का टैक्स हजम, 12 करोड़ हुए जमा
Rajkumar Dhiman, Dehradun: राज्य कर विभाग की सेंट्रल इंटेलीजेंस (CIU) ने जीएसटी चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए हरिद्वार स्थित एक इलेक्ट्रिकल गुड्स निर्माण इकाई से जुड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर लगभग 14 करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलासा किया है। जांच के दौरान विभाग ने फर्जी बिलों और बिना वास्तविक माल … The post दो साल में हजम कर डाला 14 करोड़ का टैक्स, डंडा पड़ा तो जमा कराए 12 करोड़ appeared first on Round The Watch.
हरिद्वार में हुई जीएसटी चोरी की कार्रवाई: 14 करोड़ का टैक्स हजम, 12 करोड़ हुए जमा
राजकुमार धीमान, देहरादून: राज्य कर विभाग की सेंट्रल इंटेलीजेंस यूनिट (CIU) ने हरिद्वार स्थित एक इलेक्ट्रिकल गुड्स निर्माण इकाई पर जीएसटी चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों ने छापेमारी की और करीब 14 करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि व्यापारिक प्रतिष्ठान फर्जी बिलों के जरिए बिना वास्तविक माल के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अनुचित लाभ उठा रहा था।
कम शब्दों में कहें तो, यह कार्रवाई जीएसटी चोरी के खिलाफ एक अभूतपूर्व कदम है, जो निश्चित रूप से राज्य के कर राजस्व को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यदि आप और अधिक अपडेट चाहते हैं, तो कृपया यहां क्लिक करें।
जांच का विस्तार
राज्य कर विभाग ने इस कार्रवाई को आयुक्त प्रतीक जैन के निर्देश पर किया। 4 जून को हुई इस कार्रवाई में डेटा विश्लेषण, जीएसटी रिटर्न, ई-वे बिल, और खुफिया सूचनाओं का गहन परीक्षण किया गया। जांच में यह पाया गया कि संबंधित फर्म का कारोबार तेजी से बढ़ रहा था, लेकिन इसके अनुपात में कर का भुगतान नहीं हो रहा था, जिससे अधिकारियों को संदेह हुआ।
जांच टीम ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की पूरी चेन, माल की आवाजाही, और वाहनों की ढुलाई क्षमता का रिकॉर्ड मिलाकर जांच की। एएनपीआर कैमरों से मिली जानकारी से यह स्पष्ट हुआ कि कुछ फर्मों ने बिना वास्तविक खरीद किए ही कागजी लेन-देन दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी क्षति हुई।
बोगस बिलों का इस्तेमाल
जांच के दौरान अधिकारियों ने कई व्यक्तियों से पूछताछ की, जिससे पता चला कि जीएसटी चोरी के लिए बड़े पैमाने पर बोगस बिलों का प्रयोग किया गया। प्रारंभिक जांच में पिछले दो वित्तीय वर्षों में लगभग 14 करोड़ रुपये की भूचाल जैसी जीएसटी चोरी करने का खुलासा हुआ।
एक रातभर चली इस कार्यवाही के दौरान टीम ने फर्म के विभिन्न परिसरों से महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिये। इसके साथ ही डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संस्थाओं की भूमिका का पता लगाया जा सके।
फर्मों ने जीएसटी राशि जमा कराई
जांच की गंभीरता को देखते हुए, संबंधित फर्मों ने जांच के दौरान ही लगभग 12 करोड़ रुपये की जीएसटी राशि मौके पर जमा कराई। राज्य कर विभाग का मानना है कि रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की आगे की जांच में कर चोरी का दायरा शायद और बढ़ सकता है।
इस कार्रवाई को राज्य में कर चोरी के खिलाफ अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। विभाग ने फर्जी बिलिंग और अवैध आईटीसी के जरिए राज्य शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले कारोबारियों के खिलाफ आगामी दिनों में भी इस प्रकार की कठोर कार्रवाई जारी रखने का संकल्प लिया है।
टीम्स की भूमिका
जांच में शामिल अधिकारियों में उपायुक्त विनय पांडे, योगेश मिश्रा, निखिलेश श्रीवास्तव, अजय बिरथरे, अर्जुन राणा, सहायक आयुक्त केके पांडे, योगेश रावत, अविनाश झा, गार्गी बहुगुणा, अभिषेक ठाकुर, तथा राज्य कर अधिकारी दुर्गेश पुरोहित, शैलेंद्र चमोली, गजेंद्र भंडारी, रजत कुमार, शहाना परवीन और हेमा नेगी शामिल थे। उनके अथक प्रयासों से जीएसटी चोरी के इस बड़े नेटवर्क की पहचान की गई है।
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि सरकार जीएसटी चोरी से निपटने के लिए कितनी गंभीर है। इसके अलावा, यह व्यवसायों के लिए एक चेतावनी है कि वे अपने लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखें।
उम्मीद है कि राज्य कर विभाग की इस कार्रवाई से जीएसटी प्रणाली में सुधार होगा और इससे राजस्व के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। टिम नेटaa नागरी, राधिका शर्मा
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