गौला नदी में खनन लक्ष्य बढ़ा, 2025-26 तक जारी रहेगा प्रस्तावित खनन

गौला और शारदा नदियों में उपखनिज निकासी को मिली अनुमतिदेहरादून, 6 मई। उत्तराखंड शासन ने नैनीताल जनपद की गौला नदी और चम्पावत जनपद की शारदा नदी में स्वीकृत खनन लॉट में उपलब्ध उपखनिज की वास्तविक मात्रा के आकलन के बाद शेष खनन सत्र 2025-26 के लिए निकासी की अनुमति प्रदान कर दी है।अपर सचिव लक्ष्मण […] Source

May 7, 2026 - 00:37
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गौला नदी में खनन लक्ष्य बढ़ा, 2025-26 तक जारी रहेगा प्रस्तावित खनन
गौला नदी में खनन लक्ष्य बढ़ा, 2025-26 तक जारी रहेगा प्रस्तावित खनन

गौला नदी में खनन लक्ष्य बढ़ा, 2025-26 तक जारी रहेगा प्रस्तावित खनन

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड शासन ने गौला और शारदा नदियों में उपखनिजों के खनन की अनुमति दे दी है, जिससे अगले खनन सत्र 2025-26 तक का कार्य जारी रहेगा।

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खनन गतिविधियों में नया अध्याय

देहरादून, 6 मई। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में स्थित गौला नदी और चम्पावत जनपद की शारदा नदी में उपखनिज निकासी के लिए सरकार ने नई अनुमति प्रदान की है। इस फैसले के बाद, इन नदियों में स्वीकृत खनन लॉट में उपखनिज की वास्तविक मात्रा का आकलन किया गया और शेष खनन सत्र 2025-26 के लिए भी निकासी की अनुमति मिली है।

सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय

उत्तराखंड के अपर सचिव लक्ष्मण ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम राज्य के आर्थिक विकास में योगदान करेगा। खनन से संबंधित गतिविधियों का विस्तार, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने में मददगार साबित होगा।

खनन का आर्थिक प्रभाव

इस निर्णय के परिणाम स्वरूप क्षेत्र के विकास में तेजी संवर्धित होने की उम्मीद है। खनन क्षेत्र में सुधार से संबंधित पहलुओं का अध्ययन करते हुए, यह देखा गया है कि उपखनिज की निकासी से ना केवल राज्य की आर्थिकी में सुधार होगा, बल्कि इससे स्थानीय निवासियों को भी लाभ मिलेगा। ऐसा होने पर युवा पीढ़ी के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

पर्यावरणीय चिंताएँ और समाधान

हालांकि, खनन गतिविधियां पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। इस मुद्दे को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने यह सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए हैं कि खनन के दौरान पर्यावरण संरक्षण के मानदंडों का पालन किया जाए। साथ ही, स्थानीय समुदायों की राय को भी महत्व दिया जाएगा।

स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रियाएँ

स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि खनन गतिविधियों को सही तरीके से प्रबंधित किया जाए, तो इससे उन्हें अनेक फायदे पहुंचेंगे। उनके अनुसार, रोजगार के अवसर भले ही बढ़ेंगे, लेकिन पर्यावरण और सामाजिक संतुलन को बनाए रखना भी आवश्यक है।

अंत में

उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय न केवल विकास की नई राह खोलने वाला है, बल्कि यह स्थायी विकास की दिशा में भी एक कदम है। प्रदेश में खनन की गतिविधियों के विस्तार से आने वाले वर्षों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को और भी मज़बूती मिलेगी। इसके आलावा, सभी मांगों और चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना आवश्यक होगा।

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टीम Netaa Nagari
सीमा शर्मा

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