उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन के लिए सहयोग बढ़ाने का निश्चय
देहरादून पर्वतीय राज्यों की समान भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक संरचना एवं आपदाओं की एक जैसी प्रवृत्ति को देखते हुए उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आपसी सहयोग…
उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन के लिए सहयोग बढ़ाने का निश्चय
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश ने आपदा प्रबंधन में आपसी सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
देहरादून: पर्वतीय राज्यों की समान भौगोलिक परिस्थितियों और आपदाओं की समानता को ध्यान में रखते हुए, उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आपसी सहयोग को सुदृढ़ करने पर सहमति जताई है। इस सहयोग के लिए दोनों राज्य एक-दूसरे के अनुभवों और नवाचारों से लाभ उठाने के लिए तैयार हैं।
हाल ही में हिमाचल प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, कमलेश कुमार पंत ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का दौरा किया। इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन ने उत्तराखण्ड में आपदा न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया, जोखिम आकलन, और जनजागरूकता के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।
कमलेश पंत ने कहा कि "उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश दोनों ही भौगोलिक दृष्टि से बहुत संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहाँ भूस्खलन, अधिक वर्षा, बादल फटने, बाढ़, और भूकंप जैसी समस्याएँ अक्सर होती हैं। इनका सामना करने में दोनों राज्यों के बीच अनुभव साझा करना बहुत महत्वपूर्ण है।" उन्होंने यह भी कहा कि आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए आपसी सहयोग में तेजी लाने की आवश्यकता है।
कमलेश पंत ने उत्तराखण्ड में स्थापित भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र की प्रशंसा करते हुए हिमाचल प्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था स्थापित करने की इच्छा जताई। इसके लिए उन्होंने उत्तराखण्ड से तकनीकी सहायता का भी अनुरोध किया।
सरकारी अधिकारियों ने भूस्खलन प्रबंधन और रोकथाम के लिए उत्तराखण्ड ने विकसित प्रणालियों से लाभ उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने जनसंचार और त्वरित सूचना के आदान-प्रदान को महत्वपूर्ण बताया। इस संदर्भ में, रुद्रप्रयाग जिले में विकसित डीडीआरएन प्रणाली की भी सराहना की गई।
हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते हिमनद झील विस्फोट बाढ़ के जोखिम को देखते हुए, हिमाचल प्रदेश ने इस दिशा में किए गए कार्यों को साझा किया। इसके साथ-साथ, सचिव विनोद सुमन ने कहा कि "हिमनद झीलों की निगरानी, समय पर चेतावनी जारी करने, और जोखिम न्यूनीकरण के उपायों के लिए आपसी सहयोग आवश्यक है।" उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रकार का सहयोग भविष्य में बड़े आपदाओं को कम करने में सहायक होगा।
इसके अलावा, पहाड़ी क्षेत्रों में भूकंपरोधी भवन निर्माण पर भी चर्चा हुई। दोनों राज्यों ने सहमति जताई कि सुरक्षित निर्माण तकनीकों को अपनाकर जन-धन हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आपसी सहयोग को औपचारिक रूप देने के लिए समझौता ज्ञापन किए जाएंगे, ताकि ज्ञान, तकनीक, प्रशिक्षण, और संसाधनों का प्रभावी आदान-प्रदान हो सके।
इस बैठक में अपर सचिव महावीर सिंह चैहान, एसीईओ क्रियान्वयन DIG राजकुमार नेगी, अपर सचिव राजस्व हिमाचल प्रदेश निशांत ठाकुर, जेसीईओ मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद और अन्य उच्च अधिकारी भी उपस्थित थे।
यही नहीं, इस समर्पण से यह भी उम्मीद की जा रही है कि दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग से आने वाले समय में प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना और भी सरल हो जाएगा।
आपदा प्रबंधन के लिए इस आपसी सहयोग का विस्तार न केवल आपदा के समय में सहायता करेगा, बल्कि इसके माध्यम से नागरिकों की सुरक्षा को भी बढ़ाएगा।
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Team Netaa Nagari
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