उत्तराखंड में वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीश नेगी को मिली जान से मारने की धमकी, वकीलों में आक्रोश
नैनीताल। उत्तराखंड की कानून व्यवस्था और अधिवक्ताओं की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई
उत्तराखंड में वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीश नेगी को मिली जान से मारने की धमकी, वकीलों में आक्रोश
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीश नेगी को 'यमराज' के नाम से मिली धमकी ने वकीलों के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। इस मामले में राज्य की कानून व्यवस्था और अधिवक्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नेट्टा नागरी पर अधिक अपडेट के लिए देखें।
नैनीताल। उत्तराखंड की कानून व्यवस्था के साथ-साथ अधिवक्ताओं की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीश नेगी, जो अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में पैरवी कर रहे हैं, को एक बेहद चौंकाने वाली जान से मारने की धमकी मिली है। आरोपी ने खुद को 'यमराज' बताते हुए एक पत्र के माध्यम से यह धमकी दी है, जिसने कानूनी प्रतिष्ठानों में हड़कंप मचा दिया है।
चौंकाने वाली धमकी का पत्र
अधिवक्ता नवनीश नेगी को मिला यह पार्सल पत्र बहुत घिनौनी और शातिर योजना की सूचना देता है। पत्र में लिखा गया है कि पहले तो उन्हें एक योजनाबद्ध सड़क हादसे (एक्सीडेंट) में फंसाया जाएगा और उसके बाद जानलेवा हमला कर उनकी जिंदगी को समाप्त कर दिया जाएगा। यह बात अधिवक्ता के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
सुरक्षा की गुहार
इस खत को पढ़ने के बाद नेगी ने अपनी सूझबूझ का उपयोग करके गूगल लेंस की मदद ली और उस पत्र का अनुवाद किया। खत कई कोड वर्ड्स और विभिन्न भाषाओं में लिखा गया था, जिसे सामान्यत: पढ़ना मुश्किल था। अपने जीवन की सुरक्षा के लिए उन्होंने नैनीताल पुलिस को तहरीर देकर मदद मांगी है और न्याय की मांग की है।
हाई-प्रोफाइल मामलों में उनकी भूमिका
वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीश नेगी ना केवल अंकिता भंडारी हत्याकांड में महत्वपूर्ण गवाहों के पक्ष की पैरवी कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ कई बड़े मामलों पर भी आवाज उठाई है। इसे देखते हुए, माना जा रहा है कि इन मामलों से खफा होकर किसी व्यक्ति ने उन्हें डराने के लिए यह धमकी दी है।
वकीलों का आक्रोश
इस घटना के बाद उत्तराखंड बार एसोसिएशन और प्रदेशभर के वकीलों में भयंकर आक्रोश देखा जा रहा है। वकीलों का कहना है कि यदि न्याय की लड़ाई लड़ने वाली टीम ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा? बार एसोसिएशन ने इस क्रूरतम घटना की निंदा की है और सरकार से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट (अधिवक्ता संरक्षण कानून) को लागू करने की मांग की है ताकि अधिवक्ताओं को सुरक्षित रूप से कार्य करने की आज़ादी मिले।
पुलिस की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और पत्र भेजने वाले के सुराग तलाशने के लिए साइबर सेल की मदद भी ली जा रही है। इसके अलावा, वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेने के लिए पुलिस विभाग ने उच्च स्तर पर चर्चा भी शुरू कर दी है।
इस घटना ने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है और अधिवक्ताओं के बीच भय का माहौल उत्पन्न कर दिया है। यह जरूरी है कि सरकार इस मुद्दे पर ध्यान दे और त्वरित कार्रवाई करे ताकि वकीलों को अपने काम में कोई डर न हो।
Team Netaa Nagari - प्रिया शर्मा
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