रक्षा अनुसंधान विद्यालय में पढ़ा रहे शिक्षकों की नौकरी पर संकट, दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत
Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून के रक्षा अनुसंधान विद्यालय (RAV) में दो से तीन दशक से पढ़ा रहे शिक्षकों और कर्मचारियों को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने साफ कर दिया है कि मामले की अगली सुनवाई तक न तो उनकी सेवा शर्तों से छेड़छाड़ होगी और न ही वेतन ढांचे में … The post 20-30 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों की नौकरी पर संकट, हाई कोर्ट ने लगाई रोक appeared first on Round The Watch.
रक्षा अनुसंधान विद्यालय में पढ़ा रहे शिक्षकों की नौकरी पर संकट, दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत
कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के रक्षा अनुसंधान विद्यालय (RAV) में 20-30 साल से कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों को दिल्ली हाई कोर्ट से एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की अगली सुनवाई तक उनकी सेवा शर्तों और वेतन में कोई बदलाव नहीं होगा।
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राजकुमार धिमान, देहरादून: देहरादून के रक्षा अनुसंधान विद्यालय (RAV) में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए हालिया समय बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने कर्मचारियों को एक बड़ी राहत देते हुए कहा है कि मामले की अगली सुनवाई तक उनकी सेवा शर्तों और वेतन ढांचे में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं होगा। अदालत की यह कार्रवाई कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मामले का परिचय
इस विवाद की उत्पत्ति तब हुई जब विद्यालय का प्रबंधन 20 अप्रैल 2026 को दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसायटी (DAV) को सौंपा गया। इसके बाद, विद्यालय के कर्मचारियों को नई संविदा पर आधे वेतन पर नियुक्ति दी जाने का अनुमान लगाया गया, जिससे कर्मचारियों में असंतोष उत्पन्न हुआ और उन्होंने कोर्ट का रुख किया।
सीधे तौर पर हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने 27 जुलाई को सुनवाई के दौरान कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौजूदा स्थिति बनाए रखने की आवश्यकता की बात कही। इसके साथ ही, उन्होंने निर्देश दिया कि रक्षा अनुसंधान विद्यालय के याचिकाकर्ता कर्मचारियों की सेवा में किसी भी तरह का परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को भी जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
जब प्रबंधन बदलने के बाद कर्मचारियों ने वेतन में कमी और काम की परिस्थितियों में बदलाव की आशंका जताई, तो यह स्पष्ट हो गया कि उनकी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आखिरकार, दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की।
NOC और सहमति पत्र: नई चुनौतियाँ
इसके अलावा, कर्मचारियों ने अदालत में एक अवमानना याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद उनका वेतन नहीं दिया जा रहा था। DAV ने यह दावा किया कि कर्मचारियों के पास आवश्यक अविश्वास पत्र (NOC) और सहमति पत्र नहीं होने के कारण वेतन रोका गया था। इसके विपरीत, कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि केवल प्रबंधन का बदलाव उनके वर्षों के सेवा अनुबंधों को समाप्त नहीं कर सकता।
आधे वेतन पर अनुबंध की ख़बरें
DRDO Aided Schools Staff Association ने अदालत को बताया कि कर्मचारियों को नई संविदा पर नियुक्त करने और मौजूदा पारिश्रमिक को आधे करने की योजना बनाई जा रही है। संघ ने यह स्पष्ट किया कि कई शिक्षक और कर्मचारी पिछले 20 से 30 वर्षों से सेवा में हैं और उन्हें अनुबंधित कर्मचारी बनाना उनके अधिकारों पर आघात होगा।
अन्य DRDO स्कूलों पर निगरानी
सुनवाई के दौरान केंद्र ने अदालत को सूचित किया कि इस समय केवल देहरादून का रक्षा अनुसंधान विद्यालय ही DAV को संचालित किया जा रहा है। अन्य DRDO सहायता प्राप्त स्कूलों के विषय में अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में अन्य DRDO विद्यालयों के प्रबंधन का भी हस्तांतरण होता है, तो कर्मचारी पुनः अदालत का सहारा ले सकते हैं।
यह मामला न केवल देहरादून के शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पूरे देश के शिक्षा क्षेत्र में अपने प्रकार की स्थिति को प्रस्तुत करता है। ऐसे मामलों में न्यायालय की सख्त और त्वरित कार्रवाई आवश्यक है ताकि लंबे समय से सेवा कर रहे कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा हो सके।
अंततः यह फैसला उस समय एक महत्वपूर्ण संदेश देता है जब एक ओर शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव आ रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा हेतु संगठनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
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टीम नेटा नगरी सुषमा शर्मा
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