पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को फांसी की सजा, कोर्ट ने कहा-नृशंस हत्या में माफी स्वीकार नहीं
Round The Watch News: देश को झकझोर कर रख देने वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में मेरठ की अदालत ने बुधवार को पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय ने दोनों को सौरभ की नृशंस हत्या का दोषी मानते हुए कहा, ”अधर्म के … The post पति सौरभ को नीले ड्रम में दफ्न करने वाली मुस्कान को साहिल के साथ फांसी की सजा, जज बोले-नृशंस हत्या में माफी स्वीकार नहीं appeared first on Round The Watch.
पति सौरभ को नीले ड्रम में दफ्न करने वाली मुस्कान को साहिल के साथ फांसी की सजा
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कम शब्दों में कहें तो, मेरठ की अदालत ने पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाई।
देश को हिलाकर रख देने वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में मेरठ की जिला एवं सत्र न्यायालय ने बुधवार को ऐसा फैसला सुनाया, जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया। अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को दोषी मानते हुए कहा, "अधर्म के काम पर सजा देना धर्म होता है। आपके द्वारा की गई हत्या नृशंस है, जिसे बिना सजा नहीं छोड़ा जा सकता।"
सजा का विवरण और अदालत का फैसला
अदालत ने दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मृत्युदंड और धारा 238ए के तहत 50 हजार रुपये एवं 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय ने कहा, "इस मामले में किसी भी प्रकार की माफी स्वीकार नहीं होगी।" हालांकि, अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
सजा सुनाए जाने के दौरान मुस्कान और साहिल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत से जोड़ा गया था। जब फैसला सुनाया गया तो दोनों फूट-फूटकर रोने लगे। विशेष रूप से, मुस्कान ने न्यायाधीश से अपनी बच्चियों के बारे में पूछा। उसकी यह चिंता न्याय इंसाफ का एक मानवीय पहलू दर्शाती है, जिसमें उसने अपनी अगली पीढ़ी की सुरक्षा का ध्यान रखा।
हत्या की क्रूरता और वारदात का विवरण
हत्या की घटना 3 मार्च 2025 को हुई थी। अभियोजन के अनुसार, मुस्कान और साहिल ने साक्ष्य मिटाने के लिए सौरभ के शव के पांच टुकड़े किए और उन्हें नीले ड्रम में भरकर सीमेंट के घोल से ढक दिया। यह निंदनीय कृत्य न केवल कानून व्यवस्था के प्रति चुनौती है बल्कि मानवता के लिए भी एक काला धब्बा है।
इस जघन्य मामले ने देशभर में चर्चाएँ पैदा कीं। फैसला सुनने के बाद सौरभ की मां ने भावुक होकर कहा, "मुझे न्याय मिला है और अब मुझे शांति है।" इस फैसले की सराहना करते हुए अधिवक्ताओं ने भी मीठी मिठाई बांटी। अधिवक्ता कृष्ण कुमार दुबे ने इसे एक महत्वपूर्ण फैसला बताया, जिसमें अदालत ने दोषियों को उचित सजा सुनाई।
फैसले का भविष्य और न्यायिक प्रक्रिया
जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने जानकारी दी कि मामले को लगभग एक सप्ताह के अंदर उच्च न्यायालय में मृत्युदंड की पुष्टि के लिए भेजा जाएगा। यदि उच्च न्यायालय इस फैसले को स्वीकार करता है, तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है। इसके बाद दोषियों को राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने का विकल्प हो सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में 2 से 3 वर्ष लग सकते हैं।
विशिष्टता - मृत्युदंड का ऐतिहासिक महत्व
मेरठ में यदि मुस्कान को फांसी पर लटकाया जाता है, तो वह यहाँ की पहली महिला होगी जिसे मृत्युदंड दिया जाएगा। यह न केवल अदालती फैसलें का एक महत्वपूर्ण भाग है, बल्कि यह एक प्रतीक भी है कि किस प्रकार न्याय व्यवस्था समाज में सुधार ला सकती है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश का परिचय
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय का जन्म 2 जुलाई 1971 को उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में हुआ था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और लगभग 23 वर्ष के लंबे अनुभव के बाद मेरठ में तैनात हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की है और अब इसे अपनी प्रमुख उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
पुलिस और प्रशासन का योगदान
मेरठ के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने भी इस मामले में पुलिस विभाग के लोगों की सराहना की है, जिन्होंने मामले की जांच और कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि इन पुलिसकर्मियों को प्रशंसा पत्र और नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। यह इस बात का प्रमाण है कि न्याय व्यवस्था में सभी का योगदान आवश्यक है।
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साइन ऑफ: टीम नेटा नागरी, राधिका शर्मा
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