देहरादून का अर्बन कोऑपरेटिव बैंक: खाताधारकों का हंगामा और वित्तीय संकट

Rajkumar Dhiman, Dehradun: घपले और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से घिरे अर्बन कोऑपरेटिव बैंक देहरादून के खाताधारकों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से लगाया गया प्रतिबंध करीब सात महीने बाद भी जारी है। निकासी पर रोक के चलते हजारों खाताधारकों की जमा पूंजी बैंक में … The post सात महीने से खातों पर ताला, अर्बन कोऑपरेटिव बैंक चेयरमैन के घर पहुंचे खाताधारकों ने किया हंगामा appeared first on Round The Watch.

Sep 7, 2026 - 09:37
 102  501.8k
देहरादून का अर्बन कोऑपरेटिव बैंक: खाताधारकों का हंगामा और वित्तीय संकट
देहरादून का अर्बन कोऑपरेटिव बैंक: खाताधारकों का हंगामा और वित्तीय संकट

सात महीने तक खातों पर ताला: देहरादून के अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में हंगामा

कम शब्दों में कहें तो: देहरादून के अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के खाताधारकों ने घपले और वित्तीय अनियमितताओं के कारण अपना धैर्य खो दिया। RBI द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के चलते खाताधारकों की जमापूंजी पिछले सात महीनों से अटकी हुई है।

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून स्थित अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के खाताधारक गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। उनके खातों पर पिछले सात महीनों से ताला लगा हुआ है, जिसका मुख्य कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लगाया गया प्रतिबंध है। यह गंभीर स्थिति अब तक नहीं सुधरी है, जिससे खाताधारक काफी परेशान हैं।

खाताधारकों का हंगामा

शनिवार को, बड़ी संख्या में खाताधारक डीएल रोड पर बैंक के चेयरमैन मयंक ममगाईं के आवास के बाहर जमा हुए। वहां उन्होंने काफी हंगामा काटा, जहां उनकी मांग थी कि उन्हें उनकी जमा पूंजी वापस की जाए। प्रदर्शन के दौरान खाताधारकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई।

किसी की छह करोड़ की जमा, किसी की बच्चों की फीस का संकट
प्रदर्शन में शामिल कुछ खाताधारकों ने कहा कि उनके पास बैंक में अपनी जीवनभर की कमाई जमा है। एक खाताधारक ने जानकारी दी कि उसके करीब छह करोड़ रुपये बैंक में अटके हुए हैं। कई खाताधारकों ने स्कूल फीस जैसे दैनिक खर्चों को जुटाने में मुश्किलों का सामना करने की बात की।

बैंक प्रबंधन की लापरवाही

खाताधारकों का आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने वित्तीय अनियमितताओं को अनदेखा किया है। इन गलत फैसलों के चलते खाताधारकों को अब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन में मौजूद लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि बैंक में किस तरह से पैसा फंस गया और किसके कारण यह स्थिति बनी।

फॉरेन्सिक ऑडिट की रिपोर्ट

बैंक की वित्तीय स्थिति पर उठे सवालों के जवाब में किए गए फॉरेन्सिक ऑडिट से सामने आया है कि बैंक के कई वित्तीय रिकॉर्ड में गड़बड़ियां हैं। इस मामले में अब विभिन्न पूर्व अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा चुकी है।

मुख्य शाखा के प्रबंधक रिंकू गौतम की शिकायत पर पुलिस ने कई पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन लोगों ने बैंक के रिकॉर्ड में जानबूझकर गलत प्रविष्टियां की हैं।

बैंक की विफलता के मूल कारण

फॉरेन्सिक ऑडिट में यह भी सामने आया है कि बैंक की वित्तीय समस्याएं 2013-14 से शुरू हुई थीं। इस दौरान बैंक ने कथित तौर पर गलत फैसले किए थे, जिससे अब उसकी हालत संकट में है। मशीनी खरीददारी और अन्य मदों में ऋण वितरण का दुरुपयोग किया गया था।

एनपीए और फंसी जमापूंजी का संकट

बैंक की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह समझना मुश्किल नहीं है कि लगभग 38 करोड़ रुपये का एनपीए कैसे बना। वहीं, लगभग 9,000 खाताधारकों की 124 करोड़ रुपये से अधिक की जमापूंजी संकट में है।

प्रोविजनिंग का महत्व और सवाल

बैंक प्रबंधन की ओर से प्रोविजनिंग की प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही बरती गई है। यह सवाल उठता है कि यदि समय रहते सही प्रोविजनिंग की गई होती, तो शायद बैंक की वित्तीय कमजोरी समय से ज्ञात हो सकती थी।

भविष्य की दिशा

खाताधारकों की उम्मीदें अब जवाबों पर नहीं बल्कि ठोस समाधानों पर टिकी हुई हैं। वे सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि अपनी जमा पूंजी की सुरक्षा और वापसी की मांग कर रहे हैं।

दुनिया के इस कठिन दौर में। बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को बनाए रखना आवश्यक है ताकि खाताधारकों के विश्वास को बहाल किया जा सके।

फिलहाल, खाताधारक अब समाधान की उम्मीद कर रहे हैं और बैंक प्रबंधन पर भारी जिम्मेदारी है कि वे उन्हें समय रहते उचित जानकारी और उपाय प्रदान करें।

For more updates, visit Netaa Nagari

सादर, टीम नेटा नगरी
सविता शर्मा

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow