भाजपा ने किया राम माधव को उत्तराखंड का प्रभारी नियुक्त, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में बड़ा बदलाव

दुष्यंत गौतम और रेखा वर्मा की जगह नई टीम, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने बदली संगठनात्मक जिम्मेदारी देहरादून।

Sep 24, 2026 - 00:37
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भाजपा ने किया राम माधव को उत्तराखंड का प्रभारी नियुक्त, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में बड़ा बदलाव
भाजपा ने किया राम माधव को उत्तराखंड का प्रभारी नियुक्त, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में बड़ा बदलाव

भाजपा ने किया राम माधव को उत्तराखंड का प्रभारी नियुक्त, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में बड़ा बदलाव

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कम शब्दों में कहें तो, भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा निर्णय लिया है, जिसमें राम माधव को उत्तराखंड का प्रदेश प्रभारी बनाया गया है।

देहरादून। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठनात्मक ढांचे में प्रमुख फेरबदल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने हाल ही में उत्तराखंड के लिए नई टीम की नियुक्तियों की घोषणा की है। इन नियुक्तियों में राम माधव को प्रदेश प्रभारी और अरविंद मेनन एवं बांसुरी स्वराज को सह-प्रभारी की जिम्मेदारियां मिली हैं।

भाजपा हाईकमान

इस प्रकार, दुष्यंत गौतम और रेखा वर्मा की जगह अब नई टीम जिम्मेदारी संभालेगी। यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसे आगामी चुनावों की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

2027 के चुनाव से पहले की महत्वपूर्ण बदलाब

भाजपा ने उन राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव किया है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उत्तराखंड भी इनमें शामिल है। राम माधव को अब केवल उत्तराखंड का ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु का भी प्रभारी बना दिया गया है।

भाजपा कार्यकर्ता

हालांकि, पार्टी ने इन नियुक्तियों के पीछे कोई स्पष्ट कारण अभी तक नहीं दिया है। यह संगठनात्मक फेरबदल ऐसे समय में हो रहा है जब भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सक्रिय है।

दुष्यंत गौतम के कार्यकाल पर उठे राजनीतिक सवाल

दुष्यंत गौतम उत्तराखंड भाजपा के लंबे समय तक प्रभारी रहे हैं। उनका कार्यकाल कई राजनीतिक विवादों के कारण चर्चा में रहा। हाल ही में उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी संदर्भ को लेकर विपक्षी दलों ने उन पर कई सवाल उठाए थे। राजनीतिक आरोपों को गंभीरता से लेते हुए यह आवश्यक है कि संसद पहले किसी निर्णायक जांच का नतीजा निकले।

इसके अलावा, उर्मिला सनावर और भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर के बीच कथित मोबाइल बातचीत के कारण भी राजनीतिक विवाद उत्पन्न हुए थे। इन मामलों में कई नेताओं की ओर से बयान भी आए हैं।

हल्द्वानी दौरे से उत्पन्न विवाद

बीते सप्ताह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के हल्द्वानी दौरे के दौरान दुष्यंत गौतम की उपस्थिति को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए थे। आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी करते हुए इस विषय पर भाजपा नेताओं के बीच चर्चा शुरू हो गई है।

राम माधव का उत्तराखंड की चुनौतियों का सामना

राम माधव के सामने अब उत्तराखंड में संगठन को सुव्यवस्थित करने की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें साथ में अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज जैसे सह-प्रभारियों का साथ मिलेगा। उनके कंधों पर यह जिम्मेदारी है कि वे संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों का सफल प्रबंधन करें।

भाजपा का संगठनात्मक फेरबदल

यह केवल उत्तराखंड तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भाजपा ने देशभर के 36 राज्यों में संगठनात्मक फेरबदल किया है। नए प्रभारी एवं सह-प्रभारी की नियुक्ति के जरिए भाजपा अपने संगठन को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

यह बदलाव भाजपा के लिए चुनावी रणनीतियों को सफलता की दिशा में अग्रसर करने का अवसर प्रदान करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राम माधव और उनकी टीम इस चुनौती का सामना कैसे करती है और उत्तराखंड में भाजपा के राजनीतिक परिदृश्य में क्या बदलाव लाती है।

भाजपा समर्पण

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