प्रियंका गांधी की जेठानी के फार्म विवाद पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, एसडीएम और कोतवाल को तलब किया

Amit Bhatt, Dehradun: ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा स्थित पिपलिया मोड़ के चर्चित कुलसुम खान फार्म को लेकर चल रहे भूमि विवाद का मामला अब उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी से जुड़े इस विवाद पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने किच्छा के … The post प्रियंका गांधी की जेठानी से जुड़े फार्म हाउस विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, किच्छा के एसडीएम और कोतवाल को किया तलब appeared first on Round The Watch.

Jul 4, 2026 - 00:37
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प्रियंका गांधी की जेठानी के फार्म विवाद पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, एसडीएम और कोतवाल को तलब किया
प्रियंका गांधी की जेठानी के फार्म विवाद पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, एसडीएम और कोतवाल को तलब किया

प्रियंका गांधी की जेठानी के फार्म विवाद पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, एसडीएम और कोतवाल को तलब किया

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी से जुड़े किच्छा के विवादित फार्म हाउस के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है।

ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा क्षेत्र में पिपलिया मोड़ पर स्थित कुलसुम खान के चर्चित फार्म को लेकर चल रहे भूमि विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है, क्योंकि यह मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट के सामने आया है। पिछले कुछ समय से इस फार्म पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा है, जिसमें कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायरा और नसरीन सांगा के बीच संघर्ष है।

सुनवाई का संक्षिप्त विवरण

जस्टिस आलोक मेहरा की एकलपीठ ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किच्छा के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और संबंधित कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) को 6 जुलाई को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सिविल कोर्ट का 11 जून 2026 को पारित आदेश कड़ाई से पालन किया जाए।

भूमि विवाद के आरोप

याचिकाकर्ता सिकंदर आलम खान ने आरोप लगाया है कि प्रशासन की मिलीभगत से उनके फार्म पर जबरन कब्जा किया गया है। उन्होंने बताया कि किच्छा क्षेत्र के पिपलिया मोड़ के कुलसुम खान फार्म पर पहले से विवाद चल रहा था और सिविल कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई की।

इस संपत्ति को लेकर दो पक्ष हैं: एक ओर प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायरा है, जबकि दूसरी ओर नसरीन सांगा हैं। याचिका में बताया गया है कि यह फार्म कुलसुम खान की संपत्ति थी और उन्होंने अपने मामले को निर्धारित करने लिए एक वसीयत तैयार की थी। कुलसुम खान का निधन 18 दिसंबर 2025 को हुआ।

कानूनी प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका

याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि जब कुलसुम खान की मृत्यु की जानकारी मिली, तब नसरीन सांगा और अन्य पांच लोग फार्म पर पहुंच गए और प्रशासन के सहयोग से कब्जा कर लिया। याचिका में कहा गया है कि इस विवाद में पुरुषों को बाहर निकाल दिया गया, जबकि महिलाओं, बच्चों और बेजुबान पशुओं को फार्म के अंदर ही सीमित कर दिया गया है।

याचिका में प्रशासन की कार्रवाई को सिविल कोर्ट के आदेश की अवमानना माना गया है। इसकी वजह से हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करने की आवश्यकता बताई है। यहां यह भी बताया गया है कि कैसे प्रशासन ने याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए स्टे आदेश के बावजूद कार्रवाई की।

अगली सुनवाई और प्रशासनिक जवाबदेही

हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन से कहा है कि अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी, जहां उन्हें अपनी कार्रवाई का पूरा ब्योरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सिविल कोर्ट के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।

इस मामले की सुनवाई और प्रक्रियाओं पर गहरी नजर रखी जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संबंधित कानूनों और आदेशों का पालन किया जा रहा है।

योजना बनाते समय ध्यान दें कि यह विवाद न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन और संपत्ति के अधिकारों के संरक्षण के लिए भी एक महत्वपूर्ण मामला है।

इस मामले में होने वाली हर कार्रवाई की विस्तार से जानकारी रखी जाएगी। अधिक जानकारी के लिए हमारे पोर्टल पर जाएं।

सादर,

टीम नेटा नगरी

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