मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समान नागरिक संहिता का किया विरोध, धार्मिक स्वतंत्रता पर उठाए सवाल

Rajkumar Dhiman, Dehradun: समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बहस के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपना विरोध स्पष्ट कर दिया है। बोर्ड का कहना है कि वह इस कानून को स्वीकार नहीं करता और इसे देश की बहुलता व धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ मानता है। प्रेस वार्ता में बोर्ड के प्रवक्ता … The post यूसीसी को स्वीकार नहीं करते मुसलमान, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड खुले तौर पर विरोध में उतरा appeared first on Round The Watch.

Apr 18, 2026 - 00:37
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समान नागरिक संहिता का किया विरोध, धार्मिक स्वतंत्रता पर उठाए सवाल
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समान नागरिक संहिता का किया विरोध, धार्मिक स्वतंत्रता पर उठाए सवाल

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समान नागरिक संहिता का किया विरोध, धार्मिक स्वतंत्रता पर उठाए सवाल

कम शब्दों में कहें तो, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समान नागरिक संहिता (UCC) के खिलाफ अपने विरोध को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है। उनका मानना है कि यह कानून देश की धार्मिक विविधता और स्वतंत्रता के खिलाफ है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari

राजकुमार धिमन, देहरादून: समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भारत में जबर्दस्त बहस चल रही है। इस मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपना स्वर उठाते हुए विरोध प्रकट किया है। बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि वे इस कानून को स्वीकार नहीं करते। उनका मानना है कि UCC भारत की धार्मिक भिन्नताओं और बहुलता को खतरे में डाल सकता है।

UCC के प्रभाव पर चिंता

डॉ. इलियास ने स्पष्ट किया कि भारत जैसे बहुरंगी समाज में सभी समुदायों के लिए एक समान कानून लागू करने का प्रयास व्यावहारिक नहीं होगा। इससे सामाजिक असंतोष और धार्मिक आज़ादी का हनन हो सकता है। उनका यह भी कहना है कि इस कानून के लागू होने से संविधान द्वारा निर्धारित धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रभाव पड़ेगा, जो कि एक अत्यंत संवेदनशील विषय है।

मदरसों की शिक्षा प्रणाली पर सवाल

बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया कि मदरसों की शिक्षा प्रणाली और उनके पाठ्यक्रम को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार की मदरसा व्यवस्था में हस्तक्षेप को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए। उनके अनुसार, इस मुद्दे की कानूनी चुनौती पहले से ही अदालत में विचाराधीन है।

धार्मिक स्थलों का मुद्दा

प्रवक्ता ने धार्मिक स्थलों, जैसे कि मस्जिदों और मजारों को हटाने की कार्रवाई को भी चिंताजनक बताया। उन्होंने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस्लाम एवं पैगंबर पर की जाने वाली आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामलों में उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है।

लोकतांत्रिक तरीके से विरोध

डॉ. इलियास ने यह स्पष्ट किया कि बोर्ड इस मुद्दे पर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेगा, और लोकतांत्रिक व कानूनी रास्तों का सहारा लेगा। उनकी बातों में एक स्पष्ट संदेश है कि वे धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

बोर्ड की इस प्रेस वार्ता में नईम कुरैशी समेत अन्य कई प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। उनके विचार और चिंताएं इस मुद्दे को और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं।

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संपर्क: टीम नेटAA नगरी, अंजलि गुप्ता

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