उत्तराखंड के चिकित्सकों का 15 दिन का अल्टीमेटम, 11 मांगों पर जताई गहरी चिंता
Rajkumar Dhiman, Dehradun: प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखंड ने चिकित्सकों की लंबित मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन के भीतर मांगों का समाधान नहीं किया गया तो चिकित्सक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। संघ के अध्यक्ष डॉ. रमेश कुंवर … The post उत्तराखंड के डॉक्टरों ने दिया 15 दिन का अल्टीमेटम, 11 मांगों पर भरी हुंकार appeared first on Round The Watch.
उत्तराखंड के चिकित्सकों का 15 दिन का अल्टीमेटम, 11 मांगों पर जताई गहरी चिंता
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ ने स्वास्थ्य मंत्री से 11 लंबित मांगों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। यदि 15 दिन के भीतर मांगे पूरी नहीं हुई, तो आंदोलन का ऐलान किया जाएगा।
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राजकुमार धीमान, देहरादून: उत्तराखंड में चिकित्सकों की स्थिति अब चिंताजनक होती जा रही है। प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखंड ने अपने चिकित्सकों की लंबित मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री से तत्काल कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। संघ ने बताया है कि यदि 15 दिन के भीतर मांगों का उचित समाधान नहीं हुआ, तो चिकित्सकों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। संघ के अध्यक्ष डॉ. रमेश कुंवर और महासचिव डॉ. यशपाल सिंह तोमर ने स्वास्थ्य मंत्री को एक पत्र लिखकर 11 महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं।
चिकित्सकों की परेशानियों का जिक्र
इस पत्र के माध्यम से संघ ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया है। चिकित्सकों द्वारा बताया गया है कि स्थानांतरण के आदेशों में बदलावों के कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि बीमार चिकित्सकों को पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानांतरित न किया जाए और युगल दंपत्ति चिकित्सकों को अलग-अलग स्थानों पर भेजने से रोका जाए।
एसडीएसीपी का लाभ देने की मांग
संघ ने SDACP (Special Dynamic Assured Career Progression) का लाभ देने की मांग की है। यह लाभ चिकित्सकों को हर वर्ष दो बार मिलने वाली अनिवार्य सेवा अवधि पूरी करने के बाद दिया जाना था, लेकिन अभी तक वह लाभ नहीं मिल पाया है। संघ ने इस लंबित प्रक्रिया को पूरा करने और पूर्व में छूटे लाभ को भी देने की मांग की है।
डीपीसी का मुद्दा
संघ ने रिक्त पदों के सापेक्ष हर वर्ष डीपीसी (डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी) कराने की मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि विभाग में वर्षों से रिक्त पदों के बावजूद डीपीसी नहीं हो रही है। इसके साथ ही, लंबित डीपीसी को तत्काल संपन्न कराने और उचित कार्यवाही की मांग की गई है।
दुर्गम क्षेत्रों का मामला
अल्मोड़ा, टिहरी, नैनीताल और मसूरी जैसे चार जिलों को दुर्गम घोषित करने की मांग भी उठाई गई है। संघ के अनुसार, यह क्षेत्र पूर्व में दुर्गम थे, और इसलिए इन्हें स्थानांतरण और अन्य लाभों के लिए फिर दुर्गम घोषित किया जाना चाहिए।
जिला चिकित्सालय स्थानांतरण का विरोध
संघ ने जिला चिकित्सालयों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने के फैसले का भी कड़ा विरोध किया है। संघ का कहना है कि चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के बीच प्रशासनिक संपर्क में कठिनाई उत्पन्न होगी, अगर जिला चिकित्सालय के मुख्यालय को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाता है।
सुरक्षा और आवास की मांगें
संघ ने सभी स्थानीय और राजकीय चिकित्सालयों में पुलिस चौकी स्थापित करने की मांगी है। इसके साथ ही, चिकित्सकों के लिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, संयुक्त चिकित्सालयों और जिला चिकित्सालयों में आवास निर्माण की मांग भी की गई है। आवासीय परिसर की कमी के कारण चिकित्सकों को आकस्मिक सेवाओं में उपलब्ध होने में कठिनाई होती है।
अन्य महत्वपूर्ण मांगें
इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड के चिकित्सा कॉलेजों में पीजी सीटों का आरक्षण, सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर कार्यरत चिकित्सकों की पर्वतीय क्षेत्रों में तैनाती, और स्नातकोत्तर के बाद दंत रोग विशेषज्ञों को पीजी भत्ता देने की मांग भी संघ ने उठाई है।
संघ की चेतावनी
संघ ने कहा है कि पूर्व में भी इन मांगों के संबंध में पत्र भेजा गया है और अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है जिससे चिकित्सकों में रोष उत्पन्न हो गया है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिन के भीतर मांगें पूरी नहीं की जातीं, तो वे आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।
ज्ञापन भेजने वालों में संरक्षक डॉ. सुनीता टम्टा, संयोजक डॉ. नरेश सिंह नपलच्याल और अन्य महत्वपूर्ण सदस्य शामिल हैं। यदि आप इस मुद्दे पर और अधिक जानकारी चाहते हैं, तो यहाँ क्लिक करें।
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