NBT पुस्तक मेले में डॉ. अतुल की पुस्तकें खरीदने की खासियत, एक अनोखी रचनात्मकता की झलक
देहरादून इन दिनो देहरादून के परेड ग्राउंड में NBT का पुस्तक मेला चल रहा है। रोज कोई न कोई सेलिब्रिटी मेले में आ रहे है। इसके पीछे सोच सिर्फ इतनी…
NBT पुस्तक मेले में डॉ. अतुल की पुस्तकें खरीदने की खासियत, एक अनोखी रचनात्मकता की झलक
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के परेड ग्राउंड में चल रहे NBT पुस्तक मेले में जनता के बीच साहित्यिक जागरूकता फैलाने और पुस्तकों के प्रति प्रेम जगाने का प्रयास हो रहा है। हाल ही में भारतीय जनकवि डॉ. अतुल शर्मा ने इस मेले का दौरा किया, जहां उन्होंने न केवल किताबें खरीदीं, बल्कि अपनी साहित्यिक यात्रा की भी चर्चा की।
देहरादून में इन दिनों चल रहे NBT पुस्तक मेले में हर रोज कोई न कोई सेलिब्रिटी शामिल हो रहा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है कि समाज में पुस्तकों के प्रति लगाव को फिर से पैदा किया जाए, खासकर इस डिजिटल युग में। अपने साहित्यिक योगदान के लिए जाने जाने वाले जनकवि डॉ. अतुल शर्मा ने इस मेले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, और उन्होंने वहाँ से कई महत्वपूर्ण किताबें खरीदीं।
डॉ. अतुल का खरीदारी का अनुभव
डॉ. अतुल ने इस अवसर पर राजकमल प्रकाशन के मशहूर लेखक विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास "नौकर की कमीज़" के साथ-साथ साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कथाकार ममता कालिया का कहानी संग्रह भी खरीदा। उन्होंने कहा, "किताबों के बीच रहना बहुत अच्छा लगा। देहरादून में चल रहे इस पुस्तक मेले में शामिल होना मेरे लिए आवश्यक था। मेरा पुस्तकों से एक गहरा रिश्ता है।"
वे अपनी बहनों के साथ मेले में पहुँचे और वहाँ जाकर उन्हें बचपन की कई यादें ताज़ा हो गईं। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने आठवें और नौवें दशकों में लाइब्रेरी बुक सप्लाई का काम शुरू किया था। उस समय उन्होंने विभिन्न प्रकाशकों से धन कमाया और किताबें खरीदकर लाइब्रेरी में सप्लाई कीं।
प्रकाशन की प्रक्रिया और अनुभव
डॉ. अतुल ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने हिंदी के बड़े प्रकाशनों के साथ काम किया और प्रकाशकों से किताबें खरीदने और सप्लाई करने का व्यवसाय किया। उन्होंने ये भी बताया कि किताबों की खरीद में उन्हें काफी लाभ मिलता था और ये एक सुखद अनुभव था।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रकाशन की प्रक्रिया अनेकों बार लेखक के लिए जटिल हो सकती है, और कई बार उन्हें प्रकाशकों के सामने अपने काम को प्रस्तुत करने में कठिनाई भी आती है। "जो किताबें ज्यादा बिकेंगी, वे ही छपेंगी। यह तो एक व्यवसाय है," उन्होंने कहा।
ई-बुक्स के युग में पुस्तक मेलों की आवश्यकता
डॉ. अतुल ने इंगित किया कि वर्तमान में ई-बुक्स के प्रभाव के बावजूद, पुस्तक मेले आज भी महत्वपूर्ण हैं। वे मानते हैं कि लोगों को पुस्तकें खरीदने की आदत बनी रहनी चाहिए और इस तरह के आयोजनों से पाठकों में एक नई जागरूकता उत्पन्न होती है।
वो खुद भी इस मेले से लौटते समय यह सोचकर लौटे कि किताबों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ेगी। "पुस्तकें कभी समाप्त नहीं होंगी," उन्होंने कहा। उनके अनुसार, पुस्तक मेलों में भाग लेने से न केवल लेखक और प्रकाशक के बीच संबंध प्रगाढ़ होते हैं, बल्कि पाठकों के लिए भी यह बहुत रोचक अनुभव होता है।
संस्कृति और युवा समुदाय की भागीदारी
डॉ. अतुल ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले युवाओं की भी सराहना की, जो पुस्तक मेले के दौरान वहाँ उपस्थित थे। उन्होंने कहा, "यह देखना बहुत अच्छा था कि युवा वर्ग किताबों को खरीदने में रुचि रखता है और साहित्य में दिलचस्पी दिखाता है।" उनकी बातें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि युवाओं में पढ़ाई-लिखाई की दिशा में सकारात्मक बदलाव आया है, जो समाज के लिए अच्छी खबर है।
इस प्रकार, NBT पुस्तक मेला सिर्फ किताबों की खरीददारी का मंच नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जगह है जहाँ साहित्य और संस्कृति का मेल होता है। यह पुस्तक प्रेमियों के लिए एक अद्भुत अनुभव है और भविष्य में भी यही उम्मीद जगाता है कि पाठक बढ़ता रहेगा।
अंत में, डॉ. अतुल ने कहा, "यह एक फैंटसी है कि पुस्तकें हमेशा बिकेंगी और पाठकों की संख्या बढ़ती रहेगी।"
Team Netaa Nagari - राधिका शर्मा
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