उत्तराखंड हाई कोर्ट में फर्जी प्रमाणपत्रों से MBBS सीटों की हेराफेरी, जनहित याचिका दायर

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में एमबीबीएस प्रवेश के लिए आयोजित नीट-यूजी काउंसलिंग 2026 में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे और मूल निवास समेत विभिन्न प्रमाणपत्रों के कथित दुरुपयोग का मामला उत्तराखंड हाई कोर्ट पहुंच गया है। नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने इस प्रकरण में जनहित याचिका दायर कर राज्य गठन से अब तक जारी स्वतंत्रता सेनानी … The post हाई कोर्ट पहुंचा फर्जी प्रमाणपत्रों से MBBS सीटें हथियाने का मामला, जनहित याचिका दाखिल appeared first on Round The Watch.

Oct 11, 2026 - 00:37
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उत्तराखंड हाई कोर्ट में फर्जी प्रमाणपत्रों से MBBS सीटों की हेराफेरी, जनहित याचिका दायर
उत्तराखंड हाई कोर्ट में फर्जी प्रमाणपत्रों से MBBS सीटों की हेराफेरी, जनहित याचिका दायर

उत्तराखंड हाई कोर्ट में फर्जी प्रमाणपत्रों से MBBS सीटों की हेराफेरी, जनहित याचिका दायर

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में एमबीबीएस प्रवेश के लिए आयोजित नीट-यूजी काउंसलिंग में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे और मूल निवास के प्रमाणपत्रों में फर्जीवाड़े का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता ने इस मामले की स्वतंत्र जांच और प्रमाणपत्रों की जांच की मांग की है।
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राजकुमार धिमान, देहरादून: उत्तराखंड में एमबीबीएस प्रवेश के लिए आयोजित नीट-यूजी काउंसलिंग 2026 में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे एवं मूल निवास सहित विभिन्न प्रमाणपत्रों के दुरुपयोग का मामला अब उच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने इस मामले में एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें राज्य गठन के बाद से जारी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित, मूल निवास और जाति से जुड़े प्रमाणपत्रों की जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि काउंसलिंग प्रक्रिया में सामने आई विसंगतियां केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं हो सकतीं। प्रधान जांच की आवश्यकता है क्योंकि प्रमाणपत्र जारी करने से लेकर सत्यापन, प्रवेश और आवंटन तक की प्रणाली में अनियमितताएं हो सकती हैं।

स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के 24 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों पर सवाल

जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड नीट-यूजी काउंसलिंग 2026 की पहली चरण की अनंतिम सूची में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के लिए 24 अभ्यर्थियों के नाम शामिल थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि इनमें से 16 के प्रमाणपत्र सरकारी पोर्टल पर सत्यापन के दौरान फर्जी पाए गए हैं। इसके अलावा, उत्तराखंड का मूल निवासी होने का दावा करने वाले 524 अभ्यर्थियों की काउंसलिंग रिकॉर्ड में भी विसंगतियां पाई गई हैं।

आवेदन प्रक्रिया में विसंगतियों की पहचान

याचिका में बताया गया है कि आवेदन और प्रमाणपत्रों के सत्यापन के दौरान कई विसंगतियां सामने आई हैं, जैसे कि आवेदन का विवरण गायब होना, प्रमाणपत्र के नाम में अंतर होना, प्रमाणपत्र की श्रेणी का मेल नहीं खाना और कुछ आवेदनों का निरस्त होना। उदाहरण के लिए, प्रियांजल सिंह, अनुष्का बंसील, कार्तिक वत्स, और अन्य अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की जांच की गई है।

याचिकाकर्ता ने चिंता व्यक्त की है कि इन विसंगतियों को सामान्य प्रशासनिक त्रुटि मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच का विषय होनी चाहिए।

कानूनी कार्यवाही की मांग

याचिका में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के सभी 24 अधिकारियों से जुड़े नीट रोल नंबरों की भी जांच की गई है। इन अभ्यर्थियों के दूसरे चरण की काउंसलिंग के रिकॉर्ड में भी नाम हैं, जिसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है, क्योंकि प्रमाणपत्रों की जांच का असर केवल आवेदन प्रक्रिया पर नहीं, बल्कि सीट आवंटन में भी हो सकता है।

कुल 524 काउंसलिंग प्रविष्टियों की जांच आवश्यक

याचिका में आगे कहा गया है कि 195 अभ्यर्थियों ने उत्तराखंड का मूल निवासी होने का दावा किया, जबकि उनके शैक्षणिक विवरण अन्य राज्यों के संस्थानों से जुड़े हैं। दूसरी काउंसलिंग के लिए 329 रिकॉर्ड में भी इसी प्रकार की विसंगतियों की पहचान की गई है। ऐसे में याचिकाकर्ता ने इन सभी प्रमाणपत्रों की स्वतंत्र और न्यायिक जांच की मांग की है।

अन्य आरोप और मुद्दे

याचिका में राजस्व निरीक्षक द्वारा की गई शिकायत का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें शिकायत के बाद 22 सितंबर 2026 को दर्ज की गई एफआईआर का हवाला भी शामिल है। याचिकाकर्ता का कहना है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के उपयोग में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

इसके अलावा, यह भी बताया गया कि हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने 20 अभ्यर्थियों का अनंतिम आवंटन निरस्त किया है। यह कार्रवाई प्रमाणपत्रों के सत्यापन में हुई गड़बड़ियों के कारण की गई है।

सीबीआई जांच और डिजिटल रिकॉर्ड की मांग

याचिका में ये भी मांग की गई है कि सीबीआई के द्वारा हाई कोर्ट की निगरानी में जांच कराई जाए, जिसमें सभी दस्तावेजों, अपलोड किए गए प्रमाणपत्रों और काउंसलिंग के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस स्थिति में याचिकाकर्ता ने इस मामले में अधिक गंभीरतापूर्वक विचार करने का अनुरोध किया है।

अब उत्तराखंड हाई कोर्ट में यह मामला जनहित याचिका के अंतर्गत दायर किया गया है, जिसमें न्यायालय से साक्ष्यों के आधार पर उचित निर्णय की उम्मीद की जा रही है।

इस प्रकार, यह मामला न केवल छात्रों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि चिकित्सा शिक्षा की प्रणाली में भी अच्छे बदलाव लाने का एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। सभी को इस मामले की सही और निष्पक्ष जांच में दिलचस्पी होनी चाहिए।

अब आगे की कार्रवाई पर नजर रखने की जरूरत है कि यह मामला कैसे आगे बढ़ता है।
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टीम नेटा नागरी

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