जंतर-मंतर पर उत्तराखंड पुलिस के निलंबित कांस्टेबल का विवादित वीडियो, जांच में कई नए तथ्य सामने आए

Rajkumar Dhiman, Dehradun: दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड पुलिस की वर्दी पहनकर पहुंचे निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस मुख्यालय ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। अब इस मामले में कई नए तथ्य … The post जंतर-मंतर पर वर्दी में पहुंचे कांस्टेबल का गैंगस्टर कनेक्शन, जा चुका जेल और बर्खास्तगी की कार्रवाई भी जारी appeared first on Round The Watch.

Jul 24, 2026 - 18:37
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जंतर-मंतर पर उत्तराखंड पुलिस के निलंबित कांस्टेबल का विवादित वीडियो, जांच में कई नए तथ्य सामने आए
जंतर-मंतर पर उत्तराखंड पुलिस के निलंबित कांस्टेबल का विवादित वीडियो, जांच में कई नए तथ्य सामने आए

जंतर-मंतर पर उत्तराखंड पुलिस के निलंबित कांस्टेबल का विवादित वीडियो, जांच में कई नए तथ्य सामने आए

कम शब्दों में कहें तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर उत्तराखंड पुलिस की वर्दी में पहुंचे निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिससे एक बार फिर पुलिस विभाग की छवि को धक्का लगा है। पुलिस मुख्यालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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राजकुमार धीमान, देहरादून: दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन के दौरान निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो में वह उत्तराखंड पुलिस की वर्दी पहनकर मंच से बयान देते हुए नजर आ रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने पूरी प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। शेर सिंह की अनुपस्थिति और उसके खिलाफ चल रही बर्खास्तगी की प्रक्रिया के चलते मामला और जटिल हो गया है।

विरल वीडियो में दिए गए बयान

इस वायरल वीडियो में, शेर सिंह मंच से यह कहते सुनाई दे रहे हैं, “जब देश ही नहीं बचेगा तो इस नौकरी का क्या करूंगा? उत्तराखंड पुलिस की नौकरी छोड़कर कॉकरोचों की रक्षा करने आया हूं।” उन्होंने शहीद भगत सिंह का हवाला देते हुए कहा, “जिंदगी अपने दम पर जी जाती है, दूसरों के कंधों पर जनाजे जाते हैं।” इसके बाद, शेर सिंह ने सार्वजनिक रूप से नौकरी छोड़ने का एलान करते हुए कहा, “यदि अपने हक के लिए आवाज उठाना बागी होना है, तो हम बागी हैं।” उसके इन बयानों के बाद से मामला और तूल पकड़ गया है।

गैंगस्टर कनेक्शन और अतीत की गिरफ्तारी

आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती के अनुसार, शेर सिंह हरिद्वार जिले के जटबहादरपुर गांव का निवासी है। वह पहले भी गंभीर आरोपों में घिर चुका है। सितंबर 2025 में, उत्तराखंड एसटीएफ ने शेर सिंह और कांस्टेबल हसन जैदी को गिरफ्तार किया था। उन पर उत्तराखंड के कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के गिरोह से मिलीभगत कर पीड़ित पक्ष को धमकाने और विवादित संपत्ति बेचने का दबाव बनाने का आरोप था।

एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया था कि दोनों पुलिसकर्मी प्रवीण वाल्मीकि और उसके भतीजे मनीष बॉलर के गिरोह से जुड़े हुए थे। फिलहाल शेर सिंह उस मामले में जमानत पर बाहर है।

प्रवीण वाल्मीकि गैंग की जांच में आया था नाम

वर्ष 2025 में, एसटीएफ ने गोपनीय सूचनाओं के आधार पर रुड़की के पार्षद मनीष बॉलर, पंकज अष्टवाल सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मनीष बॉलर गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि का भतीजा है। पुलिस ने 27 अगस्त 2025 को मनीष बॉलर और पंकज जायसवाल को गिरफ्तार किया था। इस दौरान कांस्टेबल शेर सिंह और हसन जैदी के नाम भी सामने आए। एसटीएफ की जांच से यह स्पष्ट हुआ कि दोनों के गैंग से जुड़े होने के पर्याप्त सबूत मिले हैं।

गिरफ्तारी के बाद हुआ था पिथौरागढ़ तबादला

गिरफ्तारी के बाद, शेर सिंह का तबादला कुमाऊं रेंज के पिथौरागढ़ जिले में किया गया था। वहीं से वह 28 जून 2026 से बिना अनुमति अनुपस्थित चल रहा था। विभाग ने पहले उसे नोटिस जारी किया और बाद में 20 जुलाई 2026 को उसे सस्पेंड कर दिया। जंतर-मंतर पर पुलिस की वर्दी पहनकर धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के बाद पुलिस मुख्यालय द्वारा पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी गई है।

अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों का सत्यापन कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, शेर सिंह के विरुद्ध विभागीय बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी जारी है।

इस मामले ने विभाग की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ऐसे व्यक्तियों का पुलिस बल में होना सही है? इसके बारे में नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है।

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टीम नेटAA नागरी

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