उत्तराखण्ड का भूस्खलन प्रबंधन मॉडल: अन्य राज्यों में बढ़ी पहचान, खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना से मिली पहली राजस्व प्राप्ति

देहरादून उत्तराखण्ड की भूस्खलन विशेषज्ञता का दायरा लगातार बढ़ रहा है। राज्य में भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन के क्षेत्र में विकसित तकनीकी क्षमता एवं अनुभव को अब दूसरे राज्यों…

Aug 20, 2026 - 00:37
 150  1.5k
उत्तराखण्ड का भूस्खलन प्रबंधन मॉडल: अन्य राज्यों में बढ़ी पहचान, खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना से मिली पहली राजस्व प्राप्ति
उत्तराखण्ड का भूस्खलन प्रबंधन मॉडल: अन्य राज्यों में बढ़ी पहचान, खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना से मिली पहली राजस्व प्राप्ति

उत्तराखण्ड का भूस्खलन प्रबंधन मॉडल: अन्य राज्यों में बढ़ी पहचान, खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना से मिली पहली राजस्व प्राप्ति

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड की भूस्खलन प्रबंधन प्रणाली ने न केवल राज्य के भीतर, बल्कि बाहर भी अपनी उपयोगिता साबित की है। खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना से प्राप्त राजस्व के साथ, राज्य की तकनीकी क्षमता को पहचान मिली है।

देहरादून: उत्तराखण्ड की भूस्खलन विशेषज्ञता का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य में भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन के क्षेत्र में विकसित तकनीकी क्षमता एवं अनुभव अब अन्य राज्यों में भी पहचान पा रहे हैं। राज्य का उत्तराखण्ड भूस्खलन एवं न्यूनीकरण केन्द्र अब दूसरे राज्यों में भी अपनी तकनीकी सेवाएँ प्रदान करके आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। केन्द्र को पहली बार किसी बाहरी राज्य की परियोजना में दी गई तकनीकी सेवाओं के तौर पर 4 लाख 21 हजार रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई है। यह राशि केन्द्र द्वारा तैयार की गई Detailed Project Report (DPR) और दी गई तकनीकी परामर्श सेवाओं के लिए प्राप्त हुई है।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव, विनोद कुमार सुमन ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के भवन परिसर के समीप भूस्खलन की समस्या उत्पन्न हुई थी। इसकी तकनीकी समाधान और आवश्यक सुरक्षा कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने उत्तराखण्ड भूस्खलन एवं न्यूनीकरण केन्द्र से संपर्क किया। निगम ने केन्द्र को भूस्खलन रोकथाम कार्यों के लिए DPR तैयार करने तथा निर्माण कार्यों के तकनीकी पर्यवेक्षण का कार्य सौंपा।

इस कार्य को पूरा करने के लिए यूएलएमएमसी की तकनीकी टीम ने जनवरी 2025 में परियोजना स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। स्थल की भौगोलिक एवं तकनीकी स्थितियों का अध्ययन करने के बाद आवश्यक जांच और विश्लेषण के आधार पर DPR तैयार की गई। डॉ. शांतनु सरकार के मार्गदर्शन में, तकनीकी दल ने DPR को तैयार करने के साथ-साथ साइट सुपरविजन और अन्य तकनीकी कार्यों का पूरा किया। इसमें सहायक अभियंता कौस्तुभ बड़थ्वाल जैसे तकनीकी विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

यह साबित करता है कि उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केन्द्र ने अपने तकनीकी सेवाओं से मात्र राजस्व ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता में भी वृद्धि की है। 19 अगस्त 2026 को इस कौशल का एक और मील का पत्थर स्थापित हुआ, जब उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की ओर से DPR और तकनीकी सेवाओं के लिए चेक का वितरण किया गया। यह केन्द्र की स्थापना के बाद पहली बार तकनीकी सेवाओं के माध्यम से अर्जित राजस्व है।

विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यूएलएमएमसी विभिन्न तकनीकी कार्यों में विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान कर रहा है, जिसमें DPR तैयार करना, परियोजना प्रबंधन परामर्शी सेवाएं, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का तकनीकी निरीक्षण, भू-वैज्ञानिक, भू-भौतिकीय एवं भू-तकनीकी अध्ययन शामिल हैं। इन कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए केन्द्र में अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ तकनीकी मानव संसाधनों की व्यवस्था की गई है।

जिन्होंने अब तक सिंचाई विभाग तथा लोक निर्माण विभाग जैसे विभिन्न विभागों के लिए आठ से अधिक महत्वपूर्ण DPR तैयार की हैं, उनकी विशेषज्ञता अब राज्य की सीमाओं से बाहर भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है। खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के लिए मिली यह पहली राजस्व प्राप्ति केन्द्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस प्रकार उत्तराखण्ड का भूस्खलन प्रबंधन मॉडल अन्य राज्यों में भी एक मानक स्थापित कर रहा है। विभिन्न तकनीकी कार्यों में राज्य की विशेषज्ञता को मान्यता मिल रही है, जो विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें: Netaa Nagari.

Team Netaa Nagari - प्रिया शर्मा

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow