रक्षाबंधन: एकता का प्रतीक, धर्म और जाति से ऊपर भाईचारा

देहरादून/नैनीताल पुरे देश ने धूमधाम से रक्षाबंधन का पर्व मनाया। बड़े हो या छोटे सभी भाइयों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता ही है। वहीं बहने भी अपने…

Aug 29, 2026 - 09:37
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रक्षाबंधन: एकता का प्रतीक, धर्म और जाति से ऊपर भाईचारा
रक्षाबंधन: एकता का प्रतीक, धर्म और जाति से ऊपर भाईचारा

रक्षाबंधन: एकता का प्रतीक, धर्म और जाति से ऊपर भाईचारा

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कम शब्दों में कहें तो, राखी का पर्व न केवल भाई-बहन के बीच के रिश्ते को प्रगाढ़ करता है, बल्कि यह सामाजिक ताने-बाने और भाईचारे का एक महत्वपूर्ण पहलू भी पेश करता है। इस बार रक्षाबंधन पर 'संध्या शर्मा' ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिससे सभी धर्मों के बीच एकता को बढ़ावा मिलता है।

रक्षाबंधन का उल्लास

देहरादून/नैनीताल में, देशभर ने रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाया। यह त्योहार हर भाई और बहन के लिए विशेष होता है। विशेषकर छोटे या बड़े भाईयों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। बहनें पूरे जतन से अपने भाइयों के हाथ में रक्षा सूत्र बांधने के लिए तैयार होती हैं। खासकर अगर बहनें शादीशुदा हों, तो ससुराल की राखी बाँधने के बाद मायके की ओर बढ़ती हैं।

भाईचारा और धार्मिक सहिष्णुता का उदाहरण

रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर संध्या शर्मा, जो पेशे से एक एडवोकेट हैं, ने मुस्लिम भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर एक अनोखी मिसाल पेश की। उनका मानना है कि राखी का यह बंधन केवल धर्म या जाति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रेम, विश्वास और इंसानियत का प्रतीक है।

संध्या ने मुस्लिम भाइयों को राखी बांधते हुए उनके सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा, "भारत की खूबसूरती उसकी विविधता में निहित है। अलग-अलग धर्मों और समुदायों के बावजूद, हमें एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़ा होना चाहिए, यही रक्षाबंधन की सच्ची भावना है।"

समाज में एकता का संदेश

संध्या शर्मा का यह पहल न केवल राखी के धागे से एकता का संदेश देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विभिन्न धर्मों के बीच एकता और भाईचारा सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा, "धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत सबसे ऊपर है।"

संध्या ने इस अवसर पर कहा, "रक्षाबंधन एक ऐसा पर्व है जो सिर्फ एक रिश्ते को नहीं, बल्कि सभी मानवताओं को जोड़ता है। साथ ही यह संदेश देता है कि प्रेम और परस्पर सम्मान सबसे आवश्यक हैं।"

रक्षाबंधन का पर्व इस शक्ति को प्रदर्शित करता है कि कैसे एक छोटी सी परंपरा समाज में बड़े बदलाव का वाहक बन सकती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि हमारे समाज में भिन्नता को न सिर्फ सहन करना चाहिए, बल्कि इसे अपनाना भी चाहिए।

इस प्रकार, रक्षाबंधन न केवल एक पर्व है, बल्कि यह एक संजोग है जिसमें प्रेम, विश्वास और सामाजिक सौहार्द का स्वरूप प्रकट होता है।

यह पहल संध्या शर्मा द्वारा दिखाता है कि हम सब एक ही धरती पर रहते हैं, और हमें हर किसी का सम्मान करना चाहिए, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति से क्यों न हो।

इससे हमें यह सिखने को मिलता है कि जब हम एक-दूसरे की खुशी में साथ खड़े होते हैं, तो यही वास्तव में रक्षाबंधन की भावना है।

इस महोत्सव के जरिए संध्या ने सभी को एकजुट करने की प्रेरणा दी है और हमें यह समझने में मदद की है कि प्रेम और भाईचारे का रिश्ता किसी भी धर्म से बड़ा है।

Team Netaa Nagari
सुमन खन्ना

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