ऋषिकेश-हरिद्वार में पर्यटकों की लापरवाही से हो रही मौतें, 2026 में दर्ज की गईं 15 से अधिक घटनाएं

  गंगा में बढ़ता मौत का आंकड़ा: चेतावनियों को अनदेखा करना पड़ रहा भारी ऋषिकेश/हरिद्वार ( उमाशंकर कुकरेती) कहावत है

May 31, 2026 - 09:37
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ऋषिकेश-हरिद्वार में पर्यटकों की लापरवाही से हो रही मौतें, 2026 में दर्ज की गईं 15 से अधिक घटनाएं
ऋषिकेश-हरिद्वार में पर्यटकों की लापरवाही से हो रही मौतें, 2026 में दर्ज की गईं 15 से अधिक घटनाएं

गंगा में बढ़ता मौत का आंकड़ा: चेतावनियों को अनदेखा करना पड़ रहा भारी

ऋषिकेश/हरिद्वार
(सपना रावत)

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के धार्मिक नगरों ऋषिकेश और हरिद्वार में पर्यटकों की लापरवाही ने गंगा को खतरे में डाल दिया है। मई 2026 में यहां 15 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, जो प्रशासन और समाज के लिए चिंता का विषय हैं। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.

गर्मी की छुट्टियों, वीकेंड और चारधाम यात्रा के कारण गंगा घाटों पर भारी भीड़ उमड़ने से इस समस्या में और वृद्धि हो रही है। लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन कई लोग प्रशासन की चेतावनियों को अनदेखा करते हुए अपनी सुरक्षा को जोखिम में डाल रहे हैं।

सुरक्षा उपायों का उल्लंघन

गंगा घाटों पर स्थानीय पुलिस, जल पुलिस और SDRF की टीमें हर वक्त तैनात रहती हैं। बावजूद इसके, घाटों पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और सुरक्षा जंजीरों के होते हुए भी लोग प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार गंगा की ऊपर की सतह भले ही शांत दिखती हो, लेकिन नीचे की धाराएं बेहद खतरनाक होती हैं। नीचे का तेज बहाव किसी भी व्यक्ति को अपने साथ बहा ले सकता है। यही कारण है कि तैराक भी कभी-कभी गंगा की धाराओं की चपेट में आ जाते हैं।

दुखद घटनाएँ

हाल ही में ईद की पूर्व संध्या पर एक दुर्घटना घटित हुई, जहां दास हुंडई का एक समूह ऋषिकेश में गंगा में स्नान कर रहा था। चार लोग किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल आए, लेकिन दो सदस्य—ऋतु और उपाध्याय—तेज धारा में बह गए।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोनों को तैरना नहीं आता था। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों ने सहायता के लिए शोर मचाया, लेकिन SDRF की टीम को घंटों तक कोई सुराग नहीं मिला।

मई 2026 में हुई प्रमुख घटनाएं

सिंगटाली पुल हादसा (30 मई 2026)

मेरठ से आए छह दोस्तों का समूह लक्ष्मणझूला में घूम रहा था जब दो पर्यटक प्रतिबंधित क्षेत्र में स्नान करते समय बह गए। एक युवक का शव बरामद किया गया, लेकिन महिला पर्यटक की तलाश अभी भी जारी है।

सेल्फी के चक्कर में बहे युवक

23 मई को अमरोहा से आए दो दोस्त ऋषिकेश के डबल-ट्रिपल बीच पर सेल्फी के लिए खड़े हुए। अचानक पैर फिसलने से दोनों गंगा में समा गए।

मालकुंठी पुल हादसा

दिल्ली से परिवार के साथ आए 18 वर्षीय किशोर संतुलन बिगड़ने से गंगा की तेज धारा में बह गया।

गंगनहर हादसा

हरिद्वार के बहादराबाद क्षेत्र में एक 14 वर्षीय किशोर गंगनहर में स्नान के दौरान तेज धारा में बह गया।

खतरनाक ज़ोन

प्रशासन ने ऋषिकेश और हरिद्वार के कई क्षेत्रों को अति संवेदनशील घोषित किया है। इसके बावजूद पर्यटक वहां जाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

ऋषिकेश के खतरनाक क्षेत्र

  • नीम बीच
  • साईं घाट
  • मस्तराम घाट
  • सिंगटाली पुल क्षेत्र
  • कौड़ियाला क्षेत्र

हरिद्वार के संवेदनशील क्षेत्र

  • कांगड़ा घाट
  • बहादराबाद गंगनहर
  • पिरान कलियर क्षेत्र

हादसों के कारण

प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश

पर्यटक अक्सर उन क्षेत्रों में प्रवेश कर जाते हैं जिन्हें प्रशासन पहले ही खतरनाक घोषित कर चुका है।

सोशल मीडिया का प्रभाव

नए अनुभव के लिए युवा लोग वीडियो और सेल्फी के शौक में गंगा के खतरनाक स्थानों तक पहुंच जाते हैं, जो कई बार दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटनाओं का कारण बनता है।

जलस्तर में उतार-चढ़ाव

बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी के कारण गंगा का जल स्तर अचानक बढ़ जाता है, जिसका अंदाजा पर्यटकों को नहीं लग पाता।

चेतावनियों की अनदेखी

घाटों पर लगे चेतावनी बोर्ड और बैरिकेड्स की अनदेखी करना एक आम बात बन गई है।

प्रशासन की कदम

हादसों को देखते हुए प्रशासन और SDRF ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को कड़ा किया है।

  • ट्रिवेणी घाट और अन्य संवेदनशील स्थानों पर SDRF की स्थायी तैनाती
  • मोटरबोट, लाइफ जैकेट और अन्य बचाव उपकरणों की उपलब्धता
  • चेतावनी घोषणाएं लगातार जारी रखना
  • प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने वालों पर कार्रवाई
  • स्थानीय राफ्टिंग गाइडों और स्वयंसेवकों से सहायता

हरिद्वार में मानवता की मिसाल

हाल ही में हरिद्वार में लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना गंगनहर में बह रही एक दिल्ली निवासी युवती को सुरक्षित बाहर निकाला। इस साहसिक कार्य की पुरानी सराहना हो रही है।

पर्यटकों के लिए सुरक्षा नियम

  • केवल सुरक्षित घाटों पर स्नान करें।
  • गहरे और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में न जाएं।
  • सेल्फी और वीडियो के लिए नदी के बीच पत्थरों पर न चढ़ें।
  • बच्चों को अकेला न छोड़ें।
  • प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लें।
  • यदि तैरना नहीं आता तो सुरक्षा क्षेत्रों से दूर रहें।

सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है

गंगा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसकी धाराओं में भी अपार शक्ति है। प्रशासन से लगातार अपील की जा रही है कि लोग सुरक्षा नियमों का पालन करें, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही किसी परिवार को हमेशा के लिए प्रभावित कर सकती है।

यदि लोग समय रहते सतर्क नहीं हुए, तो गंगा में होने वाली मौतों की संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है।

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टीम नेटaa नGaरी

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