उत्तर प्रदेश: कछला गंगा का जलस्तर बढ़ा, बाढ़ में बहे दो मकान और कई झोपड़ियां
बदायूं, अमृत विचार। नरौरा से छोड़ा गया पानी अब मकानों को तहस नहस कर रहा है। जटा गांव में दो कच्चे मकान बाढ़ के पानी में समा गए, जबकि कई अन्य झोपड़ियां भी बाढ़ की भेंट चढ़ गई। दातागंज तहसील प्रशासन ने जटा और रैपुरा गांव के कटान का जायजा लिया है। रविवार को नरौरा से एक लाख 29 हजार क्यूसेक पानी गंगा नदी में छोड़ा गया, जबकि शनिवार को डेढ़ लाख से ऊपर पानी डिस्चार्ज किया गया। लगातार घटने के बाद बढ़ रहा पानी अब मकानों को अपने आगोश में ले रहा है। उसहैत के जटा गांव में दो...
उत्तर प्रदेश: कछला गंगा का जलस्तर बढ़ा, बाढ़ में बहे दो मकान और कई झोपड़ियां
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के जटा गांव में बाढ़ के कारण दो मकान बह गए हैं और कई झोपड़ियां भी बाढ़ की चपेट में आ गईं हैं।
विशेष रिपोर्ट के अनुसार, नरौरा से छोड़े गए पानी की भरमार ने कई कच्चे घरों को बौना बना दिया है। दातागंज तहसील प्रशासन ने जटा और रैपुरा गांव में बाढ़ के प्रभाव का जायजा लिया है। नरौरा से हाल ही में १,२९,००० क्यूसेक पानी गंगा नदी में छोड़ा गया, जबकि इससे पहले शनिवार को डेढ़ लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ गया था।
जटा गांव में बाढ़ का कहर
जटा गांव में बाढ़ की स्थिति अब वैसी हो गई है कि कई लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हो गए हैं। यहां के लोग केवल कच्चे घरों में रह रहे हैं और अब बाढ़ के पानी में वे भी डूबते नजर आ रहे हैं। प्रशासन ने ग्रामवासियों को कहाँ कि स्थिति गंभीर है और उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है।
गंगा का बढ़ता जलस्तर
गंगा नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। खासतौर पर रैपुरा के क्षेत्र में जहाँ कटान तेज हो गया है। लोग इस क्षेत्र में नुकसान के चलते दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। असमिया रफतपुर गांव भी बाढ़ के कारण जलमग्न हो गया है, जहां चार फुट पानी भर गया है।
तहसील प्रशासन की कार्रवाई
ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि वे राहत सामग्रियों की आपूर्ति नहीं कर रहे हैं, जिससे उन्हें और समस्या का सामना करना पड़ रहा है। नरौरा से छोड़े जा रहे पानी की वजह से कछला गंगा भी उफान मार रही है। गंगा घाट पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी को भी जलस्तर से खतरे में न डाला जाए।
रामगंगा व महावा नदी से खतरा
बाढ़ की स्थिति सिर्फ गंगा तक सीमित नहीं है। रामगंगा नदी ने भी कई गांवों में तबाही मचाई हुई है। नगरिया खनु गांव में बाढ़ के कारण लोग अपने घर छोड़कर जा चुके हैं। और महावा नदी ने सहसवान क्षेत्र में विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे हजारों हेक्टेयर की फसलें प्रभावित हुई हैं।
इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता को स्थिति का जायजा लेने का आदेश दिया है। स्थिति पर नजर बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।
जैसा कि सहायक अभियंता नेशपाल ने बताया, हाल ही में गंगा में जलप्रवाह कुछ कम हुआ है, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। नदी के आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ते जलस्तर ने लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिकी को बर्वाद कर रही बाढ़ फसलों को भी नुकसान पहुँचाते हुए, वर्तमान में खाने-पीने की समस्या पैदा कर रही है। ग्रामीणों को अब राहत के लिए प्रशासन की मदद का इंतजार है।
अंत में, बाढ़ का यह संकट पर्यावरणीय और आर्थिक दोनों दृष्टियों से चिंताजनक है। राहत और पुनर्वास प्रक्रिया के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करने की जरूरत है ताकि इस विकट स्थिति से निपटा जा सके।
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सादर, टीम नेटा नागरी - पूनम शर्मा
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