स्व. कौशल्या डबराल की पुण्यतिथि: शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
देहरादून मंगलवार को उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच द्वारा कचहरी परिसर स्थित शहीद स्मारक में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रही स्व.कौशल्या डबराल की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि…
स्व. कौशल्या डबराल की पुण्यतिथि: शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में मंगलवार को उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच द्वारा शहीद स्मारक में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी स्व. कौशल्या डबराल की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर कई प्रमुख व्यक्तियों ने कौशल्या डबराल की साहसिकता और उनके योगदान को याद किया।
यह कार्यक्रम कचहरी परिसर स्थित शहीद स्मारक में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी राजेश्वरी परमार ने की और संचालन संयोजक पूरण सिंह लिंगवाल ने किया। सभा में उपस्थित वक्ताओं ने कौशल्या डबराल के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि वह पृथक राज्य के आंदोलन में एक महत्वपूर्ण स्तंभ थीं।
कौशल्या डबराल का योगदान
सभा में जगमोहन सिंह नेगी, रविन्द्र जुगरान, और केशव उनियाल ने अत्यंत भावुक शब्दों में कौशल्या डबराल को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि कौशल्या डबराल एवं सुशीला बलूनी ने मिलकर राज्य की मांग को लेकर महत्वपूर्ण संघर्ष किया। वे न केवल एक सक्रिय समाज सेविका थीं, बल्कि सभी को संगठित करने में अद्वितीय क्षमता रखती थीं।
दौरान संघर्ष, डबराल जी एमकेपी चौक पर स्थित गन्ना समिति के कार्यालय में पुलिस की लाठीचार्ज का शिकार हुईं। इस दौरान कई अन्य सहकर्मी भी घायल हुए। उनके अदम्य साहस ने उन्हें एक नेतृत्वकारी भूमिका में स्थापित किया।
मोरचों की कमजोरी और संघर्ष के प्रति आक्रोश
सभा में प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती और सरिता गौड़ के साथ गणेश डंगवाल ने भी कौशल्या डबराल के समर्पण की चर्चा की। उन्होंने बताया कि आंदोलनकारी मंच ने पहले की मेयर विनोद चमोली के कार्यकाल में गन्ना समिति के कार्यालय के सामने उनका स्मारक स्थापित करने की मांग की थी, लेकिन वर्तमान सड़कों के चौड़ीकरण के कारण स्मारक का स्थान बदल दिया गया है, जिससे आंदोलनकारियों में आक्रोश है।
उन्होंने मांग की कि निगम के मेयर व आयुक्त पहले की घोषणाओं और स्मारकों का पुनः अवलोकन कर उन्हें पुनर्स्थापित करें। यह न केवल उनके प्रति सम्मान है, बल्कि अगली पीढ़ी को प्रेरित करने का भी एक माध्यम है।
नई मंडली की नियुक्ति
सुलोचना भट्ट, कलम सिंह गुसांई और पूरण सिंह लिंगवाल के नेतृत्व में यह तय किया गया कि स्व. कौशल्या डबराल ने उषा नेगी और आशा बहुगुणा को राजनीतिक मंच पर लाने में अहम भूमिका निभाई। इसके परिणामस्वरूप, आशा और उषा ने संसद भवन में पृथक उत्तराखंड की मांग के समर्थन में पर्चे फेंके थे।
कार्यक्रम में सर्वसम्मति से अंततः कौशल्या डबराल वाहिनी का मुख्य संयोजक राजेश्वरी परमार को नियुक्त किया गया। यह कदम उनके योगदान को आगे बढ़ाने और नए आंदोलनकारियों को प्रेरित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
भावुक श्रद्धांजलि
इस सभा में केशव उनियाल, रवींद्र जुगरान, जगमोहन सिंह नेगी, प्रदीप कुकरेती, पूरण सिंह लिंगवाल और अन्य कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कौशल्या डबराल की साहसिकता और उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है। आज की सभा में उपस्थित सभी लोगों ने उनके प्रति सम्मान प्रकट किया और यह निश्चित किया कि उनके संघर्ष के आदर्शों को हमेशा जीवित रखा जाएगा।
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Sign off: Team Netaa Nagari - प्रियंका शर्मा
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