SC/ST स्कॉलरशिप घोटाले में ED द्वारा 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क, बड़ी कार्रवाई की

उत्तराखंड के चर्चित SC/ST स्कॉलरशिप घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 13.83 करोड़ रुपये की

Jun 17, 2026 - 00:37
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SC/ST स्कॉलरशिप घोटाले में ED द्वारा 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क, बड़ी कार्रवाई की
SC/ST स्कॉलरशिप घोटाले में ED द्वारा 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क, बड़ी कार्रवाई की

SC/ST स्कॉलरशिप घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, 13.83 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड के चर्चित SC/ST स्कॉलरशिप घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए लगभग 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया है।

इस घोटाले के मामले में ED ने लगभग 13.83 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। यह कार्रवाई फर्जी स्कॉलरशिप दावों के माध्यम से सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित है। ED ने इस मामले की जांच उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी।

अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना

यह मामला वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रों के लिए संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के दौरान हुई अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच में यह सामने आया कि कुछ निजी शैक्षणिक संस्थानों ने अपात्र या फर्जी छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति के लिए दावे किए।

कौन हैं मुख्य आरोपी?

इन संस्थानों में रुड़की स्थिति मदरहुड इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, हरिद्वार का RIMS संस्थान और मेरठ का महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी शामिल हैं। ED के अनुसार, हरिद्वार जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय से इन संस्थानों से जुड़े कुल 6208 छात्रवृत्ति दावों का निस्तारण किया गया। इन दावों के आधार पर लगभग 27.98 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि जारी की गई, जिसमें से 19.74 करोड़ रुपये संस्थानों के खातों में और 8.24 करोड़ रुपये छात्रों के नाम पर खोले गए बैंक खातों में भेजे गए।

छात्रवृत्ति दावों में फर्जीवाड़ा

जांच एजेंसी द्वारा किए गए सत्यापन में यह पाया गया कि कई छात्रों का दाखिला केवल कागजों पर था। कई मामलों में छात्रों ने परीक्षा में भाग नहीं लिया, उनके विश्वविद्यालय रिकॉर्ड में जानकारी नहीं मिली अथवा वे मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों में पंजीकृत नहीं थे। ED ने कहा कि 6208 दावों में से 2895 छात्रवृत्ति दावे फर्जी पाए गए हैं, जिससे सरकार को लगभग 13.83 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

मामले में निरंतर जांच प्रक्रिया

जांच में यह भी पाया गया कि कुछ छात्रों के बैंक खाते संस्थान प्रबंधन के नियंत्रण में थे और छात्रवृत्ति की राशि बाद में संस्थानों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई या नकद निकाल ली गई। इस मामले में मनीका शर्मा की भूमिका भी संदिग्ध है, क्योंकि एजेंसी का आरोप है कि उनके द्वारा छात्रवृत्ति राशि के उपयोग और हस्तांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।

अटैच की गई संपत्तियां

कुर्क की गई संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), भूमि और हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र के शैक्षणिक संस्थानों की इमारतें शामिल हैं। ED ने इस मामले की जांच 2020 से शुरू की थी और अब तक PMLA कोर्ट, देहरादून में पांच अभियोजन शिकायतें (चार्जशीट) दाखिल की हैं। यह एजेंसी का इस मामले में छठा संपत्ति अटैचमेंट आदेश है।

भविष्य के कदम

एजेंसी ने यह स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और घोटाले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह उच्च स्तर का घोटाला सरकारी धन का दुरुपयोग दर्शाता है जो अनुसूचित जाति और जनजाति के विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रतिवेदन के अनुसार, यह घोटाला न केवल सरकार बल्की छात्रों तथा उनके भविष्य के लिए भी गंभीर है। इस स्थिति से न केवल शिक्षा के क्षेत्र में अनियमितता को उजागर किया गया है, बल्कि यह भी बताया गया है कि कैसे कुछ लोग इस योजना का दुरुपयोग करने में सक्षम रहे।

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Team Netaa Nagari - पूजा शर्मा

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