काठगोदाम रेलवे स्टेशन का 142वां वार्षिकोत्सव, ऐतिहासिक विरासत की झलक प्रस्तुत
काठगोदाम रेलवे स्टेशन के 142 वर्ष पूरे, स्टेशन महोत्सव में दिखाई दी ऐतिहासिक विरासत की झलक हेरिटेज फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन, सेवानिवृत्त रेलकर्मियों को किया सम्मानित; नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने भी किया काठगोदाम रेलवे स्टेशन का दौरा हुआ उनका 26 मई 1956 में […] Source
काठगोदाम रेलवे स्टेशन का 142वां वार्षिकोत्सव, ऐतिहासिक विरासत की झलक प्रस्तुत
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कम शब्दों में कहें तो, काठगोदाम रेलवे स्टेशन की ऐतिहासिकता का जश्न मनाने के लिए आयोजित महोत्सव में न केवल स्टेशन की सम्पूर्ण विरासत का प्रदर्शन किया गया, बल्कि सेवानिवृत्त रेलकर्मियों को भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर हेरिटेज फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ, जो दर्शकों को ऐतिहासिक छवियों के माध्यम से रेलवे स्टेशन की प्राचीनता का अनुभव करने का अवसर प्रदान करता है।
काठगोदाम रेलवे स्टेशन: सम्पूर्ण विरासत का प्रतीक
काठगोदाम रेलवे स्टेशन, जिसे 1881 में स्थापित किया गया था, का महत्व आज भी बरकरार है। यह स्टेशन न केवल ऐतिहासिकता का प्रतीक है, बल्कि उत्तर भारत के पर्यटन में भी इसका विशेष स्थान है। इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य स्टेशन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना है। यहां आयोजित नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने कार्यक्रम में एक नई जान फुंक दी।
भव्य हेरिटेज फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन
इस महोत्सव में हेरिटेज फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें काठगोदाम रेलवे स्टेशन के पिछले 142 वर्षों की यात्रा को दर्शाया गया। इस प्रदर्शनी ने ना केवल स्टेशन की ऐतिहासिकता को उजागार किया, बल्कि वहां आए दर्शकों की उत्सुकता को भी बढ़ाया। इसी के साथ, सेवानिवृत्त रेलकर्मियों को सम्मानित करते हुए उनके कार्यकाल की महत्ता को भी उजागर किया गया।
जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया काठगोदाम का दौरा
इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण का साक्षी यह स्टेशन उस समय बना जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 26 मई 1956 को काठगोदाम रेलवे स्टेशन का दौरा किया था। यह घटना आज भी काठगोदाम की धरोहर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जाती है।
संस्कृतिक कार्यक्रमों का आकर्षण
महोत्सव में आयोजित नुक्कड़ नाटक ने दर्शकों का मन मोह लिया। स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न नाटकों ने न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि भारतीय संस्कृति की सुंदरता को भी दर्शाया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह का रंग जमाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
समारोह का समापन एवं भविष्य के लिए संकल्प
समारोह का समापन दर्शकों और आए हुए मेहमानों के बीच समर्पण एवं संस्कृति के प्रति प्रेम के साथ किया गया। इस महोत्सव ने सभी को यह याद दिलाया कि ऐतिहासिक धरोहरों को बचाना और उनके महत्व को समझना हमारी जिम्मेदारी है।
इस प्रकार, काठगोदाम रेलवे स्टेशन का यह 142वां वार्षिकोत्सव ऐतिहासिकता का महोत्सव बनकर उभरा और सभी उपस्थित लोगों के दिल में एक नई उमंग जगाने में सफल रहा।
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टीम नेटaa नागरी
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