इंटक स्थापना दिवस पर श्रमिकों की आवाज, सरकार की नीतियों पर उठे सवाल
देहरादून 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजी हुकूमत से भारत की आजादी समारोह आयोजन से पूर्व ही पूज्य बापू महात्मा गांधी जवाहरलाल नेहरू सरदार पटेल डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सहित अनेक स्वतंत्रता…
इंटक स्थापना दिवस पर श्रमिकों की आवाज, सरकार की नीतियों पर उठे सवाल
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से आए प्रतिनिधियों ने इंटक स्थापना दिवस के कार्यक्रम में सरकार की श्रम विरोधी नीतियों पर चिंता जताई।
देहरादून: 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजी हुकूमत से भारत की आजादी से पहले, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों ने श्रमिक वर्ग के हितों की सुरक्षा के लिए 3 मई 1947 को राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) की स्थापना की थी, जिसके पहले अध्यक्ष स्व. गुलजारी लाल नंदा थे। इसका उद्देश्य था श्रमिकों को आज़ादी के आंदोलन में शामिल करना।
कार्यक्रम का उद्देश्य
इंटक स्थापना दिवस के अवसर पर, 3 मई को कांग्रेस भवन, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश इंटक अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट ने की। विभिन्न जनपदों से आए प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने भारत सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के चलते श्रमिकों के बढ़ते शोषण पर गहरी चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही, उत्तराखंड प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं दिए जाने पर भी आवाज उठाई गई।
सरकारी नीतियों पर सवाल
स्थापना दिवस के इस समारोह में, नैनीताल उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद उपनल के कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति पर वक्ताओं ने चिंता जताई। इंटक अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट ने प्रदेश सरकार की गरीब, मजदूर, किसान, युवा और महिला विरोधी नीतियों पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में लगभग 60,000 पद रिक्त हैं और इनकी भरपाई नहीं की जा रही है, जिससे युवाओं में आक्रोश उत्पन्न हो रहा है।
नौकरी और श्रम कानून
एपी अमोली, इंटक के महामंत्री ने दावा किया कि श्रमिकों को 8 घंटे से अधिक काम कराए जाने और ओवरटाइम का भुगतान न किए जाने की स्थिति चिंताजनक है। साप्ताहिक अवकाश का कोई ठोस प्रावधान नहीं है, और महिला कामकाजी कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवाई जा रही हैं।
भविष्य की दिशा
हीरा सिंह बिष्ट ने आगे कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से अपेक्षा की कि वह अपने नीति निर्णयों में सुधार लाए और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करे। उन्होंने यह भी कहा कि पेपर लीक के मामले सरकारी नीतियों के प्रति बढ़ती असंतोष का परिणाम हैं।
इस अवसर पर कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे, जिनमें वीरेंद्र नेगी, अनिल कुमार, विक्टर थॉमस, और अन्य शामिल थे। इस कार्यक्रम ने स्पष्ट रूप से दिखाया कि श्रमिक वर्ग अपने हक की मांग के लिए एकजुट हो रहा है।
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सादर,
टीम नेटा नगरी
रीमा शर्मा
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