देहरादून में जिला मजिस्ट्रेट ने गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत दो कुख्यात अपराधियों को किया जिला बदर
*जिले में अपराधियों के लिए नही है कोई स्थान; जिला मजिस्टेªट न्यायालय के कड़े व बड़े एक्शन जारी* देहरादून
देहरादून में जिला मजिस्ट्रेट ने गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत दो कुख्यात अपराधियों को किया जिला बदर
कम शब्दों में कहें तो: जिले में अपराधियों के लिए कोई स्थान नहीं; जिला मजिस्टेªट न्यायालय के बड़े एक्शन जारी।
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देहरादून, 02 मई 2026 (सूवि) - जनपद देहरादून के जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा जनसामान्य में सुरक्षा की भावना को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुंडा नियंत्रण अधिनियम के अंतर्गत गंभीर कार्यवाही की है। उन्होंने दो आदतन अपराधियों को 6 महीने के लिए जिला बदर करने का आदेश दिया है।
आसिफ और राहुल: कुख्यात अपराधियों का परिचय
पहला नाम है आसिफ, जो निवासी मुस्लिम बस्ती, चौकी बाजार के पीछे, कोतवाली विकासनगर का रहने वाला है। उसके खिलाफ आयुध अधिनियम, भारतीय दण्ड संहिता और न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से कुछ प्रमुख मामले हैं:
- आर्म्स एक्ट के तहत पांच से अधिक आरोप
- धारा 392, 356, 441 IPC के तहत कई गंभीर आरोप
दूसरा व्यक्ति, राहुल कश्यप, जो कश्यप मोहल्ला, जीवनगढ़ का निवासी है, उसके खिलाफ भी चोरी, शस्त्र अधिनियम, और आबकारी अधिनियम सहित कई गंभीर आरोप लगे हैं। उसके खिलाफ 2023 और 2024 के बीच कई आपराधिक मामले पंजीकृत किए गए हैं।
कार्रवाई के कारण और विधिक प्रक्रिया
अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अपराधियों की ख्याति एक दुस्साहसी और समाज के लिए खतरनाक व्यक्ति के रूप में है, जिससे आम जनमानस में भय व्याप्त है। उनकी गतिविधियाँ लोक शांति एवं जनहित के लिए प्रतिकूल मानी गईं। इसीलिए जिला मजिस्ट्रेट ने उपयुक्त विधिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही की।
इसके बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया, लेकिन उन्होंने न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने से मना कर दिया। इस स्थिति को देखते हुए, जिला मजिस्ट्रेट ने उन्हें गुंडा नियंत्रक अधिनियम के तहत गुंडा घोषित कर दिया और उन्हें जनपद देहरादून की सीमा से बाहर रहने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्हें बिना सक्षम अनुमति के जनपद में प्रवेश न करने की चेतावनी भी दी गई।
निष्कर्ष: समाज के संरक्षक की भूमिका
यह कार्रवाई जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नागरिकों के सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को संरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम है। विभाग की निरंतरता और अनुशासन को बनाए रखने में यह कदम अत्यंत आवश्यक हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जिले में अपराधियों का कोई स्थान नहीं और यह सबक उन लोगों के लिए है जो कानून को तोड़ने का प्रयास करते हैं।
आगे जनसामान्य में सुरक्षा की भावना को बढ़ाने के लिए इस तरह की कार्यवाहियों का जारी रहना आवश्यक है। स्थानीय प्रशासन की यह संकल्पना स्पष्ट करती है कि वे असामाजिक तत्वों के खिलाफ कोई समझौता नहीं करने वाले हैं।
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टीम नेटा नगरी
स्नेहा शर्मा
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