आपातकाल: डॉ. प्रतिमा सिंह की नजर में आवश्यक निर्णय जो देश, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए था
देहरादून। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल का बचाव करते हुए कहा
आपातकाल: डॉ. प्रतिमा सिंह की नजर में आवश्यक निर्णय जो देश, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए था
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कम शब्दों में कहें तो, 1975 में लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय था, ऐसा कहना है कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह का।
देहरादून। डॉ. प्रतिमा सिंह, जो कि कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता हैं, ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को बचाव करते हुए कहा कि उस समय की राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र, देश की एकता और संविधान की रक्षा के लिए आवश्यक था।
आपातकाल का ऐतिहासिक संदर्भ
इस बाबत डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार को अस्थिर करने के प्रयास हो रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रयास जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन और जनसंघ के सहयोग से उत्पन्न हुए थे।
डॉ. सिंह ने बताया कि जो स्थिति उत्पन्न हो रही थी, उससे देश की संवैधानिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय सार्वजनिक मंचों से सेना, पुलिस और सरकारी कर्मचारियों को सरकार के आदेश का पालन न करने की अपील की जा रही थी, जो देश में अराजकता का कारण बन सकती थी।
आपातकाल की आवश्यकता
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे संकट के समय संविधान में निहित आपातकाल संबंधी प्रावधानों का उपयोग करना सरकार की जिम्मेदारी थी। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी दोहराया कि लोकतंत्र का मूल आधार जनता द्वारा चुनी गई सरकार को अपना कार्यकाल पूरा करने देना है। इस समय विपक्ष ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को बाधित करने का प्रयास किया था।
1977 के चुनावों की याद
डॉ. प्रतिमा सिंह ने यह भी याद दिलाया कि 1977 में बनी पहली गैर-कांग्रेसी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई। इसके विपरीत, 1980 के आम चुनावों में जनता ने कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत देकर पुनः सत्ता सौंपी। उन्होंने इसे पार्टी की नीतियों और नेतृत्व पर जनता के विश्वास का प्रमाण बताया।
नोट: उपरोक्त समाचार डॉ. प्रतिमा सिंह के दावों और राजनीतिक बयान पर आधारित है। इनमें व्यक्त आरोप और ऐतिहासिक व्याख्याएं उनके विचार हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
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सादर,
टीम नेटा नगरी
प्रियंका शर्मा
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