उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल ने ब्रिक्स मंच पर किया धूम मचाते हुए,Silkyara रेस्क्यू की गूंज अंतरराष्ट्रीय समागम तक
देहरादून। प्राकृतिक आपदाओं और वर्षा जनित संकटों की दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में
उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल ने ब्रिक्स मंच पर किया धूम मचाते हुए
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड ने अपने आपदा प्रबंधन के मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करके एक मजबूती दिखाई है, जिससे विश्व में राज्य की पहचान और बढ़ी है।
देहरादून। प्राकृतिक आपदाओं एवं वर्षा जनित संकटों के प्रति अति संवेदनशील उत्तराखंड ने एक बार फिर आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता साबित की है। भारत की अध्यक्षता में ओडिशा के पुरी में 3 से 5 जून 2026 तक आयोजित *BRICS Disaster Risk Reduction (DRR)* कार्यसमूह की द्वितीय तकनीकी बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की सराहना की गई। इस बैठक में राज्य के नवाचार और रणनीतियों को सभी मंचो पर पेश किया गया।
तीन दिवसीय इस महत्वपूर्ण बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया सहित कुल 11 ब्रिक्स सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण, सशक्त अवसंरचना, सामुदायिक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन हेतु सतत वित्तीय व्यवस्थाओं का अनुभव साझा करना था।
सम्मेलन में विभिन्न देशों ने आपदा प्रबंधन में अपनी नवाचार विधियों और सफलताओं को साझा किया। इसी क्रम में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी (आईपीएस) और यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने किया। इन अधिकारियों ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अगुवाई में विकसित की गई प्रमुख घटनाओं, जैसे कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, क्षमता विकास और प्रतिक्रिया तंत्र पर चर्चा की।
प्रस्तुति में उत्तराखंड की भौगोलिक रुकावटों, हिमालयी परिस्थितियों, भूस्खलन, अतिवृष्टि, ग्लेशियर झीलें, सड़क अवरोध तथा तीर्थयात्रा से जुड़े जोखिमों को विस्तार से अंकित किया गया। साथ ही बहु-एजेंसी समन्वय प्रणाली, पूर्व चेतावनी तंत्र तथा त्वरित राहत-बचाव व्यवस्था को प्रमुखता से दिखाया गया।
विशेष रूप से सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन और धराली आपदा प्रबंधन अभियानों को आपदा प्रबंधन मॉडल के उत्कृष्ट उदाहरणों के तौर पर प्रस्तुत किया गया। उपस्थित प्रतिनिधियों ने कठिन भौगोलिक स्थितियों में इन अभियानों को धैर्य, तकनीक, प्रशासनिक समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता का परिपूर्ण नमूना बताया।
बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की पूर्व चेतावनी प्रणाली और तैयारियों की विशेष सराहना की गई। वहीं, उत्तराखंड एसडीआरएफ की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया क्षमताओं को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एक उच्चस्तरीय आपदा प्रतिक्रिया मॉडल के रूप में उजागर किया गया।
सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी ने कहा, “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आपदा प्रबंधन के प्रति संवेदनशील एवं सक्रिय दृष्टिकोण के कारण राज्य में जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, क्षमता निर्माण और एजेंसियों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है।” उन्होंने बताया कि राज्य के पर्वतीय ढांचे में आपदा प्रबंधन का दृष्टिकोण सिर्फ राहत और बचाव तक सीमित नहीं रह सकता। इसमें पूर्व तैयारी, स्थानीय समुदायों की भागेदारी, प्रशिक्षित बलों की उपलब्धता और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था भी जरूरी है।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन द्वारा संचालित गतिविधियों को भी बैठक में साझा किया गया। यूएलएमएमसी निदेशक शांतनु सरकार ने कहा, “भू-स्थानिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग, डेटा एनालिटिक्स और पूर्व चेतावनी तंत्र सब मिलकर आपदा जोखिम न्यूनीकरण की प्रक्रिया को अत्यधिक प्रभावी बना रहे हैं। भविष्य में आपदा चुनौतियों का सामना करने में तकनीक आधारित समाधान ही निर्णायक साबित होंगे।”
सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में ब्रिक्स देशों के मध्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सहयोग को मजबूती प्रदान करना, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना और सामुदायिक स्तर पर रणनीतियों का विकास शामिल रहा।
*BRICS Disaster Risk Reduction (DRR)* कार्यसमूह की बैठक में उत्तराखंड के मॉडल की सराहना ने राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह *उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एसडीआरएफ* और अन्य एजेंसियों के सतत प्रयासों की एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता है।
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सादर, टीम नेटा नगरी (स्नेहा जोशी)
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