उत्तराखंड के विकास में ‘जियोस्पेशियल’ तकनीक की नई शुरुआत: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मोबाइल ऐप का उद्घाटन किया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के आईटी पार्क में आयोजित ‘राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल’ में भाग लिया और मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से निपटने…
उत्तराखंड के विकास में ‘जियोस्पेशियल’ तकनीक की नई शुरुआत
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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड ने अपने विकास को गति देने के लिए ‘जियोस्पेशियल’ तकनीक का उपयोग शुरू किया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के द्वारा एक नई मोबाइल ऐप का उद्घाटन किया गया है, जिससे ₹10 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स की पोर्टल मैपिंग अनिवार्य हो जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का योगदान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में देहरादून के आईटी पार्क में आयोजित ‘राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल’ में भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य में बारिश के मौसम के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को सुनिश्चित करना था। इस दौरान, मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे अधिकतम सजगता बरतें और किसी भी आपदा के समय त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
आपदा प्रबंधन की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड जैसे भौतिक रूप से संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन सिर्फ एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों को आपदाओं से निपटने की पूरी तैयारी करनी चाहिए और जन जागरूकता बढ़ानी चाहिए। इस प्रकार की योजनाओं से न केवल लोगों का जीवन सुरक्षित रहेगा बल्कि राज्य का विकास भी तेज़ होगा।
‘जियोस्पेशियल’ तकनीक का महत्व
जियोस्पेशियल तकनीक का उपयोग विभिन्न स्थानों की सटीक मैपिंग में किया जाता है। इससे विकास और योजनाओं की प्रभावशीलता में वृद्धि होती है। नए मोबाइल ऐप के जरिए, सभी परियोजनाओं की मैपिंग की जाएगी जो ₹10 करोड़ से अधिक की लागत में होंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्रोजेक्ट्स सही मानकों के अनुसार कार्यान्वित हों और किसी भी प्रकार की आपत्ति से बचा जा सके।
भविष्य की दृष्टि
इस नई पहल के माध्यम से, उत्तराखंड के विकास में एक नई दिशा प्राप्त होगी। राज्य सरकार ने भविष्य में नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा को प्रमुख प्राथमिकता दी है। हमने पहले देखा है कि कैसे तकनीकी नवाचारों ने प्रदेश की योजनाओं को सफल बनाने में सहयोग किया है। ऐसे में, ‘जियोस्पेशियल’ तकनीक का लाभ उठाना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री धामी एवं उनकी टीम की मेहनत और दिशा-निर्देश से उत्तराखंड में संभावित प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सजगता और विकास की गति को स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है।
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लेखिका: सुषमा तिवारी
Team Netaa Nagari
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