उत्तराखंड में 1320 मेगावाट बिजली खरीद पर प्रमुख सचिव ऊर्जा का स्पष्टीकरण: नियमों का पालन हो रहा है

कांग्रेस के सवालों पर डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने दी सफाई, अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर होगा देहरादून।

Sep 19, 2026 - 09:37
 119  501.8k
उत्तराखंड में 1320 मेगावाट बिजली खरीद पर प्रमुख सचिव ऊर्जा का स्पष्टीकरण: नियमों का पालन हो रहा है
उत्तराखंड में 1320 मेगावाट बिजली खरीद पर प्रमुख सचिव ऊर्जा का स्पष्टीकरण: नियमों का पालन हो रहा है

उत्तराखंड में 1320 मेगावाट बिजली खरीद पर प्रमुख सचिव ऊर्जा का स्पष्टीकरण

कम शब्दों में कहें तो, कांग्रेस के सवालों पर डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने दी सफाई, अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर होगा।

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari

देहरादून। उत्तराखंड में 1320 मेगावाट थर्मल पावर की खरीदी को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा उठाए गए सवालों के बीच प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने प्रक्रिया की पारदर्शिता का स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली खरीद की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों, तकनीकी आवश्यकताओं, और प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया जा रहा है, और यह सब कुछ उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) की स्वीकृति के अंतर्गत हो रहा है।

डॉ. सुंदरम ने बताया कि बिजली खरीद का मुख्य उद्देश्य किसी एक कंपनी को लाभ पहुँचाना नहीं, बल्कि राज्य के बढ़ते बिजली की आवश्यकता को सुनिश्चित करना है।

पांच कंपनियों ने RFQ चरण में किया प्रवेश

उन्होंने यह भी कहा कि यह कहना गलत होगा कि बिजली खरीद का कार्य केवल एक कंपनी को बिना प्रतिस्पर्धा के दिया जा रहा है। Request for Quotation (RFQ) चरण में 5 कंपनियों को योग्य पाया गया है, और आगे Request for Proposal (RFP) की प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बरकरार है। चयन का अंतिम निर्णय प्रतिस्पर्धी बोली में प्राप्त कुल टैरिफ के आधार पर होगा।

उन्होंने बताया कि 1320 मेगावाट की योजना राज्य की दीर्घकालिक बेस-लोड जरूरत को ध्यान में रखकर बनाई गई है ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और विश्वसनीय बिजली अपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

संयंत्र की स्थापना के लिए लचीलापन

डॉ. सुंदरम ने उल्लेख किया कि उत्तराखंड पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील एवं पर्यटन तथा तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। थर्मल पावर प्लांट के लिए बड़े पैमाने पर कोयले की आवश्यकता होती है, और लंबी दूरी से कोयला लाने की स्थिति में परिवहन लागत में वृद्धि हो सकती है। इस वजह से निविदा में संयंत्र को देश में किसी भी उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने का विकल्प रखा गया है।

हालांकि, यदि किसी कंपनी ने उत्तराखंड में संयंत्र लगाने का निर्णय लिया और वह प्रतिस्पर्धी दर पर बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम है, तो वह भी प्रक्रिया में भाग ले सकती है।

ट्रांसमिशन लागत का प्रभाव

डॉ. सुंदरम ने यह स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर बिजली का उत्पादन किया जाएगा, वहां से उत्तराखंड तक बिजली पहुँचाने की सभी आवश्यकताओं और लागत का निर्धारण निविदा एवं टैरिफ की शर्तों के अनुसार होगा। इसलिए केवल दूसरी जगह संयंत्र स्थापित होने के कारण अतिरिक्त खर्च का भार उत्तराखंड के उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। वास्तविक प्रभाव का आकलन कुल बिजली टैरिफ के आधार पर किया जाएगा।

Fixed Charge में संशोधन

प्रमुख सचिव ने बताया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के 2019 के Model Bidding Document में Fixed Charge की सीमा 70 प्रतिशत थी। इस सीमा को बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखने का कारण है कि इससे Fuel Charge के लिए 25 प्रतिशत की गुंजाइश बनी रहेगी।

बिजली की कीमत का आकलन केवल Fixed Charge से नहीं, बल्कि Fixed Charge और Variable/Fuel Cost को मिलाकर बनने वाले कुल टैरिफ से किया जाएगा। UERC ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

निर्माण की समयसीमा

राज्य की बिजली की आवश्कता को ध्यान में रखते हुए परियोजना के निर्माण का समय भी तय किया गया है। 1320 मेगावाट उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के लिए पहली यूनिट के लिए 42 माह और दूसरी यूनिट के लिए 48 माह की समयसीमा रखी गई है।

संयुक्त उपक्रम के विकल्प पर चर्चा

खरीद किए जाने वाले 1320 मेगावाट बिजली की आवश्यकता के लिए UJVNL और THDC के संयुक्त उपक्रम के विकल्प पर भी विचार किया गया था, लेकिन यह निर्णय भी लिया गया कि उक्त उपक्रम को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा क्योंकि THDC, NTPC की सहायक कंपनी है और उसे NTPC की नीतियों का पालन करना होता है।

इसके बाद, राज्य की दीर्घकालिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्पर्धी निविदा के माध्यम से बिजली खरीद का निर्णय लिया गया।

25 वर्षों में संभावित भुगतान

डॉ. सुंदरम ने कहा कि 25 वर्षों में करीब ₹1.60 से ₹1.66 लाख करोड़ के भुगतान का उल्लेख केवल संभावित कुल भुगतान है, यह एकमुश्त नहीं है। वास्तविक भुगतान का निर्धारण अंतिम टैरिफ, बिजली आपूर्ति, प्लांट की उपलब्धता और अनुबंध की अन्य शर्तों पर निर्भर करेगा।

UERC की मंजूरी से प्रक्रिया का आगे बढ़ना

उन्होंने कहा कि निविदा प्रक्रिया के दौरान कंपनियों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का तकनीकी एवं व्यावहारिक परीक्षण किया गया। आवश्यक परिवर्तनों को UERC के समक्ष रखा गया और आयोग के विचार-विमर्श के बाद ही आगे बढ़ाया गया। ऐसा नहीं है कि 1320 मेगावाट बिजली खरीद की प्रक्रिया केवल विभागीय स्तर का निर्णय है। इसमें तकनीकी परीक्षण, प्रतिस्पर्धी बोली, और नियामकीय स्वीकृति सहित कई चरण शामिल हैं।

डॉ. सुंदरम ने इस बात पर जोर दिया कि बिजली खरीद का लक्ष्य केवल एक कंपनी को लाभ पहुँचाना नहीं, बल्कि भविष्य में उत्तराखंड की बिजली की आवश्यकता को सुरक्षित करना है। अंतिम चयन केवल प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर होगा।

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.

टीम नेटा नागरी

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow