खेल कोटे का रहस्य उजागर: पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता बर्खास्त

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम में 13 साल पहले खेल कोटे से हुई नियुक्ति आखिरकार सवालों के घेरे में आ गई। लंबी विभागीय जांच के बाद निगम ने अधिशासी अभियंता अशोक कुमार प्रजापति की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। जांच में पाया गया कि नियुक्ति के लिए … The post 13 साल बाद खुला खेल कोटे का राज! पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता बर्खास्त appeared first on Round The Watch.

Jul 18, 2026 - 18:37
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खेल कोटे का रहस्य उजागर: पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता बर्खास्त
खेल कोटे का रहस्य उजागर: पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता बर्खास्त

खेल कोटे का रहस्य उजागर: पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता बर्खास्त

राजकुमार ढिमान, देहरादून: उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम में 13 साल पहले खेल कोटे के तहत हुई नियुक्ति अब विवादों के घेरे में आ गई है। लंबे समय से चल रही विभागीय जांच के बाद, निगम ने अधिशासी अभियंता अशोक कुमार प्रजापति की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। जांच में यह पाया गया है कि उनकी नियुक्ति के लिए प्रस्तुत किए गए खेल प्रमाणपत्र शासन के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके चलते इस पूरी नियुक्ति को अवैध ठहराया गया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में एक शिकायत के बाद यह मामला सामने आया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 2013-14 में खेल कोटे का अनुचित लाभ लेकर अशोक कुमार प्रजापति ने नियुक्ति हासिल की। शासन के निर्देश पर गठित जांच समिति ने जब रिकॉर्ड की छानबीन की, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुए। जांच में पता चला कि यूनिवर्सिटी पावर लिफ्टिंग और क्रॉस कंट्री प्रतियोगिता के आधार पर मिले प्रमाणपत्र शासनादेश में निर्धारित खेल उपलब्धियों की पात्रता सूची में शामिल नहीं थे।

जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों को कई बार अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। हालांकि, उन्होंने जो दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, वह जांच समिति को संतुष्ट नहीं कर सके। इतना ही नहीं, यह भी पाया गया कि यदि उन्हें खेल कोटे का लाभ नहीं मिलता, तो सामान्य मेरिट पर उनका चयन संभव नहीं था।

संस्थान की कार्रवाई और इसके निहितार्थ

इन निष्कर्षों के आधार पर पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने अशोक कुमार प्रजापति की सेवाएं नियमों के विरुद्ध मानते हुए बर्खास्त करने के आदेश जारी कर दिए। यह कार्रवाई 13 वर्षों की सेवा के बाद होने से अन्य लोगों में चिंता की लहर दौड़ गई है। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस तरह अन्य खेल कोटे से हुई नियुक्तियों की भी जांच की जाएगी?

उठते सवाल और संभावित जांच

बड़ी चिंताएं: इस कार्रवाई ने खेल कोटे से हुई अन्य नियुक्तियों के बारे में सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। चर्चा है कि यदि अन्य मामलों की भी जांच की गई, तो कई और नियुक्तियाँ भी संदेह के दायरे में आ सकती हैं। यह गंभीर मुद्दा है, जो खेल कोटे की नीति और इसके लाभार्थियों पर प्रभाव डाल सकता है।

कम शब्दों में कहें तो, इस पूरे मामले ने पहले से नियमों को ताक पर रखकर हुई नियुक्तियों की नीतियों पर गंभीर प्रश्न खड़ा किया है। ऐसे मामलों की जांच जरूरी है, ताकि अन्य आवेदकों को भी न्याय मिल सके। पेयजल निगम में हुई यह घटना निश्चित रूप से प्रणाली में बदलाव की जरूरत को दर्शाती है।

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सादर,
टीम नेटा नगरी,
अंजलि कुमारी

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