चकराता में भाजपा मंत्री के खिलाफ गंभीर आरोप, विधायक पत्नी ने मंत्री आवास का किया घेराव
देहरादून चकराता क्षेत्र में समाज कल्याण विभाग के करीब 12 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर भाजपा के भीतर ही विवाद गहरा गया है। रविवार को भाजपा विधायक मुन्ना सिंह…
चकराता में भाजपा मंत्री के खिलाफ गंभीर आरोप, विधायक पत्नी ने मंत्री आवास का किया घेराव
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कम शब्दों में कहें तो, चकराता में भाजपा के भीतर 12 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। यह विवाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक मुन्ना सिंह चौहान की पत्नी द्वारा उठाए गए गंभीर आरोपों के कारण गहरा हो गया है।
देहरादून के चकराता क्षेत्र में समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी किए गए करीब 12 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर भाजपा में घमासान मचा हुआ है। रविवार को भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान की पत्नी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर समाज कल्याण मंत्री खजान दास के आवास का घेराव किया। कार्यकर्ताओं ने वहां सांकेतिक धरना देकर टेंडर से संबंधित प्रक्रिया को निरस्त करने और उसकी नई समीक्षा करने की मांग की।
धरने को संबोधित करते हुए मधु चौहान ने कहा, "यह विरोध किसी एक दिन का आक्रोश नहीं, बल्कि वर्षों से जमा नाराजगी का परिणाम है। पार्टी के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है और सरकारी योजनाओं का लाभ कांग्रेस से जुड़े लोगों को मिल रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि चकराता में भाजपा के पास विधायक, जिला पंचायत और ब्लाक प्रमुख जैसे राजनीतिक पद नहीं हैं, जिससे कार्यकर्ताओं की निराशा बढ़ रही है।
चौहान ने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं की मांग है कि विवादित सूची को निरस्त कर नई समीक्षा की जाए। उनका कहना था कि चुनाव और पार्टी के कार्यक्रमों के समय कार्यकर्ताओं को आगे लाया जाता है, लेकिन जब योजनाओं के आवंटन की बात आती है, तो उनकी बात क्यों नहीं सुनी जाती? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कार्यकर्ताओं को अपनी समस्याएँ लेकर किसके पास जाना चाहिए।
मधु चौहान ने प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात के संदर्भ में बताया कि संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, "समाज कल्याण मंत्री खजान दास को स्वयं कार्यकर्ताओं के बीच आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि उन्हें मंत्री बनाने वाले भी कार्यकर्ता ही हैं।"
इस विवाद के बाद, समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने पत्रकारों से बात करते हुए टेंडर प्रक्रिया में कोई कमीशनखोरी के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा, "यदि एक प्रतिशत कमीशन भी साबित होता है, तो मैं मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा और आत्महत्या भी कर लूंगा।" उनका यह बयान क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
मंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट है कि उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में किसी भी तरह की कमीशनखोरी के आरोप को गंभीरता से नकारा है। हालाँकि, प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं और कार्यकर्ताओं की ओर से की गई शिकायतों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि समीक्षा और संबंधित दस्तावेजों से ही होगी।
चकराता क्षेत्र में विवादित टेंडर को अनुसूचित जनजाति से संबंधित योजनाओं के बजट से जोड़ा जा रहा है। टीएसपी (ट्राइबल सब-प्लान) और एसटीसी (शेड्यूल्ड ट्राइब कंपोनेंट) का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए लक्षित बजट उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य किए जाते हैं।
यह धनराशि इसलिए निर्धारित की गई है कि इसका प्रत्यक्ष लाभ अनुसूचित जनजाति समुदायों को मिले। वर्तमान में चकराता के 12 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर उठे विवाद में शामिल कार्यों, लाभार्थियों और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। सूची के प्रस्तावित समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आवंटित धनराशि का उपयोग सही तरीके से किया गया या नहीं।
इस पूरे मामले ने भाजपा के भीतर गहरे असंतोष को उजागर किया है, खासकर उन कार्यकर्ताओं के बीच जो लंबे समय से पार्टी के लिए मेहनत कर रहे हैं। भविष्य में इससे पार्टी की सामूहिकता पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना होगा।
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सादर, सुमन कुमारी
टीम Netaa Nagari
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