फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे एमबीबीएस सीट प्राप्त करने वाले एलिस तोमर पर मुकदमा, फिर भी दाखिला बरकरार

Rajkumar Dhiman, Dehradun: नीट-यूजी 2025 की राज्य काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे एमबीबीएस दाखिले के मामले में बुधवार को दो बड़े अपडेट सामने आए हैं। एक ओर एमबीबीएस सीट हासिल करने वाले एलिस तोमर के खिलाफ वसंत विहार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, दूसरी ओर 03 और एमबीबीएस सीटों का आवंटन … The post फर्जीवाड़े से एमबीबीएस सीट पाने वाले एलिस तोमर पर दून में मुकदमा, फिर भी दाखिला बरकरार appeared first on Round The Watch.

Oct 1, 2026 - 00:37
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फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे एमबीबीएस सीट प्राप्त करने वाले एलिस तोमर पर मुकदमा, फिर भी दाखिला बरकरार
फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे एमबीबीएस सीट प्राप्त करने वाले एलिस तोमर पर मुकदमा, फिर भी दाखिला बरकरार

फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे एमबीबीएस सीट प्राप्त करने वाले एलिस तोमर पर मुकदमा, फिर भी दाखिला बरकरार

राजकुमार धिमन, देहरादून: नीट-यूजी 2025 की राज्य काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे एमबीबीएस दाखिलों के मामले में हाल ही में कई बड़ी घटनाएं घटित हुई हैं। बुधवार को वसंत विहार थाना में एलिस तोमर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि इसके साथ ही कुछ अन्य एमबीबीएस सीटों का आवंटन भी निरस्त कर दिया गया है। इस मामले में कुल 19 सीटें प्रभावी रूप से फर्जी या अनियमित प्रमाणपत्रों के आधार पर निरस्त की जा चुकी हैं। इसमें हरिद्वार के राजकीय मेडिकल कॉलेज की दो सीटें और श्रीनगर के राजकीय मेडिकल कॉलेज की एक सीट शामिल हैं।

कम शब्दों में कहें तो, एलिस तोमर का दाखिला अभी तक निरस्त नहीं किया गया है, जबकि इस मुकदमे के चलते देहरादून में कुल 11 आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और 05 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कुमाऊं मंडल में इस प्रकार के 30 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 07 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

दाखिले निरस्त करने की कार्रवाई में तेजी

उधर, हालिया कार्रवाई ऊधमसिंहनगर के जिलाधिकारी की सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय द्वारा की गई है। जो सीटें निरस्त की गई हैं, उनमें जुमराह अशरफ की हरिद्वार मेडिकल कॉलेज की सीट, आदित्य प्रजापति की श्रीनगर मेडिकल कॉलेज की सीट और वरुण ढेढा की हरिद्वार मेडिकल कॉलेज की सीट शामिल हैं।

विश्वविद्यालय ने बताया है कि प्रथम और द्वितीय चरण की काउंसलिंग में सीट आवंटन अभ्यर्थियों की मेरिट, पसंद, स्थायी निवास और आरक्षण के दावों के आधार पर किया गया था। जब प्रमाणपत्रों में गलतियों की शिकायतें आईं, तब दस्तावेज सत्यापन के लिए जिलों को भेजे गए। संबंधित जिलाधिकारियों की रिपोर्ट मिलने पर इन सीटों के दाखिले को निरस्त किया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने इस मुद्दे की जानकारी काउंसलिंग पोर्टल पर भी जारी करने का आश्वासन दिया है।

पुलिस और एसआइटी की जांच की विस्तृत रिपोर्ट

पुलिस द्वारा किए गए प्रारंभिक जांच के बाद, 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेंटाउन थाने में मुकदमे दर्ज किये गए। रायपुर में अपराध संख्या 380/26 और क्लेमेंटाउन में अपराध संख्या 86/26 के तहत मामला दर्ज हुआ। प्रारंभिक शिकायत प्रदीप बहुगुणा द्वारा की गई थी, जिसमें उन्होंने एलिस तोमर का मामला भी उठाया था।

एसएसपी देहरादून के निर्देश पर एसपी ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआइटी ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान कई अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में अनियमितताएं पाई गईं। एसआइटी ने शिक्षण संस्थानों से रिकॉर्ड इकट्ठा किया और दस्तावेजों की गहन जांच की। अब तक एसआइटी की कार्रवाई में रूपेश पंडित, अरविंद कुमार, धीरज कुमार श्रीवास्तव, संजय कुमार और गिरीश सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है।

ऊधमसिंहनगर में भी बढ़ रही कार्रवाई

फर्जी प्रमाणपत्रों के इस मामले में ऊधमसिंहनगर में अब तक 30 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं और कम से कम 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें बाजपुर में 5 और गदरपुर में 2 गिरफ्तारियां शामिल हैं। इस मामले में कई लोगों के फर्जी प्रमाणपत्र बने पाए गए हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो गई है।

राजस्व कर्मचारियों पर लापरवाही के आरोप

प्रमाणपत्रों के सत्यापन में लापरवाही के आरोप में चार राजस्व कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। देहरादून में जगदीश राठौर और डिंपल, जबकि ऊधमसिंहनगर में बाजपुर के राजस्व उपनिरीक्षक मोहम्मद अजमल खान और गदरपुर के राजस्व उपनिरीक्षक सरताज अली के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

विश्वविद्यालय ने अब तक प्रथम और द्वितीय चरण में 778 दाखिलों के प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए संबंधित जिलों को भेजे हैं। इसमें स्थायी निवास, जाति, ईडब्ल्यूएस, अनाथ और अन्य आरक्षण श्रेणियों से जुड़े प्रमाणपत्र शामिल हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद से फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर संबंधित दाखिले निरस्त किए जा रहे हैं। पहले 16 सीटें निरस्त होने की जानकारी मिली थी, जो वर्तमान में बढ़कर 19 हो चुकी हैं।

इस प्रकार की जांच और कार्रवाई न केवल उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन और निष्पक्षता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि वास्तविक योग्य छात्र ही अपनी पसंद के अध्ययन क्षेत्र में प्रवेश करें। हमारी सरकार को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार के फर्जीवाड़े की पुनरावृत्ति न हो सके। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari

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सादर,

टीम नेटा नगरी - दिशा शर्मा

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