पहलगाम आतंकवादी हमले की बरसी पर के.एस. चौहान की पुस्तक ‘जब समय थम गया’ का विमोचन, मुख्यमंत्री धामी को भेंट

पुस्तक विमोचनपहलगाम में पर्यटकों पर 22 अप्रैल 2025 के बर्बर आतंकी हमले की पहली बरसी पर के.एस. चौहान की पुस्तक ‘‘पहलगाम… जब समय थम सा गया’’ जारी हुई। संयुक्त निदेशक…

Apr 22, 2026 - 18:37
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पहलगाम आतंकवादी हमले की बरसी पर के.एस. चौहान की पुस्तक ‘जब समय थम गया’ का विमोचन, मुख्यमंत्री धामी को भेंट
पहलगाम आतंकवादी हमले की बरसी पर के.एस. चौहान की पुस्तक ‘जब समय थम गया’ का विमोचन, मुख्यमंत्री धामी को भेंट

पहलगाम हमले की बरसी: के.एस. चौहान की पुस्तक ‘जब समय थम गया’ का विमोचन

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कम शब्दों में कहें तो, 22 अप्रैल 2025 को हुए बर्बर आतंकवादी हमले के एक वर्ष पूरे होने पर के.एस. चौहान की पुस्तक ‘‘पहलगाम… जब समय थम गया’’ का विमोचन किया गया। इस पुस्तक में लेखक ने अपने अनुभवों के माध्यम से उस त्रासदी को जीवित किया है, जो पहलगाम में हुई थी।

22 अप्रैल 2025 के आतंकवादी हमले की पहली बरसी

पुस्तक का विमोचन पहलगाम में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान किया गया। इस हमले ने न केवल वहां के निवासियों को बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। के.एस. चौहान, जो संयुक्त निदेशक के रूप में कार्यरत हैं, ने इस किताब में अपने अनुभवों एवं घटनास्थल पर परिवार के साथ रहते हुए जो देखा, उसे सहेजने का प्रयास किया है। तालिबानी मानसिकता और आतंकवादी गतिविधियों की पृष्ठभूमि को समझाने के लिए उन्होंने अपने विचार और घटनाओं का उल्लेख किया है।

पुस्तक में महत्वपूर्ण विशेषताएं

इस पुस्तक में हमले के समय के माहौल, प्रभावित लोगों की कहानियों और ऑपरेशन सिंदूर का विस्तृत विवरण दिया गया है। ऑपरेशन सिंदूर, जो इस आतंकवादी हमले को रोकने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया था, इसका भी जीवंत वर्णन प्रस्तुत किया गया है। यह पाठकों को उस दिन की घातकता और उसके बाद की भावनाओं का वास्तविक अनुभव कराता है।

मुख्यमंत्री धामी को पुस्तक भेंट

दौरान कार्यक्रम, के.एस. चौहान ने यह पुस्तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेंट की। सीएम धामी ने इस पुस्तक की प्रशंसा की और कहा कि यह न केवल एक व्यक्तिगत अनुभव है बल्कि यह एक सामूहिक स्मृति को भी सजाए रखने का काम करती है। इस पुस्तक के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को उस भयावह घटना से सीखने का अवसर मिलेगा।

अंतिम शब्द

इस पुस्तक के माध्यम से चौहान ने न केवल खुद को व्यक्त किया है, बल्कि उन्होंने उस भयावह क्षण को याद करने का भी मौका प्रदान किया है, जो इस क्षेत्र के लिए एक काला अध्याय बन गया। हमारे समाज को ऐसे गहन अनुभवों का सामना करना चाहिए ताकि हम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक सकें।

बदले में, यह पुस्तक न केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि आतंकवाद के खिलाफ हमारी एकजुटता कितनी महत्वपूर्ण है। इस पुस्तक को पढ़ना सभी के लिए एक अनिवार्य अनुभव होगा।

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सादर,

टीम नेटा नगरी

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