मोहम्मद दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, एफआईआर पर रोक और सोशल मीडिया बैन समाप्त
Rajkumar Dhiman, Dehradun: कोटद्वार के जिम संचालक मोहम्मद दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के मामले में आगे की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। मामला बजरंग दल के सदस्यों और एक मुस्लिम दुकानदार के … The post मोहम्मद दीपक पर दर्ज एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, सोशल मीडिया बैन भी हटाया appeared first on Round The Watch.
मोहम्मद दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, एफआईआर पर रोक और सोशल मीडिया बैन समाप्त
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कम शब्दों में कहें तो, कोटद्वार के जिम संचालक मोहम्मद दीपक को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा दी है।
कोटद्वार के जिम संचालक मोहम्मद दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उनकी एफआईआर के संदर्भ में आगे की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। यह मामला बजरंग दल के सदस्यों और एक मुस्लिम दुकानदार के बीच हुए विवाद से जु़ड़ा हुआ है।
एफआईआर खारिज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
दीपक कुमार ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। पहले उनकी मांग को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है, और उन्हें चार सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा है। इस पर उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि तब तक दीपक के खिलाफ कोई आगे की कार्रवाई नहीं की जाए।
सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक भी हटी
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर भी रोक लगा दी है, जिसमें दीपक कुमार को किसी भी प्रकार की सोशल मीडिया पोस्ट करने से प्रतिबंधित किया गया था। इसका मतलब है कि दीपक अब अपने सोशल मीडिया पर घटना से संबंधित संदेश, वीडियो या अन्य कंटेंट साझा कर सकते हैं।
दुकानदार की मदद करने का दावा
दीपक कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि विवाद के दौरान उनके मुवक्किल ने हस्तक्षेप करते हुए दुकान संचालक की मदद करने का प्रयास किया था। सिंघवी ने कहा कि दीपक ने घटनास्थल पर मौजूद लोगों के समक्ष अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया और स्वयं भी इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी।
दंगा संबंधी धारा पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान, सिंघवी ने वीडियो प्रमाण का हवाला देते हुए हाईकोर्ट में की गई टिप्पणियों पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि दीपक के खिलाफ दंगा करने का आरोप लगाया गया था, लेकिन इस आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। अंततः इस आरोप को हटाने का निर्णय लिया गया।
सात साल से कम सजा वाले अपराधों की धाराएँ
दीपक की ओर से अदालत में यह भी तर्क पेश किया गया कि उनके खिलाफ आरोपों में अधिकतम सजा सात साल से कम है, जो सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार बनाम बिहार सरकार मामले में तय दिशा-निर्देशों के तहत आता है। इस आधार पर, दीपक को राहत मिलनी चाहिए।
सोशल मीडिया प्रतिबंध को अत्यधिक बताया गया
सिंघवी ने हाईकोर्ट के सोशल मीडिया प्रतिबंध पर भी सवाल उठाया, यह कहते हुए कि इसने दीपक के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
आगे की सुनवाई का विवरण
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दोनों पहलुओं पर अंतरिम राहत दी है। FIR से संबंधित आगे की कार्रवाई पर रोक तथा सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक हटाई गई है। प्रतिवादियों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करना होगा, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।
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सुनवाई की इस अद्भुत घटनाक्रम के बाद, मोहम्मद दीपक के लिए यह राहत उन्हें न्याय पाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम जैसा प्रतीत होता है।
टीम नेटaa नागरी - साक्षी शर्मा
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