सालम क्रांति दिवस: 1942 के वीर संग्रामी को राइंका ढेला में श्रद्धांजलि

सालम क्रांति दिवस पर सालम के संग्रामियों को किया याद…1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 25 अगस्त को अल्मोड़ा जिले के सालम जैंती इलाके में हुए विद्रोह के संग्रामियों…

Aug 25, 2026 - 18:37
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सालम क्रांति दिवस: 1942 के वीर संग्रामी को राइंका ढेला में श्रद्धांजलि
सालम क्रांति दिवस: 1942 के वीर संग्रामी को राइंका ढेला में श्रद्धांजलि

सालम क्रांति दिवस: 1942 के वीर संग्रामी को राइंका ढेला में श्रद्धांजलि

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कम शब्दों में कहें तो, सालम क्रांति दिवस पर सालम के संग्रामियों को श्रद्धांजलि देने के लिए राइंका ढेला में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

सालम क्रांति का महत्व

हर वर्ष 25 अगस्त को, अल्मोड़ा जिले के सालम जैंती इलाके में हुए विद्रोह को याद किया जाता है, जो भारत छोड़ो आंदोलन का अभिन्न हिस्सा था। 1942 में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए, यहां के वीर जांबाजों ने अपने وطن की आज़ादी के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया। इस दिन को 'सालम क्रांति दिवस' के रूप में मनाना, उन शहीदों की स्मृति को जीवित रखने का एक प्रयास है जिन्होंने हमें आज़ादी दिलाने के लिए कठिनाइयों का सामना किया।

राजकीय इंटर कालेज ढेला में कार्यक्रम

आज, राजकीय इंटर कालेज ढेला में सालम क्रांति दिवस के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां विधानसभा में प्रमुख विचार रखे गए। इस अवसर पर बच्चों की टीम ने सालम के संग्रामी प्रताप बोरा द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध गीत "उठो, हिटो ददा भूलियो क" का गायन किया। इस गायन ने वहाँ उपस्थित लोगों में क्रांतिकारी भावना को फिर से जीवित कर दिया।

शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि

इस कार्यक्रम में मानसी, रोशनी, भावना, खुशी, प्रिंस, जतिन, और लोकेश की टीम ने विशेष रूप से उपस्थित होकर गीत प्रस्तुत किया। उनके इस प्रयास ने समारोह को और भी भव्यता प्रदान की। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने संग्रामियों की बहादुरी और बलिदान को याद करते हुए मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर उपस्थित प्रमुख लोगों ने यह सुनिश्चित किया कि नई पीढ़ी को अपने कल के लिए संघर्षरत रहने की प्रेरणा दी जाए।

नई पीढ़ी के लिए संदेश

कार्यक्रम के अंत में, स्कूल के प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें अपने इतिहास को हमेशा याद रखना चाहिए और उन शूरवीरों की वीरता से प्रेरणा लेनी चाहिए। यह युवा पीढ़ी ही है जो अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से देश का भविष्य बनाएगी।

इस दिन का महत्व केवल याद करना ही नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से हम यह भी सुनिश्चित कर सकते हैं कि स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की परंपरा और उनके संघर्ष की कहानियाँ हमेशा जीवित रहें।

वीरों की इस गौरवमयी गाथा को हम सभी को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

अधिक अपडेट्स के लिए, कृपया यहाँ क्लिक करें.

टीम नेटा नागरी
सुमन शर्मा

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