कोरोनेशन अस्पताल में डीएम का छापा: आईसीयू से वार्ड तक प्रबंधन की लापरवाही का खुलासा
Rajkumar Dhiman, Dehradun: सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं की हकीकत बुधवार रात उस समय सामने आ गई, जब जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने रात ठीक आठ बजे कोरोनेशन जिला अस्पताल में औचक निरीक्षण किया। अचानक पड़े इस छापे से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान आईसीयू से लेकर वार्ड, लिफ्ट, शौचालय और रिकॉर्ड … The post रात को कोरोनेशन अस्पताल पर डीएम का छापा, आईसीयू से वार्ड तक खुली बदइंतजामी की पोल appeared first on Round The Watch.
कोरोनेशन अस्पताल में डीएम का छापा: आईसीयू से वार्ड तक प्रबंधन की लापरवाही का खुलासा
डॉ. प्रिया शर्मा, देहरादून: सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं की असलियत बुधवार रात उस समय उजागर हुई, जब जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने रात ठीक आठ बजे कोरोनेशन जिला अस्पताल में अचानक निरीक्षण किया। इस औचक छापे से अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान आईसीयू से लेकर वार्ड, लिफ्ट, शौचालय और रिकॉर्ड तक में गंभीर लापरवाही का पता चला। इस पर डीएम ने नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) की एक संयुक्त समिति का गठन करते हुए तत्काल जांच रिपोर्ट मांगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए।
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निरीक्षण की शुरुआत और आईसीयू में मिली परेशानियों का खुलासा
छापे का पहला ठिकाना आईसीयू बना, जहां जीवनरक्षक वार्ड में एयर कंडीशनर बंद पाया गया। इससे गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उमस और घुटन का सामना करना पड़ा। जब इस मुद्दे पर डीएम ने अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) से प्रश्न किया, तो उन्होंने एसी चालू करने में कोई रूचि नहीं दिखाई। इस पर डीएम ने पीआरओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए और सीएमएस से स्पष्टीकरण मांगा। इसके अलावा, आईसीयू के स्टॉक रजिस्टर में 29 जून के बाद दवाओं का कोई विवरण नहीं मिलने की बात भी सामने आई।
वार्डों की स्थिति और व्यवस्थागत खामियां
निरीक्षण के दौरान बाल रोग, पुरुष, महिला और सर्जरी वार्डों की व्यवस्थाएं भी सवालों के घेरे में आईं। पुरुष वार्ड में एक लीवर रोगी को रेफर करने की तैयारी चल रही थी, जबकि उनका इलाज अस्पताल में ही संभव था। इस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई। इसके अलावा, मरीज को ओढ़ने के लिए फटे हुए कंबल दिए जाने पर उन्होंने अस्पताल के प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा और सभी फटे कंबलों को तत्काल नष्ट करने का आदेश दिया।
लिफ्ट और शौचालय की बदहाल स्थिति
अस्पताल की लिफ्ट में चारों ओर पान की पीक और गंदगी पाई गई थी। सुरक्षा के लिहाज से वहां सीसीटीवी कैमरे का न होना भी एक गंभीर चिंता का विषय था। महिला शौचालय में पुरुषों का यूरिनल देखकर डीएम ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
लावारिस मरीज की भयावह स्थिति
सर्जरी वार्ड में एक लावारिस मरीज की स्थिति गंभीर पाई गई। मरीज का शुगर स्तर 40 से भी नीचे गिर चुका था, और उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। मरीज के आसपास गंदगी फैली हुई थी और बासी भोजन की प्लेटें पड़ी थीं। डीएम ने तुरंत चिकित्सकों को बुलाकर मरीज का आपात चिकित्सा शुरू कराया। बताया गया कि जैसे ही प्रशासनिक टीम अस्पताल पहुंची, डीएम के आगमन से महज पांच मिनट पहले वार्ड में सफाई की जा रही थी।
अस्पताल की प्रबंधन को कड़े निर्देश
निरीक्षण के अंत में, जिलाधिकारी ने सीएमओ और सीएमएस को निर्देश दिया कि अस्पताल की सभी व्यवस्थागत कमियों को तुरंत ठीक किया जाए। उन्होंने कहा कि मरीजों को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान, डीएम ने विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उपचार और सुविधाओं के बारे में फीडबैक भी लिया।
कम शब्दों में कहें तो, यह निरीक्षण कोरोनेशन अस्पताल के अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले में जल्द से जल्द सुधार की आवश्यकता है ताकि मरीजों को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
सभी सम्बंधित अधिकारी और चिकित्सा कर्मचारी को इस निरीक्षण के परिणामों से सीख लेनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। अदालत में भी इन मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। अस्पताल में मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है।
उम्मीद है कि अस्पताल प्रशासन इस निरीक्षण को एक अवसर के रूप में देखेगा और मरीजों के इलाज की गुणवत्ता को यथासंभव बेहतर बनाने की कोशिश करेगा।
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टीम नेटा नगरी
डॉ. प्रिया शर्मा
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