कुश्ती का पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ता क्रेज: अखाड़ा शेरान समिति की पहल
देहरादून दशकों से चली आ रही देहरादून कुश्ति उत्तराखंड के अलावा दिल्ली हिमाचल,हरियाणा,यूपी,पंजाब में खासी जानी पहचानी जाती रही है। बावजूद इसके खेलों में कुश्ती जैसे खेल की लोकप्रियता को…
कुश्ती का पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ता क्रेज: अखाड़ा शेरान समिति की पहल
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari
कम शब्दों में कहें तो
कुश्ती का खेल ना केवल देहरादून बल्कि पूरे उत्तराखंड और अन्य राज्यों में लोगों का प्रिय है। अखाड़ा शेरान समिति द्वारा आयोजित कुश्ती दंगल में पर्वतीय क्षेत्रों के पहलवानों ने अपनी ताकत और कौशल का प्रदर्शन किया।
देहरादून में कुश्ती का समृद्ध इतिहास
देहरादून कुश्ती का इतिहास दशकों पुराना है, जो उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, हिमाचल, हरियाणा, यूपी और पंजाब में भी अपना नाम कमा चुकी है। कई सालों से, इस खेल को बढ़ावा देने के लिए अखाड़ा शेरान समिति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अखाड़ा शेरान समिति की पहल
अखाड़ा शेरान समिति रजिस्टर्ड के प्रधान तिलक राज ने बताया कि इस समिति द्वारा हर रविवार को कुश्ती दंगल का आयोजन किया जाता है। यह दंगल विशेष रूप से पर्वतीय जिलों के बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है, जो 'शेडो फाइट' नामक संस्थान के माध्यम से कुश्ती में रुचि दिखा रहे हैं। तिलक राज का कहना है कि "हम इन खिलाड़ियों के हौसले और मेहनत की सराहना करते हैं।"
खिलाड़ियों की उत्कृष्टता
शेडो फाइट इंस्टीट्यूट से लगभग एक दर्जन खिलाड़ियों ने इस बार दंगल में शानदार प्रदर्शन किया। इनमें प्रमुख नाम हैं: अमित ममगाई, अनुराग बहुगुणा और अर्पित ठाकुर, जिन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया। ये बच्चे न केवल कुश्ती में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं बल्कि अपने भविष्य को भी संवारने की कोशिश कर रहे हैं।
दर्शकों की भारी मौजूदगी
इस दंगल में खराब मौसम के बावजूद हजारों दर्शक मौजूद रहे। पहलवानों ने अपनी ताकत और तकनीक का शानदार प्रदर्शन करते हुए लोगों का मनोरंजन किया। इस मैच में मुख्य विजेता राजा पहलवान और गुलशेर रूरकी के बीच मुकाबला रहा, जो दर्शकों के दिलों में बसेगा।
अखाड़ा शेरान समिति का दृष्टिकोण
समिति के संरक्षक देवेन्द्र बजाज और सचिव बृजेश चावला का मानना है कि कुश्ती से न केवल शारीरिक मजबूती मिलती है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य को भी उज्ज्वल बनाने का एक साधन है। उन्होंने खेलों के प्रति बच्चों की रुचि को और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कुश्ती की लोकप्रियता और इससे जुड़ी चुनौतियां
हालांकि कुश्ती का खेल विभिन्न जगहों पर प्रसिद्ध है, फिर भी इसे और अधिक प्रोत्साहन की आवश्यकता है। इस खेल को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्तर पर आयोजनों का महत्व है। अगर प्रतिस्पर्धाएं बढ़ेंगी, तो युवा पीढ़ी इस खेल की ओर अधिक आकर्षित होगी।
कुल मिलाकर, अखाड़ा शेरान समिति के प्रयासों से पर्वतीय क्षेत्रों में कुश्ती को नई दिशा मिल रही है। इस खेल के प्रति बढ़ती रुचि और स्थानीय प्रतिभाओं का सम्मान इसे और भी आकर्षक बना रहा है।
इसके अलावा, यदि आप और अधिक जानकारी चाहते हैं तो हमारी साइट पर Netaa Nagari पर जरूर जाएं।
Team Netaa Nagari
What's Your Reaction?