कमल रावत की भूमिका पर सवाल: उत्तराखंड के नाबालिग गैंगरेप केस में जांच का नया मोड़
Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड के Champawat में चर्चित नाबालिग सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस जांच ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि शुरुआती तौर पर दर्ज सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जांच के दौरान एक सुनियोजित षड्यंत्र और बदले की भावना … The post नाबालिग गैंगरेप में कमल रावत की तरफ घूमी पुलिस की जांच, बदले की भावना और षड्यंत्र की बू appeared first on Round The Watch.
कमल रावत की भूमिका पर सवाल: उत्तराखंड के नाबालिग गैंगरेप केस में जांच का नया मोड़
राजकुमार धीमान, देहरादून: उत्तराखंड के चंपावत में हुई नाबालिग सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस जांच ने एक नया मोड़ लिया है। पुलिस मुख्यालय की हालिया प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि प्रारंभिक जांच के दौरान यह प्रतीत होता है कि घटनाक्रम एक सुनियोजित षड्यंत्र और बदले की भावना से प्रेरित है। इस मामले में कमल रावत का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया है, जो घटना वाले दिन पीड़िता के साथ निरंतर संपर्क में था।
कम शब्दों में कहें तो, यह प्रकरण न केवल जघन्य अपराध का मामला है, बल्कि इसने जांच के दौरान नए प्रश्न भी खड़े किए हैं। क्या यह मीडिया के लिए एक बड़ी कहानी है या इसकी तह में कुछ और जटिलता है? यह सवाल अब काफी चर्चा का विषय बन गया है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari
बदले की भावना और नया मोड़
6 मई 2026 को पीड़िता के पिता द्वारा दायर एक आधिकारिक शिकायत में दावा किया गया था कि 5 मई की रात उनकी 16 वर्षीय बेटी के साथ तीन व्यक्तियों ने दुष्कर्म किया। इस शिकायत के तुरंत बाद, उत्तराखंड पुलिस ने POCSO अधिनियम के तहत चंपावत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया।
एसआईटी की स्थापना और जांच प्रक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक चंपावत, रेखा यादव ने तुरंत एक 10 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। यह टीम क्षेत्राधिकारी चंपावत की निगरानी में कार्य कर रही है। एसपी ने स्वयं घटनास्थल पर जाकर पीड़िता और स्थानीय लोगों से बातचीत की। इसके अलावा, पुलिस टीम ने अनुसंधान के लिए आवश्यक साक्ष्य को सुरक्षित कर लिया था और क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की फील्ड यूनिट को भी बुलाया गया।
वैज्ञानिक जांच और सुरक्षा प्रबंध
राज्य की अनुसंधान प्रगति के साथ, पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया और बाल कल्याण समिति के समक्ष काउंसलिंग भी की गई। कानून की नजर में पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, जिला प्रशासन से एक मजिस्ट्रेट नियुक्त करने का भी अनुरोध किया गया।
जांच में स्थिति स्पष्ट करने वाले तथ्य
जांच के दौरान कुछ ऐसे महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आए हैं, जो पहले लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाते हैं। पीड़िता अपने दोस्त के साथ एक शादी समारोह में गई थी, जहां उसकी गतिविधियों की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के माध्यम से की गई। पुलिस की रिपोर्ट में चिकित्सीय परीक्षा से कोई बाहरी या आंतरिक चोट का सबूत नहीं मिला है।
विरोधाभासी गवाहियां और तथ्य
पुलिस जांच में कुछ गवाहों के बयान तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल नहीं खाते, जिससे मामले की सच्चाई पर संदेह उत्पन्न हुआ है। विशेष रूप से, कमल रावत के संदर्भ में, उसकी घटनास्थल पर स्थिति और पीड़िता के साथ लगातार बातचीत से कई नए सवाल उठ रहे हैं।
कमल रावत की भूमिका
कमल रावत को पुलिस ने संदिग्ध माना है क्योंकि उसकी पीड़िता और उसकी महिला मित्र के साथ बार-बार बातचीत हुई थी। जांच में यह तथ्य महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि क्या कमल रावत की कोई भूमिका इसमें शामिल है या यह सब बदले की भावना से किया गया एक षड्यंत्र है।
आरोपियों की अनुपस्थिति
पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपित किए गए तीन व्यक्तियों की घटनास्थल पर मौजूदगी नहीं पाई गई, जिससे उनकी संलिप्तता पर सवाल उठता है। यह पुलिस का दावा है कि गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि नामजद आरोपी घटना के समय वहां नहीं थे।
कानूनी प्रक्रिया और सामुदायिक सुरक्षा
पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि यदि जांच过程中 किसी व्यक्ति द्वारा भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करने का पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, मीडिया और जनता से अपील की गई है कि मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए केवल सत्यापित तथ्यों का ही प्रकाशन और प्रसारण करें।
निष्कर्ष: इस प्रकरण में जांच की दिशा परिवर्तन और कमल रावत की भूमिका ने मामले के जटिलता को और बढ़ा दिया है। ऐसे गंभीर मामलों में न्याय हासिल करना बेहद महत्वपूर्ण है, और यह संदेश स्पष्ट होना चाहिए कि महिला और बाल अपराधों के प्रति उत्तराखंड पुलिस की “Zero Tolerance” नीति है।
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टीम नेटा नगरी
सर्वेश्वरी देवी
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