मुख्यमंत्री धामी का माणा गांव दौरा: आत्मनिर्भरता का आदर्श मॉडल
के एस असवाल गौचर चमोली :विकास कार्यों का लिया जायजा ,शत-प्रतिशत “लखपति दीदी” गांव माणा बना आत्मनिर्भरता का मॉडल चारधाम
मुख्यमंत्री धामी का माणा गांव दौरा: आत्मनिर्भरता का आदर्श मॉडल
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा का दौरा किया और यहां की विकास गतिविधियों का जायजा लिया। गांव माणा ने 'लखपति दीदी' कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत सफलता अर्जित की है, जिससे यह आत्मनिर्भरता का एक बेहतरीन मॉडल बन गया है।
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माणा गांव, विकासखण्ड ज्योतिर्मठ, जनपद चमोली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री धामी ने बुधवार को यहां जनसंवाद करते हुए कहा कि यह गांव न केवल प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण है, बल्कि यहां की लोकसंस्कृति भी अनमोल है। उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि वे स्थानीय उत्पादों का समर्थन करें।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, "हमारी सरकार चारधाम यात्रा को सुरक्षित, स्वच्छ और प्लास्टिक-मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत सभी से अपील की जाती है कि वे पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।" उन्होंने कहा कि माणा गांव में महिलाओं द्वारा उत्पादित स्थानीय सामान की गुणवत्ता प्रशंसा के योग्य है।
मुख्यमंत्री धामी का स्वागत माणा की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत गाकर किया, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करता है। धामी ने इस उत्साह के लिए महिलाओं को धन्यवाद दिया और उनकी मेहनत की सराहना की।
लखपति दीदी योजना: महिलाओं की उद्यमिता का मॉडल
माणा गांव ने 'लखपति दीदी' कार्यक्रम के तहत अद्वितीय उपलब्धि हासिल की है; गांव की सभी 82 महिलाएं इस कार्यक्रम की लाभार्थी बनकर अपने-अपने क्षेत्रों में सफल लखपति दीदी बन गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, "इन महिलाओं की मेहनत से न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण का एक नया अध्याय भी जुड़ा है।" उन्होंने कहा कि यह योजना न सिर्फ महिलाओं को शक्ति देती है, बल्कि पूरे समुदाय की अर्थव्यवस्था को सशक्त करती है।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का लक्ष्य सीमांत गांवों का विकास है। उन्होंने कहा, "भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का प्रशासन सीमांत गांवों को विकास की धारा में लाने के लिए स्पष्ट दिशा में कार्य कर रहा है।" धामी ने बताया कि माणा गांव आने वाले समय में 'प्रथम गांव' के रूप में विकसित हो रहा है।
कृषि और उद्योग में विकास
ग्राम पंचायत माणा में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पारंपरिक और गैर-कृषि कामों का विकास भी देखने को मिल रहा है। गांव की महिलाएं ऊनी वस्त्र, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, फर्नीचर, और खाद्य प्रसंस्करण जैसे विविध व्यवसायों से जुड़ी हैं।
कम्युनिटी में योगदान देने के लिए स्थानीय उत्पादों को बाजार में भी लाया जा रहा है। यह सब प्रयास महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिलाएं अब विभिन्न स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आजीविका का बेहतर प्रबंधन कर रही हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने उदाहरण देते हुए कहा, "माणा गांव आज महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन प्रमाण है, जहां सरकारी योजनाओं और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत ने एक नई सोच को जन्म दिया है।"
विकास कार्यों का तेज़ी से विस्तार
धामी ने 'वाइब्रेंट विलेज योजना' के तहत उत्तराखंड के सीमांत गांवों में हो रहे विकास कार्यों की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह योजना सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, रोजगार सृजन, पर्यटन के विकास, और आजीविका के नए अवसर पैदा करने के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के सामूहिक प्रयासों से सीमांत गांव पूरी नई ऊंचाइयों को छू लेंगे। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
अंत में, मुख्यमंत्री धामी ने स्थानीय लोगों को उनके समुदाय की संस्कृति को बनाए रखने और विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने माणा के लोगों से अपील की कि वे अपनी कलाओं, उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा दें ताकि इसे आने वाली पीढि़यों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
इस प्रकार, माणा गांव ने न केवल आत्मनिर्भरता का मॉडल प्रस्तुत किया है, बल्कि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी एक नई उचाईयों को छूने का प्रयास किया है। यह एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे सरकारी योजनाएं और स्थानीय लोगों का समर्पण एक सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
Team Netaa Nagari, प्रियंका शर्मा
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