मां की भावुकता: बेटे की जीत से कॉलेज में दाखिला लेने तक की यात्रा
Round The Watch News: नैनीताल के डीएसबी परिसर में छात्रसंघ चुनाव का परिणाम घोषित हुआ तो जीत का जश्न समर्थकों के बीच था, लेकिन सबसे भावुक तस्वीर एक मां की रही। निर्दलीय प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह चौहान के अध्यक्ष बनने की खबर सुनते ही उनकी मां बीना चौहान की आंखों से खुशी के आंसू छलक … The post बेटे की जीत को मां ने लिया कॉलेज में दाखिला, छात्रसंघ अध्यक्ष बन जाने पर हुईं भावुक appeared first on Round The Watch.
मां की भावुकता: बेटे की जीत से कॉलेज में दाखिला लेने तक की यात्रा
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari
कम शब्दों में कहें तो, नैनीताल के डीएसबी परिसर में छात्र संघ चुनाव परिणामों ने एक अनमोल कहानी को उजागर किया, जिसमें एक मां ने अपने बेटे की जीत के लिए न केवल समर्थन दिया, बल्कि खुद कॉलेज में दाखिला भी लिया। इस घटना ने सभी को भावुक कर दिया।
नैनीताल के डीएसबी परिसर में छात्रसंघ चुनाव का परिणाम घोषणित होते ही उनके समर्थकों के बीच जश्न का माहौल था। इस उत्सव में सबसे भावुक पल तब आया जब निर्दलीय प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह चौहान के अध्यक्ष बनने की खबर सुनते ही उनकी मां बीना चौहान की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। यह उनकी मेहनत और बेटे के सपनों की जीत का एक ऐसा पल था, जिसे वह कभी नहीं भूल पाएंगी।
शिक्षा और समर्थन का अनोखा संगम
बीना चौहान, जो कि हल्द्वानी के वार्ड नंबर-10 की पार्षद हैं, ने अपने बेटे के चुनावी अभियान को अपने जीवन का एक अहम हिस्सा बना लिया था। न केवल उन्होंने प्रचार में सक्रिय रूप से भाग लिया, बल्कि डीएसबी परिसर में एमए राजनीति विज्ञान में भी दाखिला ले लिया। उन्होंने खुद को छात्रों के बीच रखकर भानु को वोट दिलाने की कई कोशिशें की। यहां तक कि उन्होंने कई बार बिना जूते-चप्पल के भी छात्रों से चर्चा की और भानु के लिए समर्थन जुटाया।
बीना के अनुसार, भानु ने उनके पार्षद चुनाव के दौरान संपूर्ण रूप से मेहनत की थी, यही कारण था कि उन्होंने अपने बेटे में नेतृत्व की क्षमता देखी। हाल ही में एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने वाले भानु कॉलेज के छात्रों की समस्याओं के प्रति भी जागरूक थे, और उनकी मां की ख्वाहिश थी कि वह छात्रसंघ अध्यक्ष बनकर छात्रों के साथ मिलकर काम करें। इसी दृष्टि से वह बेटे के चुनावी मैदान में उनके साथ खड़ी रहीं।
“मां का साथ देना मेरी जिम्मेदारी”
जब परिणाम आए, तो बीना चौहान ने कहा कि "बेटे का सहयोग करना मां होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है। पूरे शहर ने हमें समर्थन दिया है, और मैं हमेशा अपने बेटे के साथ रहूंगी।" उनका मानना है कि छात्र नेताओं को केवल राजनीतिक मुद्दे ही नहीं उठाने चाहिए, बल्कि छात्रों की विभिन्न समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए। विशेषकर खेलकूद और दाखिले के समय में बाहरी विद्यार्थियों की समस्याएं भी महत्वपूर्ण हैं।
1355 वोटों ने पार किया चुनावी मापदंड
डीएसबी परिसर का अध्यक्ष पद तीन प्रत्याशियों के बीच मुकाबले का गवाह बना। निर्दलीय भानु प्रताप सिंह चौहान को 1355 वोट प्राप्त हुए, जबकि एबीवीपी समर्थित शुभम कुमार को 873 और हिमांशु आर्या को 283 वोट मिले। इससे स्पष्ट है कि भानु ने अपनी राजनीतिक थाती को मजबूत कर दिया है।
चुनाव प्रचार के दौरान, बीना चौहान और उनके बेटे को लेकर कुछ सवाल भी उठाए गए थे। उन्होंने कहा कि छात्र समुदाय ने 1355 वोट देकर उन सवालों का उत्तर दे दिया। उनके लिए ये वोट केवल संख्यात्मक आंकड़ा नहीं थे, बल्कि छात्रों के विश्वास और एकजुटता का प्रतीक थे।
कोई भी रंग नहीं, सिर्फ एक सोच
डीएसबी परिसर का चुनाव केवल राजनीतिक कारणों से चर्चा में रहा। एबीवीपी समर्थित शुभम कुमार ने भगवा झंडा उठाया, जबकि निर्दलीय भानु प्रताप सिंह चौहान ने काले झंडे को अपनी पहचान बनाया। इस चुनाव के परिणाम घोषित होते ही भानु के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। मां बीना की आंखों में आंसू थे, जिनके छोटे से कदम से शुरू होकर यह एक बड़े सपने की पूर्णता की ओर बढ़ गया।
भानु ने न केवल अपनी मां के सपनों को सच किया, बल्कि छात्रों के प्रशिक्षक और मार्गदर्शक बनने का सपना भी पूरा किया। यह कहानी सिर्फ एक चुनाव की नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्थन और साझेदारी की है।
हाल के इस चुनावी परिणाम से साबित है कि मेहनत और जुनून से सामाजिक बदलाव संभव है। आगे बढ़ने का यकीन इस मां-बेटे के अद्भुत सफर से मिलता है।
भानु के नेतृत्व की कहानी केवल नैनीताल के छात्रों में ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण उत्तराखंड में एक नई प्रेरणा का रूप लेगी।
इसके अलावा, आगे की अपडेट्स और खबरों के लिए विजिट करें: https://netaanagari.com
Team Netaa Nagari
What's Your Reaction?