नीतीश कुमार को झटके पर झटका, JDU से तीसरा विकेट गिरा, अब इस नेता ने दिया इस्तीफा
Tabrez Siddiqui Alig Resigned: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की पार्टी को जेडीयू से जुड़े नेता झटके पर झटका दे रहे हैं. वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हो गया है. इसी बीच जेडीयू में इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ऐसा लग रहा है कि कमजोर करने की कोशिश हो रही है. भले ही इस्तीफा देने वाले छोटे स्तर के नेता हों, लेकिन वे पार्टी में किसी न किसी पद से जुड़े हुए थे. अब जेडीयू के अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव मोहम्मद तबरेज सिद्दीकी अलीग ने पार्टी से इस्तीफा दिया है. मोहम्मद तबरेज सिद्दीकी अलीग पार्टी के प्राथमिक सदस्य एवं अन्य जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है. उन्हों ने सीएम नीतीश कुमार को त्यागपत्र लिखा है. पत्र में लिखा है, "वक्फ संशोधन बिल के प्रति आपकी (नीतीश) पार्टी के समर्थन ने मेरे विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया है." पत्र की प्रतिलिपि जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को भी भेजी गई है. (यह खबर अपडेट की जा रही है)

नीतीश कुमार को झटके पर झटका, JDU से तीसरा विकेट गिरा, अब इस नेता ने दिया इस्तीफा
Netaa Nagari की टीम द्वारा
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए हाल के दिन बेहद चुनौतीपूर्ण रहे हैं। जदयू (जदयू) में बृहस्पतिवार को एक बार फिर से राजनीतिक हलचल मच गई जब पार्टी के तीसरे बड़े नेता ने इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा पार्टी में व्याप्त असंतोष और बढ़ते संकट का संकेत है। आइए जानते हैं इस घटनाक्रम के बारे में विस्तार से।
इस नेता ने दिया इस्तीफा
ताजा खबरों के मुताबिक, जदयू के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कुंदन सिंह ने पार्टी का साथ छोड़ने का निर्णय लिया है। कुंदन सिंह ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में अब निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह से कमजोर हो गई है। यह उनके लिए एक निराशाजनक अनुभव रहा है और इसलिए उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।
क्यों हो रहा है असंतोष?
जदयू में बढ़ते असंतोष के कई कारण हैं, जिसमें सबसे प्रमुख है पार्टी के अंदर नेतृत्व का संकट। पिछले कुछ महीनों में कई नेता अलग-अलग कारणों से पार्टी छोड़ चुके हैं। इससे पार्टी की एकता पर प्रश्नचिन्ह लगने लगा है। कार्यकर्ताओं में भी निराशा का माहौल देखने को मिल रहा है।
क्या है भविष्य?
नीतीश कुमार अब एक बार फिर से किसी नये रणनीति के बारे में सोच सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या वह इन चुनौतियों का सामना कर पाएंगे? इस इस्तीफे के साथ ही जदयू की राजनीतिक स्थिति और भी कमजोर हुई है, और आने वाले समय में इसके परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं।
निष्कर्ष
बिहार में जदयू नेता कुंदन सिंह का इस्तीफा पार्टी के खिलाफ चल रहे असंतोष को उजागर करता है। नीतीश कुमार को इस स्थिति को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है, ताकि वह अपनी पार्टी को संजीवनी दे सकें। भविष्य में क्या होगा, यह देखना रोचक होगा। जदयू की इस गिरावट से अन्य पार्टियों को भी लाभ मिल सकता है।
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